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नेपाल की तबाही से चीन तक उठे सवाल, असली नुकसान छिपाने को लेकर घिरा ड्रैगन

Nepal Flood: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और आपदा के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं. बुधवार तक इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 579 से अधिक हो गई है. वहीं करीब 1,924 लोगों के अभी भी लापता होने की जानकारी सामने आई है. राहत और बचाव एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रही हैं. 

इस आपदा का असर नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पड़ा है. भारत के भी सैकड़ों नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाने की खबर सामने आई है. हालांकि, चीन की ओर से इस आपदा में अब तक केवल पांच लोगों की मौत की पुष्टि की गई है. ऐसे में चीन में वास्तविक नुकसान और जनहानि के आंकड़ों को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

चीन में नुकसान की जानकारी पर सवाल

द गार्जियन की एक रिपोर्ट में चीन में आपदा की कवरेज को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी मीडिया में इस त्रासदी को लेकर बहुत सीमित जानकारी सामने आ रही है. प्रभावित क्षेत्रों में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार भी आम लोगों और आपदा से प्रभावित परिवारों से बातचीत करते हुए कम ही दिखाई दे रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में पत्रकार घटनास्थल की स्थिति बताने के बजाय सरकार और राहत कार्यों से जुड़ी जानकारी पर ज्यादा ध्यान देते नजर आए. इससे चीन में आपदा से जुड़ी सूचनाओं की उपलब्धता और पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

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तिब्बत में पत्रकारों की आवाजाही पर भी सवाल

तिब्बत को लेकर चीन की नीतियां लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रही हैं. तिब्बत में विदेशी पत्रकारों की पहुंच पर कई तरह की पाबंदियां होने की बात सामने आती रही है. स्थानीय लोगों के साथ स्वतंत्र रूप से बातचीत करना भी पत्रकारों के लिए आसान नहीं माना जाता. मानवाधिकार संगठनों और तिब्बती समूहों की ओर से चीन पर तिब्बती भाषा और संस्कृति के अधिकारों को सीमित करने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं. इसी वजह से आपदा के दौरान वहां से स्वतंत्र और प्रत्यक्ष जानकारी सामने आने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

 राहत-बचाव के लिए चीन ने भेजी टीम

चीन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव दल भेजे जाने की जानकारी दी गई है. चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की थी. प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया. हालांकि, चीन की ओर से भेजी गई राहत टीम ने जमीन पर किस तरह के अभियान चलाए और कितना नुकसान हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.

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दो और ग्लेशियरों पर नजर

नेपाल के अधिकारियों ने अब संभावित खतरे को देखते हुए दो अन्य ग्लेशियरों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है. ये दोनों ग्लेशियर उस क्षेत्र के आसपास स्थित हैं, जहां ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक बाढ़ की स्थिति बनी थी. अधिकारियों को आशंका है कि अगर इन क्षेत्रों में भी ऐसी घटना होती है तो हालात और गंभीर हो सकते हैं. नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राहत और बचाव अभियान के दौरान करीब 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 15 हजार से ज्यादा जवानों को प्रभावित क्षेत्रों में लगाया गया है. सुरक्षा बल और राहत दल मलबे, बाढ़ प्रभावित इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं.

लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल

लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है. एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 517 विदेशी नागरिक और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी लापता बताए गए हैं. इससे पहले नेपाल पुलिस ने 575 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी. पुलिस के मुताबिक, इनमें 36 देशों के नागरिक शामिल हैं। आंकड़ों में 65 अमेरिकी, 62 यूक्रेनी और 33 ब्रिटिश नागरिकों के लापता होने की जानकारी भी दी गई है. इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में 149 नेपाली पर्यटकों और 1,407 स्थानीय नागरिकों के भी लापता होने की बात सामने आई है. प्रशासन और सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रही हैं और लापता लोगों को खोजने की कोशिश की जा रही है.

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