वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को बेहद अहम माना जाता है। क्योंकि यह ऊर्जा के प्रवेश का सबसे अहम स्थान होता है। यहीं से पॉजिटिव और निगेटिव दोनों तरह की ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। इसलिए इस स्थान को शुभ, साफ और संतुलित रखना जरूरी होता है। मान्यताओं के मुताबिक अगर घर के मुख्य द्वार पर भोलेनाथ के प्रिय वाहन नंदी का चित्र या प्रतिमा सही दिशा में रखी जाए, तो घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
दूर होगी निगेटिव एनर्जी
वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर के मुख्य द्वार पर नंदी की प्रतिमा को रखने निगेटिव एनर्जी का प्रवेश कम होता है। मान्यता है कि नंदी पॉजिटिव ऊर्जा को आकर्षित करते हैं और नकारात्मक प्रभावों और बुरी शक्तियों से घर की रक्षा करते हैं।
सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि
नंदी महादेव के परम भक्त हैं। जहां पर उनकी कृपा होती है, वहां सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। मुख्य द्वार पर नंदी की प्रतिमा रखने से घर में बरकत और खुशहाली आती है।
कम होगा वास्तु दोष
नंदी की प्रतिमा को रखने से अगर घर के मुख्य द्वार से जुड़ा कोई छोटा-मोटा वास्तु दोष भी दूर हो जाता है। लेकिन अन्य बड़े वास्तु दोषों के लिए वास्तु एक्सपर्ट की सलाह पर उपाए किए जा सकते हैं।
बढ़ता है साहस और आत्मविश्वास
नंदी को शक्ति, धैर्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि घर में नंदी की उपस्थिति से परिवार के लोगों में आत्मविश्वास बढ़ता है। वहीं मुश्किल परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने और सही निर्णय लेने की प्रेरणा मिलती है।
सुरक्षा का प्रतीक
शिवालयों में नंदी को हमेशा प्रवेश द्वार पर स्थापित किया जाता है। नंदी भोलेनाथ के रक्षक और द्वारपाल हैं। धार्मिक मान्यता है कि मुख्य द्वार पर नंदी की प्रतिमा लगाने से घर पर महादेव की कृपा बनी रहती है और परिवार की भी रक्षा होती है।
वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक नंदी की प्रतिमा को घर के मुख्य द्वार पर रखना शुभ होता है। इससे निगेटिव एनर्जी दूर होती है और मानसिक शांति मिलती है।
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रक्षाबंधन त्योहार हिंदू धर्म में बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन पर्व को प्रेम और उत्साह के साथ मनाते हैं। बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और तरक्की की कामना करती हैं। साथ ही भाई भी अपने बहन की रक्षा का वचन देते हैं। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है।
इस समय बाजार राखी से सजा हुआ है। जब राखी की खरीदें, कुछ चीजों का ध्यान रखना बेहद जरुरी होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाई की कलाई पर बांधी जाने वाली राख एक धागा नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।
इसलिए जब आप राखी खरीदने जाएं, तो वास्तु नियमों का ध्यान जरुर रखें। कुछ राखियों को बांधने से बचना बेहद जरुरी है। आइए आपको बताते हैं किस तरह की राखियों को कभी नहीं बांधना चाहिए।
रक्षाबंधन 2026 पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
इस बार राखी का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक रहेगा।
लाभ-उन्नति मुहूर्त- सुबह 7:33 बजे से सुबह 9:10 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त- सुबह 9:10 बजे से सुबह 10:46 बजे तक
किन राखियों के खरीदने से बचना चाहिए
भगवान की तस्वीर वाली राखी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान की तस्वीर वाली राखी भाई को कभी नहीं बांधनी चाहिए। माना जाता है कि हाथ में इस तरह की राखी बांधना सही नहीं होता है।
एविल आई वाली राखी
रक्षाबंधन पर एविल आई यानी नजर से जुड़ी राखी को बांधने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तरह की राखी नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी होती है। रक्षाबंधन पर सकारात्मक प्रतीकों वाली राखी को खरीदने से बचना चाहिए।
काले रंग की राखी
कभी भी अपने भाई के कलाई पर काले रंग की राखी नहीं बांधनी चाहिए। क्योंकि शुभ अवसरों पर काले रंग को उचित नहीं माना जाता है। जब आप राखी खरीदें तो लाल, पीले, केसरिया जैसे शुभ रंगों वाली राखी को खरीदें।
प्लास्टिक की राखी
ज्योतिषी के अनुसार, प्लास्टिक को राहु ग्रह से संबंधित माना जाता है। ऐसे में रक्षा बंधन जैसे शुभ दिन पर राखी खरीदने से बचना चाहिए। इसलिए रेशम के धागे से बनी पारंपरिक राखी का चयन कर सकते हैं। यह भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
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