सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका में बड़ा फैसला सामने आया है। मेटा ने बुधवार, 26 अगस्त को 47 अमेरिकी राज्यों, वॉशिंगटन डीसी और कुछ अन्य क्षेत्रों की ओर से दायर मुकदमों को खत्म करने के लिए अगले दस वर्षों में 17 अरब डॉलर से अधिक देने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही कंपनी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर किशोरों के इस्तेमाल को लेकर कई सख्त बदलाव लागू करेगी।
मामले में राज्यों ने आरोप लगाया था कि मेटा ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की ऐसी संरचना तैयार की, जिससे बच्चों और किशोरों में इन मंचों के लगातार और आदतन इस्तेमाल को बढ़ावा मिला। आरोप यह भी था कि कंपनी को इससे जुड़े नुकसान की जानकारी थी, लेकिन उसने लोगों को पूरी तस्वीर नहीं बताई। इसके अलावा 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की निजी जानकारी एकत्र करने को लेकर भी कंपनी पर सवाल उठाए गए थे। मेटा ने इन आरोपों में कोई गलती मानने से इनकार किया है।
समझौते के तहत शुरुआती पांच वर्षों में 18 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम पर रोजाना कुल दो घंटे की सीमा तय की जाएगी। हालांकि, निजी संदेश भेजने की सुविधा इस सीमा से बाहर रहेगी। सत्यापित अभिभावक इस समय सीमा में बदलाव कर सकेंगे।
किशोरों के लिए रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक मंच के ज्यादातर हिस्से बंद रहेंगे। रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक अधिकतर सूचनाएं बंद रहेंगी। स्कूल के दिनों में सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक भी सूचनाएं शांत रखी जाएंगी। निजी संदेश रात के प्रतिबंध के दौरान भी उपलब्ध रहेंगे।
गौरतलब है कि मेटा को केवल समय सीमा ही नहीं, बल्कि मंच की मूल संरचना में भी बदलाव करना होगा। किशोरों के लिए गैर-व्यक्तिगत सामग्री वाली फीड का विकल्प, पसंद और प्रतिक्रिया की संख्या को डिफॉल्ट रूप से छिपाना, सौंदर्य संबंधी बदलाव वाले फिल्टर पर रोक और उम्र की बेहतर पुष्टि जैसे उपाय शामिल हैं। अभिभावकीय नियंत्रण और हानिकारक सामग्री से बचाव के उपाय भी मजबूत किए जाएंगे।
इन बदलावों की जरूरत क्यों महसूस हुई, इसका अंदाजा दिसंबर 2025 के प्यू अध्ययन से लगाया जा सकता है। अध्ययन के मुताबिक अमेरिका में 36 प्रतिशत किशोर यूट्यूब, टिकटॉक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और फेसबुक में से कम से कम एक मंच का लगभग लगातार इस्तेमाल करते हैं।
इससे पहले मार्च में लॉस एंजिलिस की एक जूरी ने के.जी.एम. बनाम मेटा मामले में मेटा और गूगल को एक युवा उपयोगकर्ता के मानसिक स्वास्थ्य को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार मानते हुए 60 लाख डॉलर का हर्जाना तय किया था। ऐसे मामलों में अंतहीन सामग्री, सिफारिश प्रणाली, सूचनाएं और पसंद तथा देखे जाने की संख्या जैसे फीचर सवालों के घेरे में रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, मेटा को समझौते के पालन की निगरानी के लिए पांच वर्षों तक एक स्वतंत्र लेखा परीक्षक नियुक्त करना होगा। उसे कंपनी के संबंधित दस्तावेजों, कर्मचारियों, प्रणालियों और आंकड़ों तक पहुंच मिलेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पांच साल की निगरानी दस साल के समझौते की अवधि से छोटी है और असली सवाल यह रहेगा कि इन उपायों से किशोरों के स्वास्थ्य, नींद और आदतन इस्तेमाल पर वास्तव में कितना असर पड़ता है।
कॉमन सेंस मीडिया के रोबी टोर्नी का कहना है कि समय सीमा और रात के प्रतिबंध जैसे उपाय इसलिए अधिक प्रभावी हो सकते हैं क्योंकि वे पहले से लागू होंगे। वहीं, मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय की कैरोलिना रोसिनी ने इसे ऐसा महत्वपूर्ण कदम बताया है जिसमें कंपनी को केवल अपनी नीतियां बदलने के बजाय मंच की मूल बनावट बदलनी होगी।
बता दें कि यह समझौता मेटा के खिलाफ राज्यों के मुकदमे को खत्म करता है, लेकिन बच्चों और सोशल मीडिया से जुड़े हजारों दूसरे मामले अभी लंबित हैं। समझौते में यह भी कहा गया है कि इसे अन्य राज्यों या देशों में कानूनी मिसाल नहीं माना जाएगा।
इस समझौते का असर केवल मेटा तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। समझौते के तहत करीब 70 प्रतिशत राशि राज्यों को मिलेगी, जबकि बाकी 30 प्रतिशत राशि तभी जारी होगी जब यूट्यूब और टिकटॉक भी किशोरों के लिए इसी तरह के सुरक्षा उपाय अपनाएं और भुगतान करें। अगर प्रमुख मंचों पर ऐसे नियम लागू होते हैं तो प्रत्येक मंच पर रोजाना उपयोग की सीमा घटकर 60 मिनट तक की जा सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किशोर एक ही मंच तक सीमित नहीं रहते। ऐसे में केवल एक कंपनी पर प्रतिबंध लगाने से उपयोगकर्ता दूसरे मंच की ओर जा सकते हैं। इसलिए वास्तविक चुनौती ऐसे नियम बनाने की है जो बच्चों की नींद, मानसिक स्वास्थ्य, समय और वास्तविक जीवन के संबंधों को सभी प्रमुख सामाजिक मंचों पर बेहतर तरीके से सुरक्षित कर सकें।
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तेल बाजार में शुक्रवार को एक बार फिर नरमी देखने को मिली है। कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रही और दोनों प्रमुख मानक साप्ताहिक नुकसान की ओर बढ़ते दिखे। बाजार में मुख्य नजर ईरान से निकलने वाले तेल की मात्रा और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही पर बनी हुई है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध ने अनिश्चितता बनाए रखी है।
शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल 52 सेंट यानी करीब 0.6 प्रतिशत गिरकर 89.18 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत में 1.01 डॉलर यानी 1.2 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 82.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। सप्ताह के आधार पर ब्रेंट में करीब 5.5 प्रतिशत और डब्ल्यूटीआई में लगभग 5.2 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, बाजार को होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल की आवाजाही में आई कुछ बढ़ोतरी ने उम्मीद से ज्यादा राहत दी है। रिस्टैड के विश्लेषक जेनिव शाह के मुताबिक, ईरान-ओमान समुद्री गलियारे से बढ़ी आपूर्ति और अमेरिका की ओर से समुद्री मार्ग से बारूदी सुरंगें हटाने संबंधी दावों ने बाजार को चौंकाया है। उनका कहना है कि जलडमरूमध्य से निकलने वाली उपलब्ध मात्रा और आपूर्ति बढ़ने की गति इस सप्ताह कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह हो सकती है।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। युद्ध से पहले दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती थी। ऐसे में यहां आवाजाही बाधित होने पर वैश्विक बाजार में कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।
हालांकि, इस मार्ग से तेल और अन्य वस्तुओं की आवाजाही अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। प्रारंभिक जहाजरानी आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को केवल सात मालवाहक जहाज होर्मुज से गुजरे, जबकि एक दिन पहले यह संख्या 17 थी। पिछले दस दिनों का औसत करीब 15 जहाज प्रतिदिन रहा है। दूसरे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब-अल-मंदेब से गुरुवार को 17 मालवाहक जहाज गुजरे।
गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र से हालिया तेल निर्यात करीब 1.5 से 1.6 करोड़ बैरल प्रतिदिन है। यह युद्ध से पहले के स्तर से 70 से 80 लाख बैरल प्रतिदिन कम है, लेकिन मार्च में दर्ज सबसे निचले स्तर से 50 से 60 लाख बैरल प्रतिदिन ज्यादा है।
इस बीच अमेरिका ने इस सप्ताह ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। ईरान ने इन्हें अमानवीय और शत्रुतापूर्ण कदम बताया है। मध्यस्थ देश होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही बहाल कराने के प्रयास तेज कर रहे हैं। कतर के एक दूत के साथ बातचीत के बाद ईरान ने सामान्य समुद्री यातायात बहाल करने के लिए अपनी शर्तों की सूची तैयार करने पर सहमति जताई है।
तेल बाजार पर वेनेजुएला से जुड़ी गतिविधियों का भी असर पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन वेनेजुएला के तेल भंडार के एक हिस्से तक लंबे समय के लिए पहुंच सुनिश्चित करने के लिए समझौते पर बातचीत कर रहा है। इससे भविष्य में अमेरिका के लिए तेल आयात की लागत कम होने की संभावना जताई जा रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला तेल निर्यातक देशों के संगठन से बाहर निकलने पर भी विचार कर रहा है।
दूसरी ओर, रूस और यूक्रेन के बीच तनाव बढ़ने से बाजार की चिंता बनी हुई है। रूस ने ब्रिटेन की ओर से उपलब्ध कराई गई लंबी दूरी की मिसाइलों से यूक्रेन के हमलों के बाद ब्रिटिश सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसी बीच यूक्रेन ने रूस के यारोस्लाव क्षेत्र में एक तेल शोधन संयंत्र को निशाना बनाने का दावा किया है।
बता दें कि तेल बाजार में इस समय आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, अमेरिका-ईरान संबंध और युद्ध से जुड़े घटनाक्रम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए होर्मुज से तेल की आवाजाही में मामूली बदलाव भी आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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