मध्य प्रदेश: रीवा में जच्चा-बच्चा मृत्यु मामले में जांच शुरू, चार अस्पताल कर्मचारी निलंबित
रीवा, 28 अगस्त (आईएएनएस)। रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मृत्यु के बाद दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने शुक्रवार को बताया कि राज्य सरकार ने चिकित्सा लापरवाही और महिला के परिवार के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे शुक्ला ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा और निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मरीजों और उनके परिजनों के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार के साथ-साथ निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन करना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि जांच समिति के निष्कर्षों के आधार पर तथ्यों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे।
सरकार के अनुसार, रीवा जिले के बैकुंठपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत हटवा गांव की निवासी अमित मिश्रा की पत्नी कल्पना मिश्रा को 26 अगस्त को सुबह लगभग 2:38 बजे गांधी मेमोरियल अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग में भर्ती कराया गया था। उसी दिन रात लगभग 11:55 बजे उनकी और उनके अजन्मे बच्चे की मृत्यु हो गई।
चिकित्सा रिकॉर्ड से पता चला कि जब उन्हें भर्ती कराया गया था तब उनके प्लेटलेट की संख्या लगभग 30,000 प्रति माइक्रोलीटर थी। उनका रक्तचाप बहुत अधिक था और लिवर एंजाइम भी उच्च स्तर पर पाए गए। डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और एचईएलएलपी सिंड्रोम के साथ-साथ पूर्ण अवधि की गर्भावस्था से ग्रसित पाया। सरकार ने कहा कि निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार और आवश्यक चिकित्सा प्रक्रियाएं शुरू की गईं।
बाद में परिवार ने दुर्व्यवहार और उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की सोनल अग्रवाल और एनेस्थीसिया विभाग की निधि पांडे को प्रथम दृष्टया कर्तव्य में घोर लापरवाही और गंभीर अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। दोनों नर्सिंग अधिकारियों को परिवार के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद निलंबित किया गया।
आरोपों की जांच के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों की एक समिति गठित की गई है। परिवार की मांग पर रीवा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की एक संयुक्त टीम ने महिला और उसके अजन्मे बच्चे का पोस्टमार्टम कराया। आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, शवों को शव वाहन द्वारा उनके पैतृक गांव ले जाया गया।
--आईएएनएस
एमएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
संचार साथी पोर्टल की बड़ी सफलता, जुलाई में 77,692 खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद: सरकार
नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। दूरसंचार विभाग (डीओटी) की प्रमुख नागरिक-केंद्रित पहल संचार साथी ने जुलाई 2026 में रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 77,692 खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट बरामद करने में मदद की है। संचार मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि यह पहली बार है जब इस मंच के जरिए एक ही महीने में बरामद किए गए मोबाइल फोनों की संख्या 75,000 के आंकड़े को पार कर गई है।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह संचार साथी मंच के प्रति बढ़ते जनविश्वास और दूरसंचार विभाग, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं तथा विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस के बीच मजबूत समन्वय का परिणाम है।
मंत्रालय के बयान के अनुसार, दूरसंचार विभाग हितधारकों से लगातार फीडबैक लेकर इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर काम कर रहा है, ताकि खोए या चोरी हुए मोबाइल उपकरणों की बरामदगी और बढ़ाई जा सके।
इस सफलता में डीओटी की डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट और उसके क्षेत्रीय कार्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन इकाइयों ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर मोबाइल उपकरणों का पता लगाने और उन्हें उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाने का काम किया। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच मासिक मोबाइल बरामदगी में 201 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सिस्टम को अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए कई नए सुधार भी किए गए हैं। अब नागरिकों को मोबाइल ट्रेसिंग रिपोर्ट के साथ संबंधित पुलिस स्टेशन की जानकारी एसएमएस, ईमेल और पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाती है।
इसके अलावा, चोरी या खोए हुए मोबाइल में किसी नए सिम कार्ड के उपयोग की जानकारी भी पुलिस को उपलब्ध कराई जाती है, जिससे डिवाइस को ट्रैक करने और बरामद करने की संभावना बढ़ जाती है। कई मामलों में वैकल्पिक मोबाइल नंबरों की जानकारी भी जांच एजेंसियों के साथ साझा की जाती है।
मंत्रालय ने बताया कि मोबाइल बरामद होने के बाद उपयोगकर्ताओं को एसएमएस के माध्यम से यह सलाह भी दी जाती है कि वे डिवाइस का फैक्ट्री रीसेट कर लें, ताकि किसी संभावित मैलवेयर या अनधिकृत सॉफ्टवेयर से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
संचार साथी पोर्टल पर कोई भी नागरिक अपने खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन की जानकारी सरल प्रक्रिया के माध्यम से दर्ज करा सकता है। यह सुविधा वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप दोनों पर उपलब्ध है। शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित मोबाइल को भारतीय दूरसंचार नेटवर्क पर ब्लॉक कर दिया जाता है, जिससे उसका दुरुपयोग रोका जा सके।
यदि कोई व्यक्ति उस ब्लॉक किए गए मोबाइल का उपयोग करने का प्रयास करता है, तो नेटवर्क द्वारा इसकी पहचान कर ली जाती है। इसके बाद संबंधित नागरिक और पुलिस स्टेशन को अलर्ट भेजा जाता है, जिससे मोबाइल की बरामदगी और उसे वास्तविक मालिक को लौटाने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation








