UP Sahkari Samiti Computer Operator Online Form 2026
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Abhishek Banerjee के PA Sumit Roy की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, 31 अगस्त तय
उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय की उस अपील पर सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की है, जिसमें उन्होंने सालबोनी में जमीन हड़पने के मामले में उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार करने संबंधी कलकत्ता उच्च न्यायालय के छह अगस्त के आदेश को चुनौती दी है। उच्चतम न्यायालय ने रॉय की गिरफ्तारी पर छह अगस्त को रोक लगा दी थी। पश्चिम बंगाल पुलिस ने कुछ कथित आपत्तिजनक सामग्री सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत को सौंपी है।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ में सहयोग नहीं करने के कारण वह रॉय से हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है। राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 19 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ द्वारा गिरफ्तारी से संरक्षण दिए जाने का विरोध किया था। विधि अधिकारी ने कहा था कि सालबोनी जमीन हड़पने के मामले में जारी जांच में रॉय सहयोग नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि पुलिस को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ करने की जरूरत है। उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, पीठ सोमवार को रॉय की याचिका पर सुनवाई करेगी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त को सरकारी जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।
सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से आग्रह किया था कि रॉय को गिरफ्तारी से मिली सुरक्षा वापस ले ली जाए क्योंकि वह पुलिस के साथ कथित तौर पर सहयोग नहीं कर रहे हैं और सवालों से बच रहे हैं। रॉय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा था कि उनके मुवक्किल अदालत के निर्देश के अनुसार पुलिस के समक्ष पेश हो रहे हैं और संविधान उन्हें कुछ न कहने का अधिकार देता है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा था, ‘‘संविधान (जांच एजेंसी द्वारा) गिरफ्तारी के अधिकार को भी सुरक्षित करता है।’’ सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को पुलिस द्वारा अब तक इकट्ठा की गई सामग्री भी सीलबंद लिफाफे में सौंपी थी।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि पुलिस की सीलबंद लिफाफे में मिली रिपोर्ट देखने के बाद ही इस मामले की सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी अपने छह अगस्त के आदेश की अवधि बढ़ा दी थी। मामला धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।
पीठ ने रॉय को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हुए उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया था। पीठ ने आदेश में कहा था, ‘‘उनके साथ कोई वकील या कोई अन्य व्यक्ति नहीं होना चाहिए। वह सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक किसी भी जांच के लिए उपलब्ध रहेंगे जिसमें उन्हें समय समय पर विराम भी मिलेगा।
हालांकि, उनकी गिरफ्तारी पर रोक बनी रहेगी।’’ कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ ने इस मामले में उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। रॉय के वकील ने दलील दी थी कि प्राथमिकी में उनका नाम नहीं था और जांच के दौरान ही उनकी कथित संलिप्तता सामने आई थी।
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