भारतीय टीम किसके साथ खेलेगी अपनी अगली टेस्ट सीरीज? नोट कर लीजिए तारीख और समय
IND vs NZ: भारतीय टीम ने हाल ही में 2 टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए श्रीलंका का दौरा किया था. इस सीरीज को टीम इंडिया ने 1-0 से अपने नाम किया. गॉल में खेले गए पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने जीत दर्ज की, जबकि कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए दूसरे टेस्ट में लगातार चौथे दिन दबदबे के बाद भी टीम इंडिया नहीं जीत सकी. श्रीलंका ने कोलंबो टेस्ट को ड्रॉ करा लिया. अब श्रीलंका टेस्ट सीरीज के बाद, टीम इंडिया 2 महीने बाद अपनी अगली टेस्ट सीरीज खेलने उतरेगी. शुभमन गिल की कप्तानी में भारतीय टीम नवंबर में न्यूजीलैंड का दौरा करेगी, जहां 2 टेस्ट मैचों की सीरीज के अलावा 5-5 टी20 और वनडे मैचों की सीरीज खेली जाएगी.
न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना अगला टेस्ट सीरीज खेलेगी टीम इंडिया
भारतीय टीम के न्यूजीलैंड दौरे की तैयारियों पर चर्चा शुरू हो गई है. नवंबर-दिसंबर 2026 में होने वाले इस दौरे पर दोनों टीमों के बीच 2 टेस्ट मैचों की रोमांचक सीरीज खेली जाएगी. यह सीरीज वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के लिहाज से टीम इंडिया के लिए करो या मरो जैसी होने वाली है. टेस्ट सीरीज की शुरुआत से पहले, 22 अक्टूबर से दोनों देशों के बीच सीमित ओवरों की सीरीज खेली जाएगी. इस दौरान 5 टी20 इंटरनेशनल और 5 वनडे मैचों की लंबी सीरीज खेली जाएगी. वनडे सीरीज में रोहित शर्मा और विराट कोहली भी खेलते नजर आएंगे.
ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी करेगी टीम इंडिया
न्यूजीलैंड दौरे के तुरंत बाद भारतीय टीम का शेड्यूल बेहद व्यस्त रहने वाला है. न्यूजीलैंड से लौटने के बाद, जनवरी 2027 से भारत अपने घरेलू मैदानों पर ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी करेगा. बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में दोनों टीमों के बीच 5 मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी, जो इस WTC चक्र का भारत के लिए आखिरी और सबसे बड़ा इम्तिहान होगी.
भारत बनाम न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज का शेड्यूल
पहला टेस्ट: 19 - 23 नवंबर, 2026, बेसिन रिजर्व, वेलिंगटन - सुबह 03:30 बजे से
दूसरा टेस्ट: 27 नवंबर - 1 दिसंबर, 2026, हेगले ओवल, क्राइस्टचर्च - सुबह 03:30 बजे से
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Jharkhand News: सरकारी अस्पतालों का बदलेगा चेहरा, मेडिकल कॉलेजों में शुरू होगी रोबोटिक सर्जरी
Jhakhand News: राज्य के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इलाज की व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब मेडिकल कॉलेजों में जटिल ऑपरेशनों के लिए अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की जाएगी. इसके साथ ही हर जिले में 50 बेड की क्षमता वाले मैटरनिटी एंड चाइल्ड हेल्थ यानी एमसीएच अस्पताल स्थापित किए जाएंगे. स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने वर्चुअल समीक्षा बैठक में सिविल सर्जनों, मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों और अधीक्षकों को यह निर्देश दिए. बैठक में अस्पतालों के ढांचे को मजबूत करने और मरीजों को सभी जरूरी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मुहैया कराने पर विस्तार से चर्चा हुई.
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का होगा विस्तार
बैठक में जच्चा और बच्चा की सेहत को प्राथमिकता देते हुए नए मैटरनिटी एंड चाइल्ड हेल्थ अस्पतालों की रूपरेखा तय की गई. प्रस्तावित सभी 50 बेड वाले अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण लगाए जाएंगे ताकि प्रसव और नवजात शिशुओं की देखभाल में कोई कमी न रहे. इन अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती अनिवार्य रूप से की जाएगी. प्राथमिक योजना के तहत हर एक एमसीएच अस्पताल में कम से कम 10 विशेषज्ञ डॉक्टरों की व्यवस्था करने पर सहमति बनी है. इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से आने वाली गर्भवती महिलाओं को बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और मातृ मृत्यु दर में भी प्रभावी गिरावट आएगी.
सदर अस्पताल बनेंगे मल्टी स्पेशियलिटी सेंटर
राज्य के सभी सदर अस्पतालों को अब केवल प्राथमिक उपचार तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इन्हें पूरी तरह मल्टी स्पेशियलिटी अस्पतालों के रूप में विकसित किया जाएगा. विभाग ने इसके लिए आवश्यक आधुनिक मशीनों, मानव संसाधन और अन्य आधारभूत संरचनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया है. बैठक में सदर अस्पतालों में फेको विधि से मोतियाबिंद के ऑपरेशन की प्रगति की भी समीक्षा की गई. अधिकांश जिलों में यह आधुनिक सुविधा पहले से चालू पाई गई. जिन जिलों में फेको मशीनें तो हैं लेकिन प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं हैं, वहां के डॉक्टरों को तत्काल रिम्स रांची में विशेष प्रशिक्षण दिलाने का आदेश दिया गया है.
मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी और शिक्षकों की बहाली
राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा और इलाज के स्तर को ऊपर उठाने के लिए रोबोटिक सर्जरी को अनिवार्य किया जा रहा है. अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इस तकनीक के लिए जरूरी सभी मशीनें और उपकरण विभाग बहुत जल्द उपलब्ध कराएगा. इससे जटिल सर्जिकल प्रक्रियाएं बेहद सटीक और कम जोखिम वाली हो जाएंगी. मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक नियमित नियुक्तियां पूरी नहीं होतीं, तब तक संविदा के आधार पर योग्य शिक्षकों की बहाली कर पढ़ाई और इलाज को सुचारु रखा जाए.
अस्पतालों के प्रबंधन के लिए 125 नए मैनेजर
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और प्रशासनिक कामकाज को सुचारु बनाने के लिए 125 नए हॉस्पिटल मैनेजर तैनात किए जाएंगे. योजना के मुताबिक प्रत्येक जिले को दो समर्पित हॉस्पिटल मैनेजर दिए जाएंगे. इसके अलावा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड किया जाएगा और वहां भी हॉस्पिटल मैनेजर की तैनाती होगी. अनुमंडल अस्पतालों में भी प्रबंधन को मजबूत करने के लिए यह पद सृजित किए गए हैं. इससे डॉक्टरों को प्रशासनिक उलझनों से मुक्ति मिलेगी और वे केवल मरीजों के इलाज पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे.
विशेषज्ञ डॉक्टरों की संविदा पर होगी तत्काल नियुक्ति
सदर और अनुमंडल अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए अनुबंध आधारित बहाली प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया गया है. कैबिनेट से अनुबंध नियमावली को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. ऐसे में सिविल सर्जन अपने स्तर पर आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति शीघ्र पूरी करेंगे. इसके साथ ही मौसमी बीमारियों और स्वाइन फ्लू के खतरे को देखते हुए सभी अस्पतालों में दवाओं, आइसोलेशन वार्ड और जरूरी जांच किट का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने को कहा गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करने का सख्त निर्देश जारी किया गया है.
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