Jual Oram बोले: Rourkela मामले में गिरफ्तार सहयोगी पर कानूनी कार्रवाई से आपत्ति नहीं
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने शुक्रवार को कहा कि ओडिशा के राउरकेला में संगठित अपराध के एक मामले में गिरफ्तार उनके सहयोगी राकेश पासवान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। पासवान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सक्रिय कार्यकर्ता और राउरकेला नगर निगम (आरएमसी) में ओराम के प्रतिनिधि हैं। उन्हें इस आरोप में गिरफ्तार किया गया है कि उन्होंने इस इस्पात नगरी में स्थित सरकारी अतिथि गृह में अपराधियों को कथित तौर पर पनाह दी थी।
पुलिस ने 15 अगस्त को सरकारी अतिथि गृह के एक कमरे से आग्नेयास्त्र बरामद किए थे और दो कथित बदमाशों को गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच में यह सामने आने के बाद कि जिस सर्किट हाउस के कमरे से आग्नेयास्त्र बरामद किए गए और दोनों कथित बदमाशों को गिरफ्तार किया गया, वह पासवान के नाम पर बुक था, भाजपा ने उसे निलंबित कर दिया था। हालांकि, पासवान ने आरोपों से इनकार किया है और मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज तथा सर्किट हाउस की पंजी सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध करायी जाए।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 35 वर्षीय पासवान 15 अगस्त से फरार था। उन्होंने बताया कि उसे बृहस्पतिवार को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और बिहार विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की मदद से बिहार के बेगूसराय में गिरफ्तार किया गया और राउरकेला लाया गया। पासवान के कथित समर्थन की खबरों के बीच ओराम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपना रुख स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा, पासवान मेरे सक्रिय कार्यकर्ता और आरएमसी में मेरे प्रतिनिधि हैं। यदि सर्किट हाउस की घटना के संबंध में उनके खिलाफ कोई आरोप है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। यदि वह दोषी पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार उन्हें सजा दी जानी चाहिए।
मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है। कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि उनके नाम का इस्तेमाल कर सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कुछ जानकारी हासिल करके जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि यह जानकारी गलत या भ्रामक है। ओराम ने कहा, यदि कोई व्यक्ति या संगठन जानबूझकर मेरे खिलाफ गलत सूचना फैला रहा है तो मैं कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करूंगा। राजनीति में विरोध भी होगा और आलोचना भी।
लेकिन झूठ, उत्पीड़न और साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस के अनुसार, बिहार में पकड़े जाने से पहले पासवान राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और झारखंड गया था। पासवान पर राउरकेला के सरकारी सर्किट हाउस में आग्नेयास्त्रों और गोला-बारूद के साथ अपराधियों को पनाह देने की साजिश का कथित तौर पर मुख्य सूत्रधार होने का आरोप है।
घटना के बाद से पासवान फरार था और भाजपा ने उसे निलंबित कर दिया था।
Jio Platforms IPO को SEBI से मिली मंजूरी, 37700 करोड़ रुपये जुटाएगी कंपनी
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लि. को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिल गई है। कंपनी इस आईपीओ के जरिए करीब चार अरब डॉलर (लगभग 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने की उम्मीद कर रही है। इस लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम हो सकता है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम के लिए जून में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। सेबी के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स को 28 अगस्त को सेबी की अंतिम टिप्पणियां मिल गईं। आईपीओ प्रक्रिया में सेबी की टिप्पणियां एक महत्वपूर्ण चरण होती हैं।
इसके बाद कंपनी नियामकीय प्रावधानों का पालन करते हुए सार्वजनिक निर्गम लाने के लिए आगे की तैयारियां कर सकती है। जियो प्लेटफॉर्म्स की विवरण पुस्तिका (डीआरएचपी) के अनुसार, कंपनी 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी करेगी। निर्गम जारी होने के बाद यह कंपनी के कुल इक्विटी शेयर का करीब 2.9 प्रतिशत होगा।
सूत्रों ने कहा कि कंपनी करीब 137 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर आईपीओ के जरिए लगभग 37,700 करोड़ रुपये जुटा सकती है, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का प्रस्तावित आईपीओ लगभग 30,000 करोड़ रुपये का रहने का अनुमान है। आईपीओ से मिली आय का उपयोग मुख्य रूप से सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के अलावा, जियो प्लेटफॉर्म्स की महत्वपूर्ण अनुषंगी कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लि. (आरजेआईएल) के कुछ बकाया कर्जों के पूर्ण या आंशिक भुगतान के लिए करने का प्रस्ताव है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के बड़े पैमाने और प्रमुख निवेशक आधार को देखते हुए, प्रस्तावित आईपीओ पर निवेशकों और बाजार की कड़ी नजर रहेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स ने इससे पहले दुनिया के कुछ सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और निजी इक्विटी निवेशकों को आकर्षित किया है। वर्ष 2020 में, कंपनी ने फेसबुक के प्रवर्तक मेटा से 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 43,574 करोड़ रुपये जुटाए थे।
गूगल ने 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 33,737 करोड़ रुपये का निवेश किया था। कंपनी ने सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक, केकेआर, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, एल कैटरटन, पीआईएफ, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम वेंचर्स सहित वैश्विक वित्तीय और रणनीतिक निवेशकों के एक समूह से लगभग 15.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए करीब 74,745 करोड़ रुपये भी जुटाए थे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास इस समय जियो प्लेटफॉर्म्स की चुकता इक्विटी शेयर पूंजी का 66.43 प्रतिशत हिस्सा है।
मेटा और गूगल के पास कुल मिलाकर 17.71 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि शेष हिस्सेदारी अन्य निवेशकों के पास है।
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