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Tibet में भीषण बाढ़ के बाद China ने जारी किया Level-IV Alert, President Xi Jinping ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की एक बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मकसद तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई भीषण बाढ़ के बाद हालात का जायजा लेना था, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लापता हो गए। बैठक में बुधवार को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी में आई बाढ़ के बाद बचाव और राहत कार्यों पर चर्चा की गई। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक की शुरुआत में शी और अन्य नेताओं ने आपदा में मारे गए लोगों के सम्मान में एक मिनट का मौन रखा। अधिकारियों ने बताया कि आपातकालीन बचाव कार्य तेजी से और समन्वित तरीके से किए गए, जबकि प्रभावित लोगों को फिर से बसाने के प्रयास जारी हैं। 

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रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में यह तय किया गया कि खोज और बचाव की योजनाएं वैज्ञानिक तरीके से बनाई जाएं और लापता सभी चीनी और विदेशी नागरिकों को खोजने और बचाने की हर संभव कोशिश की जाए। नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है, जबकि तिब्बत में तीन लोगों की मौत हुई है। तिब्बत में 550 से ज़्यादा लोगों के लापता होने की खबर है और नेपाल में 100 चीनी नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। चीनी अधिकारियों ने बताया कि 555 पर्यटकों समेत करीब 1,000 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। अधिकारियों ने अभी तक पर्यटकों की राष्ट्रीयता के बारे में जानकारी नहीं दी है। खबर है कि बाढ़ के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय तीर्थयात्री भी फंस गए थे।

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चीन ने चेतावनी दी है कि दो नदियों के संगम पर बनी एक नई झील (बैरियर लेक) के टूटने और उससे निचले इलाकों में बाढ़ आने का बहुत ज़्यादा खतरा है, इसलिए उसने लेवल-IV का अलर्ट जारी किया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने गुरुवार रात तिब्बत में इस झील को लेकर आपातकालीन चेतावनी जारी की। यह झील छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के मिलन स्थल के पास बनी है। ये नदियाँ तिब्बत से निकलती हैं और भोटेकोशी नदी प्रणाली के हिस्से के तौर पर नेपाल में बहती हैं।

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Nepal Flood में 469 लोगों की मौत, 977 लापता लोगों के लिए राहत अभियान जारी

शिरीष बी प्रधान काठमांडू, 28 अगस्त मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 469 हो गई। आपदा के बाद तीसरे दिन भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी है जबकि हिमालयी देश में करीब 1,000 लोग अब भी लापता हैं। तिब्बत में हुए हिमस्खलन के बाद भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंदे का बहाव रुक गया जिससे तिब्बत-नेपाल सीमावर्ती जिलों के गांवों में भीषण बाढ़ से भारी तबाही मची।

बाढ़ के तेज बहाव में कई अहम पुल बह गए और करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं ठप हो गईं। नेपाल पुलिस ने एक बयान में कहा कि देश में मृतक संख्या बढ़कर 469 हो गई है तथा आठ जिलों से और शव बरामद किए गए हैं। निकटवर्ती तिब्बत में तीन लोगों की मौत हुई है।

पुलिस के अनुसार, चितवन से 178, नवलपरासी पूर्व से 110, गोरखा से 44, नुवाकोट से 37 और धादिंग जिले से 33 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह तनाहू से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए गए हैं। नेपाल के रसुवा और आस-पास के जिलों में बुधवार सुबह अचानक बाढ़ आने के बाद से कम से कम 977 लोग लापता हैं।

इनमें 86 सुरक्षाकर्मी, 517 विदेशी पर्यटक और 127 नेपाली यात्री शामिल हैं। अब तक प्रभावित इलाकों से 1,545 घायल व्यक्तियों और फंसे हुए लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें से 84 लोगों का काठमांडू के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज हो रहा है, जहां परिजन बड़ी बेसब्री से अपनों की तलाश कर रहे हैं।

बयान के अनुसार, इस त्रासदी के बाद तीसरे दिन भी तलाश और बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं। ‘द काठमांडू पोस्ट’ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक पहुंचने और बचे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि जमीन पर काम करने वाली टीम नदी के किनारे और नदी के बहाव की दिशा में बसे इलाकों में तलाशी अभियान जारी रखे हुए हैं।

इस बीच, नेपाल सरकार ने विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बाद बने हालात को देखते हुए 29 अगस्त से सभी परीक्षाएं स्थगित करने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सश्मित पोखरेल ने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थगित परीक्षाओं को सही समय पर दोबारा आयोजित करने की योजना बनाएं। मंत्रालय ने स्कूलों और कॉलेजों से यह भी कहा है कि वे छात्रों और शिक्षकों के लिए मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की व्यवस्था करें, छात्रों और अभिभावकों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें और जरूरी मदद एवं सहायता उपलब्ध कराने के लिए मिलकर काम करें।

इसी बीच, चीन ने बृहस्पतिवार देर रात चौथे स्तर का अलर्ट जारी किया और कहा कि नेपाल में छोछेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास पानी के बहाव में बाधा उत्पन्न होने से एक अस्थायी झील बन गई है। प्राकृतिक आपदाओं को लेकर चीन की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में चार स्तर होते हैं, जिनमें पहला स्तर सबसे ऊंचा और चौथा स्तर सबसे निचला स्तर होता है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों का मलबा तेजी से नीचे आ गया जिससे बुधवार को पानी, कीचड़ और मलबे का सैलाब मध्य नेपाल से होकर नीचे की ओर बह निकला।

इस आपदा ने कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई तथा कई मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। इसके कारण जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।

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