Jharkhand: झारखंड सरकार का रक्षाबंधन में बहनों को बड़ा तोहफा, 4.57 लाख महिलाओं के खाते में पहुंची 2,500 रुपए की सम्मान राशि
Jharkhand: रक्षाबंधन के त्योहार से पहले झारखंड के गिरिडीह जिले की महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत अगस्त 2026 की सम्मान राशि लाभुक महिलाओं के बैंक खातों में भेज दी गई है. जिले की कुल 4,57,400 महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला है. हेमंत सोरेन सरकार की ओर से प्रत्येक लाभुक महिला के खाते में 2,500 रुपये की राशि भेजी गई है. इस तरह गिरिडीह जिले की महिलाओं के खातों में कुल 1,14,35,00,000 रुपये यानी 114.35 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं. यह राशि आधार आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे बैंक खातों में भेजी गई है.
जमुआ की सबसे ज्यादा महिलाओं को मिला लाभ
मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत गिरिडीह जिले के अलग-अलग प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों की बड़ी संख्या में महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जा रही है. इस बार भी सभी संबंधित क्षेत्रों की पात्र महिलाओं के खातों में अगस्त महीने की राशि भेजी गई है. जिले में जमुआ प्रखंड की सबसे ज्यादा 53,776 महिलाओं को योजना का लाभ मिला है. इसके बाद धनवार में 47,819, डुमरी में 41,370 और गिरिडीह प्रखंड में 40,229 महिलाओं के बैंक खातों में सम्मान राशि भेजी गई है. इसी तरह बिरनी प्रखंड की 35,407, देवरी की 34,279, गांडेय की 32,503, बगोदर की 31,942 और बेंगाबाद की 28,805 महिलाओं को अगस्त महीने की राशि मिली है.
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— The Fourth Pillar (@fourthpillartfp) August 27, 2026
नगर क्षेत्रों की महिलाओं को भी मिली राशि
आपको बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ जिले के शहरी इलाकों की लाभुक महिलाओं को भी योजना का लाभ दिया गया है. गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र की 27,741 महिलाओं के खाते में सम्मान राशि भेजी गई है. वहीं सरिया क्षेत्र की 25,518, गांवा की 21,350 और पीरटांड़ की 18,473 महिलाओं को भी इसका लाभ मिला है. इसके अलावा तिसरी प्रखंड की 13,582 महिलाओं, सरिया नगर पंचायत की 2,457 और धनवार नगर पंचायत की 2,149 महिलाओं के बैंक खातों में भी 2,500 रुपये की राशि ट्रांसफर की गई है. इस तरह गिरिडीह जिले के सभी संबंधित प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों को मिलाकर कुल 4,57,400 महिलाओं को अगस्त 2026 की सम्मान राशि का लाभ मिला है. रक्षाबंधन से पहले खाते में राशि पहुंचने से लाभुक महिलाओं को आर्थिक मदद के साथ त्योहार की खुशियां भी मिली हैं.
रक्षाबंधन के पूर्व मंईयां सम्मान योजना की अगस्त माह की राशि लाभुक महिलाओं के खातों में हस्तांतरित
— DC Giridih (@GiridihDc) August 27, 2026
रक्षाबंधन के पूर्व मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत गिरिडीह जिले की 4,57,400 लाभुक महिलाओं के बैंक खातों में ₹2,500 की दर से कुल ₹114.35 करोड़ की सम्मान राशि DBT के माध्यम से… pic.twitter.com/nmX4ajNnQ7
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त्योहार की धूम के बीच मुंबई में दूध के दामों में बड़ा इजाफा, 1 सितंबर से 102 रुपये लीटर मिलेगा
मुंबईकरों को त्योहारों के मौसम से पहले महंगाई का एक और झटका लगने वाला है. शहर में दूध की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया गया है. नई दरें 1 सितंबर 2026 से लागू होंगी. इसके बाद मुंबई में दूध खरीदने के लिए लोगों को पहले के मुकाबले अधिक रकम खर्च करनी होगी. दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीज महंगी होने से इसका सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ने की संभावना है.
93 से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हुआ दूध
नई व्यवस्था के तहत दूध की कीमत में 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है. अभी जहां उपभोक्ताओं को दूध करीब 93 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, वहीं 1 सितंबर से इसके लिए 102 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे.
बताया गया है कि संशोधित दरें 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगी. यानी आने वाले त्योहारों, सर्दियों और फरवरी तक मुंबई के उपभोक्ताओं को दूध की खरीदारी नई कीमत पर करनी होगी.
त्योहारी सीजन में बढ़ेगा घरेलू बजट
दूध भारतीय परिवारों की दैनिक जरूरतों का अहम हिस्सा है. चाय, कॉफी और नाश्ते से लेकर मिठाइयों, दही, पनीर और दूसरी चीजों तक इसका इस्तेमाल होता है. ऐसे में दूध की कीमत बढ़ने का असर केवल एक उत्पाद तक सीमित नहीं रह सकता.
त्योहारी मौसम में दूध और उससे बने उत्पादों की मांग बढ़ने के कारण परिवारों के खर्च पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. खासकर उन घरों में जहां रोजाना कई लीटर दूध की खपत होती है, वहां मासिक बजट में अंतर साफ दिखाई देगा.
पशु चारा महंगा होना बड़ी वजह
दूध के दाम बढ़ाने के पीछे उत्पादकों ने बढ़ती उत्पादन लागत को प्रमुख कारण बताया है. डेयरी पशुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ उनके चारे और पशु आहार की लागत भी बढ़ी है.
उत्पादकों के अनुसार अनाज, तूर चुनी और चना चुनी जैसे पशु आहार से जुड़े उत्पादों की कीमतों में करीब 25 फीसदी तक की तेजी आई है. चारे की लागत बढ़ने से पशुपालकों का रोजाना खर्च बढ़ गया है और इसका असर दूध उत्पादन की कुल लागत पर पड़ा है.
उत्पादन लागत बढ़ने से उत्पादकों पर दबाव
डेयरी कारोबार में पशुओं के चारे के अलावा खली और अन्य जरूरी सामग्री की कीमत भी महत्वपूर्ण होती है. इन लागतों में लगातार वृद्धि होने से दूध उत्पादकों के सामने मुनाफे को बनाए रखना मुश्किल हो रहा था.
उत्पादकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पुरानी कीमत पर दूध बेचने से उनके लिए कारोबार चलाना कठिन हो रहा था. इसी वजह से कीमतों में संशोधन का फैसला लिया गया है.
आम लोगों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
दूध की नई कीमत लागू होने के बाद मुंबई के परिवारों को हर महीने पहले से अधिक खर्च करना होगा. उदाहरण के तौर पर यदि किसी परिवार की रोजाना दूध की खपत दो लीटर है, तो सिर्फ दूध पर ही पुराने भाव की तुलना में करीब 18 रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त खर्च आएगा.
महीने के हिसाब से यह रकम घरेलू बजट पर स्पष्ट असर डाल सकती है. इसके अलावा दूध से जुड़े अन्य उत्पादों की कीमतों पर भी आने वाले समय में दबाव देखने को मिल सकता है.
त्योहारों से पहले महंगाई की नई चुनौती
मुंबई में दूध के दामों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब परिवार त्योहारों की तैयारियों में जुटे हैं. मिठाइयों और डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच महंगा दूध रसोई के खर्च को और बढ़ा सकता है.
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