Rahul Gandhi और सोनिया पर Deepfake Video पोस्ट करने वाले दो X खातों पर केस
हैदराबाद की साइबर अपराध पुलिस ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को निशाना बनाकर अश्लील डीपफेक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में ‘एक्स’ के दो खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। तेलंगाना कांग्रेस पार्टी से विधानपरिषद के सदस्य (एलएलसी) वेंकट बालमूर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के इन अकाउंट पर ऐसे अश्लील ‘डीपफेक’ वीडियो पोस्ट किए गए हैं जिनमें कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को निशाना बनाया गया है।
आरोप है कि ये पोस्ट ‘भारत मैट्रिक्स’ (ऐट एक्स भारत) और ‘भास्कर शास्त्री’ (ऐट भाजोस 1एस97051) नाम के अकाउंट्स से साझा किए गए थे। शिकायतकर्ता ने कहा कि उन ‘एक्स’ हैंडल के जरिए प्रसारित किए गए वीडियो गलत जानकारी और भड़काऊ सामग्री को बढ़ावा दे रहे थे। उन्होंने डीपफेक वीडियो की सामग्री और उसके प्रसार की जांच की मांग की।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर, 27 अगस्त को साइबर अपराध थाने में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है। भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि महिला नेताओं और शहीदों के परिवार को निशाना बनाना राजनीति का सबसे निचला स्तर है। आईवाईसी के एक बयान में कहा गया है, ‘‘मौजूदा सांसदों, वरिष्ठ नेताओं और सोनिया गांधी को निशाना बनाने वाले इन अश्लील डीपफेक वीडियो को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब इन फर्जी खातों को कड़ा सबक सिखाने का समय आ गया है। हम इन सोशल मीडिया हैंडल के पीछे छिपे हर चेहरे को बेनकाब करेंगे। इन लोगों ने हद पार कर दी है।
अब उन्हें कानून का सामना करना होगा।
Donald Trump की नई सोशल मीडिया पोस्ट से Strait of Hormuz विवाद गरमाया, बना अमेरिका के नियंत्रण वाला इलाका?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से तनावपूर्ण माहौल में नई चर्चा छेड़ दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक नई तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर में होर्मुज जलडमरूमध्य को उन इलाकों और क्षेत्रों की सूची के साथ दिखाया गया है, जिनका किसी न किसी रूप में अमेरिका से संबंध है।
तस्वीर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के साथ प्यूर्टो रिको, नॉर्दर्न मारियाना आइलैंड्स, यूएस वर्जिन आइलैंड्स, गुआम, वेक आइलैंड, वॉशिंगटन डीसी, अमेरिकन समोआ, फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया और मार्शल आइलैंड्स को एक साथ रखा गया है। ट्रंप की यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब वह पिछले कुछ दिनों से लगातार होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कर रहे हैं। यानी मामला सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है। ट्रंप के हालिया बयानों को देखें तो ऐसा लगता है कि वह इस बेहद अहम समुद्री रास्ते को लेकर अमेरिका की भूमिका को पहले से कहीं ज्यादा खुलकर सामने रख रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप के बयान पिछले कुछ समय में लगातार सख्त हुए हैं। 12 अगस्त को उन्होंने Truth Social पर दावा किया था कि अमेरिका के पास होर्मुज पर “पूर्ण नियंत्रण” है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि वॉशिंगटन इस नियंत्रण को अपने पास बनाए रख सकता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को “स्टील की दीवार” तक बताया था। इसके दो दिन बाद उनका बयान और आगे बढ़ गया।
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न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका का एक क्षेत्र घोषित कर सकते हैं। बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इस विचार को पसंद करने की बात कही और इसकी वजह भी बताई—उनके मुताबिक, अमेरिकी नाकेबंदी के कारण इस जलमार्ग पर अमेरिका का नियंत्रण है। इसके बाद 18 अगस्त को ट्रंप ने एक और नक्शा पोस्ट किया। इस नक्शे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर साफ तौर पर “NEW U.S. Territory” लिखा हुआ था। यह पोस्ट उस वक्त सामने आई थी जब ईरान और ओमान इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को लेकर व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे थे। 21 अगस्त को ट्रंप ने फिर कहा कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को “अमेरिकी क्षेत्र” मानते हैं और दोहराया कि अमेरिका का इस मार्ग पर नियंत्रण है।
ट्रंप की नई पोस्ट में जिन जगहों को एक साथ दिखाया गया है, उनमें से सभी अमेरिका के क्षेत्र नहीं हैं। यही वजह है कि इस तस्वीर ने कानूनी और राजनीतिक तौर पर भी सवाल खड़े किए हैं। अमेरिकी आंतरिक विभाग के मुताबिक, अमेरिकन समोआ, गुआम, नॉर्दर्न मारियाना आइलैंड्स और यूएस वर्जिन आइलैंड्स अमेरिकी क्षेत्र हैं। प्यूर्टो रिको भी अमेरिका का क्षेत्र है, जबकि वेक आइलैंड को अमेरिकी इंसुलर एरिया के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। लेकिन माइक्रोनेशिया और मार्शल आइलैंड्स की स्थिति अलग है। ये स्वतंत्र और संप्रभु देश हैं, जो अमेरिका के साथ ‘फ्री एसोसिएशन’ की व्यवस्था में जुड़े हुए हैं। यानी उन्हें अमेरिकी क्षेत्र कहना सही नहीं होगा।
इसी अंतर की वजह से ट्रंप की तस्वीर को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इसे सिर्फ राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जाए या यह उनके उस विचार का संकेत है जिसमें वह होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण को स्थायी रूप देने की बात कर रहे हैं।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कोई सामान्य समुद्री रास्ता नहीं है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की समुद्री रास्ते से होने वाली कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही में मामूली रुकावट भी वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण इस रास्ते पर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। नतीजा यह हुआ कि सामान्य दिनों की तुलना में यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी कम हो गई है।
रॉयटर्स ने 25 अगस्त को बताया था कि ट्रंप के अनुसार अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद समुद्री बारूदी सुरंगों को हटा दिया गया है। साथ ही उन्होंने ईरान को नई माइंस बिछाने के खिलाफ चेतावनी भी दी। ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिकी स्पेस फोर्स जलमार्ग पर नजर रख रही है।
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ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला हुआ है। लेकिन जमीनी तस्वीर उतनी सामान्य नहीं दिख रही। रॉयटर्स की शुक्रवार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रास्ते पर शिपिंग गतिविधियां सामान्य स्तर की सिर्फ करीब 5 से 15 फीसदी तक रह गई हैं। ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ अभी भी ऐसी व्यवस्था बनाने में जुटे हैं जिससे समुद्री यातायात को फिर से सामान्य स्थिति में लाया जा सके। यानी एक तरफ अमेरिका की ओर से जलमार्ग पर नियंत्रण और उसके खुले होने की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ वास्तविक समुद्री आवाजाही अभी भी बेहद सीमित है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा सामान्य रूप से खोलना अब अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल होता दिखाई दे रहा है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष लंबा खिंचने के साथ इस जलमार्ग को फिर से खोलना प्रशासन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि जब युद्ध शुरू हुआ था, तब होर्मुज को खोलना ट्रंप के शुरुआती घोषित उद्देश्यों में शामिल नहीं था। लेकिन हालात बदलने के साथ इस जलमार्ग का मुद्दा अमेरिकी नीति और ट्रंप के बयानों के केंद्र में आ गया।
ट्रंप की ताजा तस्वीर इसी बदलते रुख की अगली कड़ी मानी जा रही है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि उनका “अमेरिकी क्षेत्र” वाला विचार वास्तविक प्रशासनिक या कानूनी कदम में बदलेगा या यह सिर्फ दबाव बनाने और राजनीतिक संदेश देने की रणनीति है। लेकिन इतना जरूर है कि होर्मुज को लेकर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव अब सिर्फ समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है—यह सवाल अब क्षेत्रीय नियंत्रण और रणनीतिक ताकत की बहस से भी जुड़ता जा रहा है।
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