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ट्रम्प ने लेक ओंटारियो का नाम बदलकर लेक अमेरिका किया:इसके बीच अमेरिका-कनाडा का बॉर्डर; PM कार्नी बोले- जो नाम पहले था वही रहेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने के आदेश पर साइन किए। आदेश के मुताबिक, 30 दिनों में यह प्रक्रिया पूरी होगी और इसके बाद अमेरिका के सरकारी नक्शों व रिकॉर्ड में नया नाम इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रम्प ने इस फैसले की तुलना मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘अमेरिका की खाड़ी’ करने से की। उन्होंने मजाक में कहा कि अब अमेरिका के पास एक खाड़ी और एक झील है, शायद आगे अटलांटिक या प्रशांत महासागर का नाम बदलने के बारे में भी सोचना पड़े। वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने लेक ओंटारियो का नाम बदलने के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- हम जानते हैं अमेरिका नाम बदल रहा है, लेकिन कनाडाई भी जानते हैं कि हकीकत में इसका नाम लेक ओंटारियो ही है। पहले भी, अब भी और हमेशा। कनाडा इस झील को लेक ओंटारियो ही बुलाएगा। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा के बीच स्थित पांच बड़ी झीलों में से एक है। इसके एक तरफ न्यूयॉर्क और दूसरी तरफ कनाडा का ओंटारियो प्रांत है। दोनों देशों की सीमा भी इसी झील से होकर गुजरती है। ट्रम्प ने कहा था- नाम बदलने पर विचार कर रहा ट्रम्प ने 25 अगस्त को पहली बार लेक ओंटारियो का नाम बदलने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिका का कनाडा के साथ ज्यादा कारोबार होने की उम्मीद नहीं है, इसलिए झील का नाम बदलने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके दो दिन बाद उन्होंने इस फैसले को आधिकारिक बनाने के लिए आदेश पर साइन कर दिए। ट्रम्प ने अपने आदेश में कहा कि लेक ओंटारियो अमेरिका की अर्थव्यवस्था और विरासत का अहम हिस्सा है। यह व्यापार, जहाजरानी, रक्षा, कृषि और ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ग्रेट लेक्स के संरक्षण पर अमेरिका ने पिछले 10 साल में करीब 4 अरब डॉलर यानी 38 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार को लेकर तनाव नाम बदलने का फैसला अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच आया है। हाल ही में अमेरिका ने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर यानी लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए के सामान पर 50% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी सामान पर उतना ही टैरिफ लगाने का ऐलान किया। ट्रम्प ने कहा कि व्यापार के मामले में कनाडा से निपटना सबसे मुश्किल है। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा अमेरिका के साथ ठीक व्यवहार नहीं करता और वह किसी भी हाल में यह स्वीकार नहीं कर सकते। लेक ओंटारियो के नाम पर पड़ा ओंटारियो प्रांत का नाम लेक ओंटारियो का नाम यूरोपीय लोगों के अमेरिका पहुंचने से भी पहले से चला आ रहा है। यह नाम ह्यूरॉन समुदाय की भाषा के एक शब्द से निकला है, जिसका अर्थ ‘चमकते पानी की झील’ बताया जाता है। बाद में कनाडा के ओंटारियो प्रांत का नाम भी इसी झील के नाम पर रखा गया। हालांकि, नाम बदलने को लेकर एक अहम बात है। दुनिया की अंतरराष्ट्रीय झीलों और जलक्षेत्रों के नाम तय करने वाली कोई एक वैश्विक संस्था नहीं है। अमेरिका अपने सरकारी दस्तावेजों और नक्शों में इसे ‘लेक अमेरिका’ कह सकता है, लेकिन कनाडा अपनी तरफ से पुराने नाम ‘लेक ओंटारियो’ का इस्तेमाल जारी रख सकता है। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? अमेरिकी सरकार अपने आधिकारिक दस्तावेजों, सरकारी नक्शों और रिकॉर्ड में किसी जगह के लिए नया नाम इस्तेमाल करने का फैसला कर सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे देश भी उस नाम को स्वीकार करने के लिए बाध्य होंगे। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा दोनों से जुड़ी है। इसलिए अगर अमेरिकी सरकार अपने दस्तावेजों में इसे ‘लेक अमेरिका’ कहना शुरू भी कर दे, तो कनाडा अपने सरकारी रिकॉर्ड में ‘लेक ओंटारियो’ नाम जारी रख सकता है। दूसरे देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी अमेरिकी नाम को अपने आप अपनाने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यानी नाम बदलने से झील का मालिकाना हक नहीं बदल जाएगा। ‘लेक अमेरिका’ नाम इस्तेमाल करने से झील का कनाडाई हिस्सा अमेरिकी क्षेत्र नहीं बन जाएगा। ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदल चुके हैं ट्रम्प ट्रम्प के लिए किसी जगह का नाम बदलना नया नहीं है। जनवरी 2025 में उन्होंने ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल के लिए ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। इसके बाद अमेरिकी एजेंसियों ने अपने रिकॉर्ड और नक्शों में नया नाम इस्तेमाल करना शुरू किया, लेकिन मेक्सिको ने इसे स्वीकार नहीं किया। तब मेक्सिको ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का हवाला देते हुए कहा था कि अमेरिका अपने अधिकार क्षेत्र के आधार पर पूरे गल्फ का नाम अकेले नहीं बदल सकता। हालांकि, लेक ओंटारियो और गल्फ ऑफ मेक्सिको की कानूनी स्थिति अलग है। गल्फ समुद्री क्षेत्र है, जबकि लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा के बीच साझा झील है। अमेरिका-कनाडा के बीच विवाद की 5 बड़ी वजहें 1. टैरिफ की नई लड़ाई सबसे बड़ा विवाद टैरिफ को लेकर है। अमेरिका ने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया है। इसमें शराब, डेयरी, फर्नीचर, हॉकी उपकरण और कई दूसरे सामान शामिल हैं। बातचीत टूटने के बाद कनाडा ने भी डॉलर-फॉर-डॉलर जवाबी टैरिफ लगाने का फैसला किया है। 2. कनाडा को 51वां राज्य कहना ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका व्यापार के मामले में कनाडा को अरबों डॉलर का फायदा पहुंचाता है। यदि कनाडा अमेरिका का हिस्सा बन जाता है, तो यह व्यापारिक असमानता और टैरिफ से जुड़े विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगे। 3. ट्रूडो को कनाडा का गवर्नर कहना ट्रम्प ने कई बार कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को तंजिया लहजे में ‘गवर्नर’ कहकर संबोधित किया था। कनाडाई नेताओं और जनता ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान माना। 4. सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और फेंटानिल तस्करी अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ती सीमा सुरक्षा चिंताएं भी बड़े विवाद का कारण बनी हैं। ट्रम्प प्रशासन का आरोप रहा है कि कनाडा की उत्तरी सीमा से अवैध प्रवासियों की घुसपैठ और खतरनाक नशीली दवाओं (विशेषकर फेंटानिल) की तस्करी अमेरिका में बढ़ रही है। अमेरिका ने कनाडा से अपनी सीमाओं पर सख्त निगरानी और सख्त आव्रजन नीतियां लागू करने की मांग की है। 5. डेयरी और कृषि विवाद अमेरिका लंबे समय से कनाडा की ‘सप्लाई मैनेजमेंट’ सिस्टम का विरोध करता रहा है, जो कनाडाई डेयरी और पोल्ट्री (मुर्गी पालन) मार्केट को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाती है। अमेरिका चाहता है कि कनाडा अपने डेयरी बाजार को अमेरिकी किसानों के लिए पूरी तरह खोले। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें… कनाडाई PM बोले- अमेरिका और हमारे बीच जंग के हालात: ट्रम्प के टैरिफ को हमला बताया; US पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के साथ बढ़ते ट्रेड विवाद को लेकर कहा है कि “हम जंग में हैं, क्योंकि हम पर हमला हुआ है।” उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ को कनाडा पर हमला बताया। पूरी खबर पढ़ें…

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रेडियो खराबी से ट्रम्प का हेलिकॉप्टर विमान के करीब पहुंचा:एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को एक हफ्ते पहले से दिक्कत की जानकारी थी; फिर भी चूक हुई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हेलिकॉप्टर मरीन वन और एक यात्री विमान के करीब पहुंचने की वजह सामने आई है। जांच के मुताबिक, रेडियो संपर्क में आई खराबी के कारण एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को हेलिकॉप्टर की उड़ान से पहले मिलने वाली जरूरी चेतावनी नहीं मिल पाई। यह घटना 4 अगस्त को हुई थी। ट्रम्प को लेकर मरीन वन व्हाइट हाउस के पास से उड़ान भर रहा था, तभी रीगन नेशनल एयरपोर्ट से एक यात्री विमान को भी टेकऑफ की मंजूरी मिल गई। दोनों विमान कुछ देर के लिए काफी करीब आ गए, लेकिन पायलटों की सतर्कता से टकराव टल गया। जांच में यह भी सामने आया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को इस रेडियो खराबी की जानकारी एक हफ्ते पहले ही हो गई थी। इसके बावजूद घटना वाले दिन राष्ट्रपति की सुरक्षा में चूक हुई। व्हाइट हाउस में निर्माण के कारण रेडियो में खराबी आई जांच में पता चला कि व्हाइट हाउस में चल रहे निर्माण के कारण मरीन वन के उड़ान भरने की जगह बदल दी गई थी। हेलिकॉप्टर अब द एलिप्स से उड़ान भर रहा था। नई जगह और रीगन एयरपोर्ट के पास लगे रेडियो रिसीवर के बीच सीधा संपर्क ठीक नहीं था। इसी वजह से हेलिकॉप्टर की रेडियो कॉल कंट्रोल टावर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही थी। एक हफ्ते पहले मीटिंग में दिक्कत पर चर्चा हुई थी घटना से करीब एक हफ्ते पहले 30 जुलाई को मरीन वन के पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की बैठक हुई थी। इसमें तीन मिनट पहले दी जाने वाली उड़ान चेतावनी के कंट्रोल टावर तक नहीं पहुंचने की बात सामने आई थी। तब तय किया गया था कि रेडियो संपर्क न होने पर किसी दूसरे विमान या व्यक्ति के जरिए यह सूचना दी जाएगी। 4 अगस्त को पायलटों ने ज्वाइंट बेस एनाकोस्टिया-बोलिंग के जरिए भी कंट्रोल टावर तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि, यह तरीका भी काम नहीं आया। कंट्रोलर्स को मरीन वन के उड़ान भरने की जानकारी नहीं मिली और इसी दौरान यात्री विमान को टेकऑफ की मंजूरी दे दी गई। ट्रम्प का हेलिकॉप्टर और विमान सिर्फ 1.3 किमी दूर थे NTSB के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, दोनों विमानों के बीच सबसे कम दूरी करीब 1.3 किलोमीटर थी। उनकी ऊंचाई में भी महज 250 फीट का अंतर रह गया था। यात्री विमान के टक्कर से बचाने वाले सिस्टम ने चेतावनी दी थी। मरीन वन के पायलटों ने भी विमान को देख लिया और कुछ देर रुक गए, जिससे दोनों अलग हो गए। FAA के नियम के मुताबिक, ऐसे हालात में दो विमानों के बीच कम से कम 2.4 किलोमीटर की दूरी या ऊंचाई में 500 फीट का अंतर होना जरूरी है। अब रेडियो सिस्टम ठीक किया गया घटना के बाद FAA की तकनीकी टीम ने रेडियो सिस्टम की जांच की। रिसीवर को रिहायशी इलाके से हटाकर रीगन एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर के ऊपर लगा दिया गया। इसके बाद किए गए परीक्षणों में रेडियो संपर्क ठीक पाया गया। यह घटना पिछले साल के रीगन एयरपोर्ट हादसे के बाद और गंभीर मानी जा रही है। 29 जनवरी 2025 को एक यात्री विमान और अमेरिकी सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की टक्कर में 67 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एयरपोर्ट के आसपास हेलिकॉप्टर और विमानों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा नियम कड़े किए गए थे। --------------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो एयरफोर्स वन पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किये में ईरान के डर से प्लेन बदला था। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। पूरी खबर पढ़ें…

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Rishabh Pant के 50 Test के बाद Ravichandran Ashwin की दो टूक सलाह: अब टीम की जरूरत के हिसाब से खेलें

रिषभ पंत ने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 168 रन बनाकर दो अर्धशतक जरूर लगाए, लेकिन उनके प्रदर्शन को लेकर रविचंद्रन अश्विन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर का मानना है कि पंत को अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ मैच की स्थिति को समझने और टीम की जरूरत के मुताबिक फैसले लेने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अश्विन ने अपने कार्यक्रम ‘अश की बात’ में पंत की बल्लेबाजी पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों के आधार पर पंत के प्रदर्शन का आकलन करना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक, पंत जिस तरह के जोखिम लेते हैं, उसमें यह समझना जरूरी है कि कब आक्रमण करना है और कब विकेट बचाकर खेलना है।

पंत की आक्रामक शैली पिछले कुछ महीनों से चर्चा का विषय रही है। उनके प्रशंसक अक्सर उनकी इसी बेखौफ बल्लेबाजी को उनकी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं, क्योंकि वह मुश्किल परिस्थितियों में भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, अश्विन का कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में हर परिस्थिति में एक ही अंदाज से बल्लेबाजी करना टीम के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

उन्होंने पिछले साल गुवाहाटी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पंत के आउट होने का उदाहरण भी दिया। उस मुकाबले में शुभमन गिल की गैरमौजूदगी में पंत भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। उन्होंने मार्को यानसन की गेंद पर आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर के हाथों में चली गई।

अश्विन ने साफ किया कि उन्हें पंत के आक्रामक खेल से समस्या नहीं है। उनकी आपत्ति उन मौकों को लेकर है जब मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण स्थिति में हो और बल्लेबाज अनावश्यक जोखिम उठा ले। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सहवाग और एडम गिलक्रिस्ट जैसे बल्लेबाज भी आक्रामक क्रिकेट खेलते थे, लेकिन मैच की स्थिति को नजरअंदाज करके इस तरह के जोखिम नहीं लेते थे।

गौरतलब है कि पंत अब तक 50 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। अश्विन के अनुसार, इतने अनुभव के बाद उनसे ज्यादा जिम्मेदारी की उम्मीद की जानी चाहिए। उन्होंने पंत को किसी विशेष प्रतिभा के नाम पर अतिरिक्त छूट देने के विचार पर भी सवाल उठाया। अश्विन का कहना है कि यशस्वी जायसवाल जैसे युवा खिलाड़ियों में भी असाधारण क्षमता है, इसलिए सिर्फ विशेष प्रतिभा होने के आधार पर किसी खिलाड़ी को आलोचना से बचाना उचित नहीं है।

अश्विन ने सिडनी और ब्रिस्बेन में पंत की शानदार पारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंत ने वहां बेहतरीन पारियां खेलीं, लेकिन टेस्ट जीतने के लिए केवल एक खिलाड़ी का प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होता। वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा था। उनके मुताबिक, टेस्ट मैच को जीत तक पहुंचाने के लिए 11 खिलाड़ियों का योगदान चाहिए, जबकि एक गलत फैसला पूरे मैच को हाथ से निकाल सकता है।

बता दें कि पंत फिलहाल भारत की एकदिवसीय और टी20 टीम से बाहर हैं और मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में ही भारतीय टीम का हिस्सा हैं। अश्विन मानते हैं कि अगर पंत अपनी बल्लेबाजी में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव लाते हैं तो उनके लिए सीमित ओवरों की टीम में वापसी का रास्ता भी खुल सकता है।

अश्विन ने यहां तक कहा कि जिस दिन पंत को उनकी कमियों के बारे में साफ और ईमानदार प्रतिक्रिया मिलने लगेगी, वह तीनों प्रारूपों में दोबारा भारत के लिए खेलने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। उनके मुताबिक, पंत की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन अब उनके खेल में जिम्मेदारी और बेहतर निर्णय लेने की जरूरत है। यही बदलाव उन्हें एक शानदार टेस्ट बल्लेबाज से फिर से भारत के तीनों प्रारूपों के भरोसेमंद खिलाड़ी में बदल सकता है।
Fri, 28 Aug 2026 18:54:00 +0530

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