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बच्चों के Aadhaar Biometric Update के लिए UIDAI का बड़ा अपडेट, जानें कब तक रहेगी फ्री सर्विस और क्या है तरीका

दरअसल, हर किसी इंसान के कोर बायोमेट्रिक पैटर्न जैसे कि फिंगरप्रिंट्स और आइरिस स्ट्रक्चर का पैटर्न पूरी जिंदगी एक जैसा ही रहता है, लेकिन बच्चों का शरीर तेजी से बढ़ने के कारण इनका साइज बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, 5 साल से छोटे बच्चों के फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन रिकॉर्ड नहीं किए जाते हैं। 
इसी कारण से भारत सरकार बच्चों के बायोमेट्रिक को दो बार अपेडट कराना अनिवार्य है। पहली बार जब बच्चा 5 साल का हो जाए और दूसरी बार 15 साल की उम्र में। यदि आप आधार में बायोमेट्रिक्स अपडेट नहीं करते हैं, तो बाद में स्कूल एडमिशन, स्कॉलरशिप और एग्जाम रजिस्ट्रेशन में दिक्कत आ सकती है। सबसे अच्छी बात तो यह है कि पेरेंट्स फिलहाल अपने बच्चे की आधार बायोमेट्रिक जानकारी फ्री में अपडेट करवा सकते हैं।
इन अपडेट्स के लिए कौन एलिजिबल है, लास्ट डेट कब है और कौन-से डॉक्यूमेंट्स जरुरी है? यह सब आपको जानकारी इस लेख में दी जाएगी। 

Aadhaar बायोमेट्रिक फ्री अपडेट: लास्ट डेट
अब बच्चों के पेरेंट्स आधार पर फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक्स फ्री अपडेट करा सकते हैं। वैसे यह सुविधा 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रहने वाली है। इस बात का ध्यान रखें कि जब डेडलाइन खत्म हो जाएगी, तो इसके लिए आपको दोबारा तय फीस देने पड़ेगी। 

इन बातों का रखें ध्यान
अप्लाई करने से पहले इन बातों का ध्यान जरुर रखें-

 - इस अपडेट में फिंगरप्रिंट्स, आई स्कैन और एक नई फोटो शामिल हो सकती है।

 - वैसे 5 साल से छोटे बच्चों के लिए ये बिल्कुल जरुरी नहीं है, क्योंकि उनके फीचर्स अभी बदल रहे होते हैं।

 - बायोमेट्रिक का काम ऑनलाइन नहीं होता है, इसके लिए आपको आधार सेंटर जाने बेहद जरुरी है।

 - बच्चे का आधार नंबर और पेरेंट्स अपना आधार कार्ड अपने पास जरुर रखें। 

 - प्रूफ के तौर पर बर्थ सर्टिफिकेट या स्कूल आईडी कार्ड मांगा जा सकता है।

ऑनलाइन अपॉइंटमेंट कैसे बुक करें?
इन स्टेप्स के जरिए आप ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं-

 - आधार अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें।

 - अब अपना शहर और सबसे नजदीकी सेंटर सेलेक्ट करें।

 - फिर सर्विस के तौर पर 'Aadhaar Update' को चूज करें।

 - अपनी सुविधा के हिसाब से डेट और टाइमिंग सेलेक्ट करें।

 - बच्चे की सभी जरुरी डिटेल्स भरें और बुकिंग प्रोसेस पूरा करें। 

 - अब आप अपॉइंटमेंट स्लिप का प्रिंटआउट निकाल लें।

 इसके अलावा, चुने गए दिन अपने बच्चे और जरुरी डॉक्यूमेंट्स के साथ सेंटर पहुंच जाएं। वहां का स्टाफ फिंगरप्रिंट्स, आई स्कैन और फोटो सीधे सिस्टम में कैप्चर करेगा। असल में इस स्टेप को छोड़ा नहीं जा सकता है, क्योंकि बायोमेट्रिक्स के लिए बच्चे का फिजिकली मौजूद होना बेहद जरुरी है। जब पूरी प्रक्रिया हो जाएगी, तो आप एक रसीद दी जाएगी, जिसके नंबर से आप अपडेट स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं। वहीं, कुछ दिनों में आधार अपडेट हो जाता है। 

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भारत में AI और डीपफेक कंटेंट पर सरकार के नए सख्त नियम 20 फरवरी से होंगे लागू, अब 3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक पोस्ट, लेबलिंग हुई अनिवार्य

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक टेक्नोलॉजी के जरिए बनाए जा रहे भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए जारी की गई नई गाइडलाइंस के तहत अब नियमों को काफी सख्त कर दिया गया है। ये नए नियम 20 फरवरी से प्रभावी हो गए हैं, जिनका मकसद डिजिटल स्पेस में धोखाधड़ी, उत्पीड़न और गलत सूचना के प्रसार को रोकना है।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब डीपफेक और सिंथेटिक मीडिया का इस्तेमाल गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए तेजी से बढ़ रहा है। नए बदलावों का सीधा असर Facebook, X (पूर्व में Twitter), Instagram जैसे तमाम सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज पर पड़ेगा।

लेबलिंग और पहचान अब सबसे जरूरी

नए नियमों में सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव लेबलिंग को लेकर किया गया है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि AI द्वारा बनाए गए, एडिट किए गए या किसी भी तरह से बदले गए कंटेंट पर एक स्थायी और स्पष्ट रूप से दिखने वाला लेबल लगाना अनिवार्य होगा। यह लेबल ऐसा होना चाहिए जिसे हटाया या उसके साथ छेड़छाड़ न की जा सके।

इसके अलावा, प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट में एक यूनिक आइडेंटिफायर भी जोड़ना होगा। इस कदम का उद्देश्य सिंथेटिक या मैनिपुलेटेड कंटेंट के सोर्स का पता लगाना (ट्रेस करना) आसान बनाना है।

घटाई गई कंटेंट हटाने की समय-सीमा

आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है। पहले, सोशल मीडिया कंपनियों को किसी गैर-कानूनी या आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत मिलने पर उसे हटाने के लिए 36 घंटे का समय मिलता था।

लेकिन अब, कानून प्रवर्तन एजेंसी के आदेश या यूजर की शिकायत के बाद कुछ विशेष मामलों में इस समय-सीमा को घटाकर मात्र 3 घंटे कर दिया गया है। यह बदलाव प्लेटफॉर्म्स को ज्यादा जवाबदेह बनाएगा।

यूजर को भी देनी होगी जानकारी

अब जिम्मेदारी सिर्फ प्लेटफॉर्म्स की ही नहीं, बल्कि कंटेंट अपलोड करने वाले यूजर्स की भी होगी। नए नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर कंटेंट अपलोड करते समय यह घोषित करे कि उसकी सामग्री AI टूल्स की मदद से बनाई गई है या उसमें बदलाव किया गया है।

यही नहीं, प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स द्वारा की गई इस घोषणा को वेरिफाई करने के लिए भी जरूरी टूल्स तैनात करने होंगे। अगर AI से बने कंटेंट का इस्तेमाल किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि के लिए किया जाता है, तो उसे अन्य अवैध कंटेंट की तरह ही माना जाएगा और उस पर सख्त कार्रवाई होगी। इन नियमों को 10 फरवरी को अधिसूचित किया गया था।

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