Vastu Tips: आजमाएं ये छोटे-छोटे उपाय, घर में आएगी शांति-खुशहाली
Vastu Tips: वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विद्या है, जो ऊर्जा के संतुलन से घर और जीवन में सुख-शांति लाने में सहायक होती है। वास्तु के अनुसार घर के हर कोने की ऊर्जा हमारे जीवन को प्रभावित करती है। यदि हम वास्तु के अनुसार कुछ सरल उपाय अपनाएं, तो यह ना केवल सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, बल्कि जीवन को भी खुशहाल बनाता है। आइए जानते हैं, ऐसे ही सात छोटे-छोटे उपाय, जो आपके घर में शांति लाएंगे, जीवन को खुशहाल बना सकते हैं।
घर की नियमित सफाई:
वास्तु शास्त्र के अनुसार गंदगी और अव्यवस्था नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। घर को रोजाना साफ करें और किसी भी कमरे में अनुपयोगी सामान जमा ना होने दें। विशेष रूप से उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा खाली और स्वच्छ रखें। यह उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
हल्के रंगों का प्रयोग:
घर की दीवारों पर हल्के और सौम्य रंगों का प्रयोग करें, जैसे सफेद, क्रीम या हल्का नीला। ये रंग सकारात्मक ऊर्जा और सुकून का अनुभव कराते हैं। गहरे और भड़कीले रंग, खासकर काले या गहरे लाल रंग को दीवारों पर पेंट कराने से बचें। यह घर के माहौल को शांतिपूर्ण और खुशनुमा बनाता है।
पूजा-स्थल की दिशा:
घर का पूजा-स्थान उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूजा स्थल पर नियमित सफाई रखें और धूप-दीप जलाएं। इससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास होता है।
रसोईघर में आग-पानी का संतुलन:
रसोईघर में चूल्हा और पानी का स्थान अग्नि और जल तत्व का प्रतीक है। इन्हें एक-दूसरे से दूर रखें। चूल्हा दक्षिण-पूर्व दिशा में और पानी का स्थान उत्तर-पूर्व दिशा में रखें। इससे परिवार के स्वास्थ्य और धन में वृद्धि होती है।
घर में दर्पण का सही स्थान:
दर्पण को उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाना शुभ होता है। कभी भी टूटा या गंदा दर्पण ना रखें। गलत दिशा में रखा दर्पण नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। दर्पण का सही उपयोग, घर में सुख-शांति और उन्नति लाता है।
सेंधा नमक का उपयोग:
वास्तु के अनुसार, सेंधा नमक के कुछ टुकड़े घर के कोनों में रखना या पोछे के पानी में सेंधा नमक मिलाकर सफाई करना नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। यह उपाय घर के वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक बनाता है।
मोर पंख और बांसुरी:
मोर पंख और बांसुरी को घर के मुख्य स्थान पर रखें। यह वास्तु दोष को समाप्त करता है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है। खासतौर पर बांसुरी घर में शांति और सौभाग्य लाने में सहायक होती है।
यहां बताए गए छोटे-छोटे उपायों को अपनाकर आप घर के वास्तुदोष का निवारण कर सकती हैं। साथ ही इनसे घर में शांति और खुशहाली का संचार भी होगा।
वास्तु सलाह
अनीता जैन, वास्तुविद
Working Couple: पति-पत्नी दोनों हैं वर्किंग? जानें घर के खर्च किस प्रकार चलाने चाहिए
Working Couple: पति-पत्नी दोनों ही वर्किंग हों तो घर के खर्चों को लेकर दोनों के बीच एक स्पष्टता, पारदर्शिता बहुत जरूरी है। किसी एक पर आर्थिक भार नहीं होना चाहिए। नीतू और राजेश की शादी को दस साल हो चुके थे। नीतू एक शिक्षिका थी और अपनी पूरी कमाई घर की जरूरतों, उसको बनाने- संवारने में खर्च कर देती थी। राजेश एक निजी कंपनी में मैनेजर था, लेकिन अपनी तनख्वाह को हमेशा ‘भविष्य की बचत’ के नाम पर अलग रखता था। शुरुआत में नीतू को यह सामान्य लगा। उसे लगा कि परिवार के लिए वह जो कर रही है, वह अपना ही तो कर रही है, लेकिन धीरे-धीरे उसकी शिकायतें और तनाव बढ़ने लगा। राजेश उसे इस मामले में यह कहकर चुप करा देता, ‘ये तो तुम्हारी जिम्मेदारी है।’ लेकिन एक दिन, एक छोटी सी बहस ने बड़ा रूप ले लिया।
राजेश ने साफ कहा, ‘मैंने अपनी कमाई से जो बचत की है, वह सिर्फ मेरी है। तुम्हें अपने पैसे का हिसाब रखना चाहिए था।’ यह सुनकर नीतू को झटका लगा। नीतू को एहसास हुआ कि उसने जो भी किया, उसका कोई मूल्यांकन नहीं हुआ। राजेश के पास संपत्ति और बचत थी, लेकिन नीतू बिलकुल खाली हाथ थी। वह ठगी सी महसूस कर रही थी, अपने ही विश्वास और प्यार से। यह एक अकेले नीतू-राजेश भर की कहानी नहीं है। बहुत सारे काम-काजी दंपतियों की यह साझी कहानी है। इसके चलते तलाक तक हो जाते हैं।
साझा स्पष्टता जरूरी है:
जीवन स्तर और बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि पति-पत्नी दोनों ही नौकरी करें। लेकिन समस्याएं तब खड़ी होती हैं, जब दोनों में से कोई एक, चाहे वह पति हो या पत्नी, घर के साझे भविष्य के नाम पर अपनी कमाई को तो जमा कर रहा होता है और दूसरा अपनी सारी कमाई घर पर खर्च कर देता है। यह स्थिति भविष्य के लिए कई बार खतरनाक स्थितियां पैदा कर देती हैं, इसलिए जब पति-पत्नी दोनों ही काम-काजी हों तो घर के खर्चों को लेकर एक स्पष्टता जरूरी है। दांपत्य जीवन में वित्तीय निर्णय मिलकर लिए जाने चाहिए। पति-पत्नी के बीच नियमित रूप से पैसे की योजना और बचत पर चर्चा होनी चाहिए।
बनाए रखें आर्थिक स्वतंत्रता:
अपनी कमाई का एक हिस्सा हमेशा अपनी बचत के लिए अलग रखें। यह ना केवल आर्थिक सुरक्षा देता है, बल्कि आत्मनिर्भरता का भी एहसास कराता है।
कानूनी अधिकारों की जानकारी:
हर महिला को अपने वित्तीय और कानूनी अधिकार पता होने चाहिए। तलाक की स्थिति में महिलाओं को पति की संपत्ति में हिस्सेदारी का अधिकार है, जो कानून द्वारा संरक्षित है।
साझा जिम्मेदारी का करें आग्रह:
अगर कोई काम-काजी दंपति है तो परिवार चलाने का भार अकेले ना सिर्फ पति पर हो और ना ही अकेली महिला पर। पति-पत्नी दोनों को ही यह जिम्मेदारी समान रूप से निभानी चाहिए।
पेशेवर मार्गदर्शन लें:
यदि आप पैसे के प्रबंधन में अनिश्चित हैं तो किसी वित्तीय सलाहकार की मदद लें। महिलाओं को यह समझना चाहिए कि आर्थिक आत्मनिर्भरता केवल उनकी सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि आत्मसम्मान और पहचान के लिए भी जरूरी है।
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