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भारत ने हॉकी वर्ल्ड कप में रचा इतिहास, जर्मनी को 3-1 से हराया, 52 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा

भारतीय महिला हॉकी टीम ने गुरुवार को नीदरलैंड के एम्सटेलवीन में खेले गए महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के क्लासिफिकेशन मुकाबले में जर्मनी को 3-1 से हरा दिया। वहीं इस जीत के साथ भारत ने टूर्नामेंट में पांचवां स्थान हासिल किया। टीम के तीनों गोल मैच के आखिरी 17 मिनट में आए। भारत के लिए यह मुकाबला इसलिए खास रहा क्योंकि महिला हॉकी वर्ल्ड कप में इससे पहले टीम का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1974 में आया था। उस समय भारतीय टीम ने चौथा स्थान हासिल किया था।

वहीं इसके बाद लंबे समय तक भारत उस प्रदर्शन को दोहरा नहीं सका। अब जर्मनी के खिलाफ जीत के साथ टीम ने टूर्नामेंट में पांचवें स्थान पर रहते हुए अपना नया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया।

जर्मनी के खिलाफ भारत की शानदार जीत

मैच की शुरुआत दोनों टीमों के लिए काफी संभली हुई रही। पहले क्वार्टर के 15 मिनट में भारत और जर्मनी में से कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। जर्मनी को इस दौरान पेनल्टी कॉर्नर के मौके मिले, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उन्हें गोल में बदलने नहीं दिया। दूसरे क्वार्टर में भी दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली और स्कोर 0-0 ही रहा। इसी दौरान जर्मनी की सोन्या जिमरमैन को ग्रीन कार्ड भी दिखाया गया।

भारत ने 3-1 की बढ़त बनाए रखी

वहीं तीसरे क्वार्टर में मैच का रुख बदल गया। 43वें मिनट में इशिका ने भारत के लिए पहला गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके ठीक अगले मिनट नवनीत कौर ने शानदार गोल करते हुए भारत की बढ़त 2-0 कर दी। लगातार दो गोल से भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ गया और जर्मनी पर दबाव बन गया। चौथे क्वार्टर में भी भारत ने आक्रामक खेल जारी रखा। 47वें मिनट में नवनीत कौर ने अपना दूसरा और टीम का तीसरा गोल कर दिया। इस गोल के बाद भारत 3-0 से आगे हो गया। जर्मनी ने आखिरी मिनटों में वापसी की कोशिश की और 59वें मिनट में लिन क्रिंग्स ने टीम के लिए पहला गोल किया। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी। फुल टाइम तक भारत ने 3-1 की बढ़त बनाए रखी और मुकाबला अपने नाम कर लिया।

52 साल बाद महिला हॉकी वर्ल्ड कप में नया रिकॉर्ड

दरअसल भारत का महिला हॉकी वर्ल्ड कप में सबसे अच्छा प्रदर्शन अब तक 1974 में रहा था। उस शुरुआती वर्ल्ड कप में भारतीय टीम चौथे स्थान पर रही थी। उसके बाद कई टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के बावजूद टीम उस स्थान तक नहीं पहुंच सकी। 2026 के टूर्नामेंट में जर्मनी के खिलाफ मिली जीत ने भारत को पांचवें स्थान तक पहुंचाया और इसी के साथ टीम ने अपना नया सर्वश्रेष्ठ फिनिश दर्ज किया।

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  Sports

Rishabh Pant के 50 Test के बाद Ravichandran Ashwin की दो टूक सलाह: अब टीम की जरूरत के हिसाब से खेलें

रिषभ पंत ने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 168 रन बनाकर दो अर्धशतक जरूर लगाए, लेकिन उनके प्रदर्शन को लेकर रविचंद्रन अश्विन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर का मानना है कि पंत को अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ मैच की स्थिति को समझने और टीम की जरूरत के मुताबिक फैसले लेने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अश्विन ने अपने कार्यक्रम ‘अश की बात’ में पंत की बल्लेबाजी पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों के आधार पर पंत के प्रदर्शन का आकलन करना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक, पंत जिस तरह के जोखिम लेते हैं, उसमें यह समझना जरूरी है कि कब आक्रमण करना है और कब विकेट बचाकर खेलना है।

पंत की आक्रामक शैली पिछले कुछ महीनों से चर्चा का विषय रही है। उनके प्रशंसक अक्सर उनकी इसी बेखौफ बल्लेबाजी को उनकी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं, क्योंकि वह मुश्किल परिस्थितियों में भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, अश्विन का कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में हर परिस्थिति में एक ही अंदाज से बल्लेबाजी करना टीम के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

उन्होंने पिछले साल गुवाहाटी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पंत के आउट होने का उदाहरण भी दिया। उस मुकाबले में शुभमन गिल की गैरमौजूदगी में पंत भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। उन्होंने मार्को यानसन की गेंद पर आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर के हाथों में चली गई।

अश्विन ने साफ किया कि उन्हें पंत के आक्रामक खेल से समस्या नहीं है। उनकी आपत्ति उन मौकों को लेकर है जब मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण स्थिति में हो और बल्लेबाज अनावश्यक जोखिम उठा ले। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सहवाग और एडम गिलक्रिस्ट जैसे बल्लेबाज भी आक्रामक क्रिकेट खेलते थे, लेकिन मैच की स्थिति को नजरअंदाज करके इस तरह के जोखिम नहीं लेते थे।

गौरतलब है कि पंत अब तक 50 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। अश्विन के अनुसार, इतने अनुभव के बाद उनसे ज्यादा जिम्मेदारी की उम्मीद की जानी चाहिए। उन्होंने पंत को किसी विशेष प्रतिभा के नाम पर अतिरिक्त छूट देने के विचार पर भी सवाल उठाया। अश्विन का कहना है कि यशस्वी जायसवाल जैसे युवा खिलाड़ियों में भी असाधारण क्षमता है, इसलिए सिर्फ विशेष प्रतिभा होने के आधार पर किसी खिलाड़ी को आलोचना से बचाना उचित नहीं है।

अश्विन ने सिडनी और ब्रिस्बेन में पंत की शानदार पारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंत ने वहां बेहतरीन पारियां खेलीं, लेकिन टेस्ट जीतने के लिए केवल एक खिलाड़ी का प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होता। वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा था। उनके मुताबिक, टेस्ट मैच को जीत तक पहुंचाने के लिए 11 खिलाड़ियों का योगदान चाहिए, जबकि एक गलत फैसला पूरे मैच को हाथ से निकाल सकता है।

बता दें कि पंत फिलहाल भारत की एकदिवसीय और टी20 टीम से बाहर हैं और मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में ही भारतीय टीम का हिस्सा हैं। अश्विन मानते हैं कि अगर पंत अपनी बल्लेबाजी में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव लाते हैं तो उनके लिए सीमित ओवरों की टीम में वापसी का रास्ता भी खुल सकता है।

अश्विन ने यहां तक कहा कि जिस दिन पंत को उनकी कमियों के बारे में साफ और ईमानदार प्रतिक्रिया मिलने लगेगी, वह तीनों प्रारूपों में दोबारा भारत के लिए खेलने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। उनके मुताबिक, पंत की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन अब उनके खेल में जिम्मेदारी और बेहतर निर्णय लेने की जरूरत है। यही बदलाव उन्हें एक शानदार टेस्ट बल्लेबाज से फिर से भारत के तीनों प्रारूपों के भरोसेमंद खिलाड़ी में बदल सकता है।
Fri, 28 Aug 2026 18:54:00 +0530

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