UK Citizenship हासिल करने में भारतीय सबसे आगे, ब्रिटेन में स्थायी निवास में भी 51% उछाल
अदिति खन्ना लंदन, 27 अगस्त ब्रिटेन में बसने और नागरिकता पाने के इच्छुक लोगों में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक रही। बृहस्पतिवार को जारी गृह कार्यालय के आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। ब्रिटेन में स्थायी रूप से बसने के अधिकार से जुड़े नियमों के तहत, वर्तमान में वैध वीजा वाले लोगों को पांच साल बाद यह अधिकार मिल जाता है।
लेकिन गृह मंत्री शबाना महमूद के प्रस्तावों के तहत इस अवधि को इस वर्ष के अंत से बढ़ाकर दोगुना करने का प्रस्ताव है। पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान जारी किए गए आव्रजन संबंधी नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि अनिश्चितकालीन निवास अनुमति (आईएलआर) के आवेदन मंजूर होने में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसे स्थायी निवास के रूप में भी जाना जाता है, जिससे आगे चलकर ब्रिटिश नागरिकता के लिए आवेदन करने का रास्ता भी खुलता है।
गृह कार्यालय ने कहा, ‘‘जून 2026 को समाप्त हुए वर्ष में, भारतीय नागरिकों को स्थायी निवास की अनुमति दिए जाने के मामले में वे सबसे बड़ा राष्ट्रीयता समूह बने रहे। इस दौरान 35,384 भारतीय नागरिकों को स्थायी निवास की अनुमति मिली, जो पिछले वर्ष की तुलना में 51 प्रतिशत अधिक है।’’ इसने कहा, ‘‘यह मुख्य रूप से उन भारतीय नागरिकों की बढ़ती संख्या को दर्शाता है, जो हाल के वर्षों में रोजगार के माध्यम से ब्रिटेन आए थे और अब स्थायी निवास के लिए आवश्यक लगातार निवास की निर्धारित अवधि पूरी कर चुके हैं।’’ आंकड़ों के अनुसार 2025 से 2026 की अवधि में ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त करने वालों में भारतीय नागरिक 24,851 के साथ सबसे बड़ा राष्ट्रीयता समूह रहे, जबकि पाकिस्तानी नागरिक 18,489 के साथ दूसरे स्थान पर रहे। इस सप्ताह जारी आंकड़ों में शामिल अन्य प्रवासन श्रेणियों में भी भारतीय नागरिकों को सबसे अधिक ‘विजिटर वीजा’ जारी किए गए, जिनकी संख्या 5,14,398 रही।
यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में नौ प्रतिशत कम है। जून 2026 को समाप्त हुए वर्ष में भारतीय छात्रों को दिए गए छात्र वीजा की संख्या में लगातार जारी गिरावट को भी दर्शाता है। इस अवधि में 82,523 वीजा मंजूर किए गए, जो पिछले एक वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत कम है।
भारतीय नागरिक दूसरे स्थान पर रहे, क्योंकि पिछले एक वर्ष में चीनी नागरिकों को 86,368 छात्र वीजा जारी किए गए और वे पहले स्थान पर रहे।
पंजाब में रोजगार पर सरकार का फोकस, 1,746 पुलिस जवानों को नियुक्ति; 70,840 से ज्यादा सरकारी नौकरियों का दावा
पंजाब में युवाओं के रोजगार को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार ने एक बार फिर अपने कार्यकाल की उपलब्धियां सामने रखी हैं. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के अनुसार, अप्रैल 2022 से अगस्त 2026 तक राज्य में 70,840 से अधिक सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं. इसी कड़ी में 27 अगस्त को 1,746 पुलिस जवानों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए.
सरकार का कहना है कि इन नियुक्तियों में सिफारिश और रिश्वत के बजाय योग्यता तथा मेहनत को प्राथमिकता दी गई है. नियुक्ति पाने वाले युवाओं के लिए यह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता और बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
1,746 पुलिस जवानों की नियुक्ति से युवाओं को संदेश
पुलिस विभाग में नई नियुक्तियों को सरकार रोजगार अभियान का अहम हिस्सा बता रही है. नियुक्ति पत्र मिलने के बाद 1,746 परिवारों में खुशी का माहौल है. सरकारी नौकरी मिलने से युवाओं को स्थायी करियर के साथ सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी मिलती है.
सरकार की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता रखकर युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाएगा.
सरकारी नौकरियों के साथ निजी क्षेत्र पर भी जोर
पंजाब में रोजगार की तस्वीर केवल सरकारी भर्तियों तक सीमित नहीं बताई जा रही है. सरकार के अनुसार, राज्य में 6.36 लाख से अधिक निजी क्षेत्र के रोजगार सृजित या सुगम किए गए हैं.
इसके अलावा करीब 23 लाख युवाओं को रोजगार मेलों, प्लेसमेंट कैंप और रोजगार सहायता नेटवर्क से जोड़ा गया है. इससे युवाओं को सरकारी नौकरी के साथ निजी कंपनियों में करियर के विकल्प तलाशने का अवसर मिल रहा है.
रोजगार मेलों से कंपनियों तक सीधी पहुंच
जुलाई 2026 में सुनाम में आयोजित मेगा जॉब फेयर को भी इसी रणनीति का उदाहरण बताया गया. यहां 562 युवाओं का चयन हुआ, जबकि 618 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया.
ऐसे आयोजनों का उद्देश्य नौकरी तलाश रहे युवाओं और कंपनियों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करना है. इससे अभ्यर्थियों को अलग-अलग कंपनियों में आवेदन करने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरने के बजाय एक ही मंच पर कई अवसर मिलते हैं.
निवेश बढ़ने से रोजगार के नए रास्ते
सरकार के मुताबिक पंजाब में करीब 1.84 लाख करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया गया है. राज्य में औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशों का सीधा संबंध रोजगार से जोड़ा जा रहा है.
नए उद्योग स्थापित होने पर प्रत्यक्ष नौकरियों के अलावा परिवहन, सप्लाई चेन, सर्विस सेक्टर और स्थानीय कारोबार में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.
युवाओं के बीच बदल रहा रोजगार का मुद्दा
आज की युवा पीढ़ी सरकार के कामकाज का आकलन रोजगार, अवसर और भविष्य की सुरक्षा जैसे मुद्दों से भी करती है. ऐसे में नियुक्तियां, जॉब फेयर और निजी निवेश सरकार के लिए अपनी नीतियों का असर दिखाने के प्रमुख माध्यम बन गए हैं.
पंजाब में युवाओं का पढ़ाई और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों या विदेश जाना लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है. ऐसे में राज्य के भीतर बेहतर अवसर तैयार करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती भी है और प्राथमिकता भी.
बेरोजगारी की चुनौती अभी कायम
हालांकि सरकारी आंकड़ों में रोजगार के क्षेत्र में प्रगति का दावा किया जा रहा है, लेकिन पंजाब में युवाओं के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराना अभी भी बड़ी चुनौती है. सिर्फ नियुक्तियों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र में स्थायी अवसर, बेहतर वेतन और कौशल विकास पर भी लगातार काम करना जरूरी होगा.
सरकार का दावा- योग्यता के आधार पर रोजगार
भगवंत मान सरकार अपने रोजगार मॉडल को ‘सिफारिश और रिश्वत के बजाय योग्यता और मेहनत’ से जोड़कर पेश कर रही है. 1,746 पुलिस जवानों को नियुक्ति पत्र दिया जाना इसी दावे की नई कड़ी है.
सरकार के मुताबिक, 70,840 से अधिक सरकारी नौकरियों, 6.36 लाख से ज्यादा निजी रोजगार के अवसरों और बड़े निवेश के जरिए पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार का आधार मजबूत करने की कोशिश की जा रही है. आने वाले समय में इन प्रयासों की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि कितने युवाओं को राज्य में स्थायी और सम्मानजनक रोजगार मिलता है.
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