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Pralhad Joshi बोले: 500 GW Green Energy लक्ष्य के लिए 30 लाख करोड़ का निवेश जरूरी

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2030 तक स्वच्छ ईंधन आधारित 500 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले पांच वर्षों में 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि इस पूंजी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय वित्तीय संस्थानों, पूंजी बाजार, बीमा कोष, बुनियादी ढांचा निवेशकों और निजी पूंजी के माध्यम से जुटाना होगा। जोशी ने राष्ट्रीय राजधानी में दो से पांच नवंबर तक आयोजित होने वाले चार दिवसीय नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (बीआरईएसई) 2026 से पहले आयोजित प्रचार-प्रसार कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि देश में तेजी से हो रहे बुनियादी ढांचे के विकास के बीच हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और सहयोग के बड़े अवसर हैं।

जोशी ने कहा, ‘‘2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म (हरित) ईंधन क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले पांच वर्षों में 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी।’’ नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की मेजबानी में तथा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम शिखर सम्मेलन से पहले देशभर में आयोजित किए जा रहे प्रचार-प्रसार कार्यक्रमों की श्रृंखला का दूसरा आयोजन था। इस कार्यक्रम में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार तथा देश के नवीकरणीय ऊर्जा, बैंकिंग और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। देश में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि देश में स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता करीब 302-303 गीगावाट हो गई है।

वहीं, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत करीब 53.5 लाख परिवार छतों पर सौर प्रणाली लगा चुके हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की हरित ऊर्जा क्षमता 80.3 गीगावाट से बढ़कर 300.5 गीगावाट हो गई है। इसमें 275 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इसी अवधि में सौर ऊर्जा क्षमता 2.8 गीगावाट से बढ़कर 165 गीगावाट और पवन ऊर्जा क्षमता करीब 21 गीगावाट से बढ़कर 58 गीगावाट हो गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में 17 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गयी है। इसमें 14.33 गीगावाट सौर ऊर्जा और दो गीगावाट से अधिक पवन ऊर्जा क्षमता शामिल है।

आगामी शिखर सम्मेलन में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों की भागीदारी का आह्वान करते हुए जोशी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस सम्मेलन को लेकर काफी रुचि है। बीआरईएसई 2026 में तीन प्रमुख वैश्विक सम्मेलन...बीआरई शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं आमसभा और हरित हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन... एक ही स्थान पर आयोजित होंगे। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में 75 से अधिक देशों के प्रमुख और ऊर्जा मंत्री, वैश्विक संस्थागत निवेशक, प्रौद्योगिकी कंपनियां तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े 25,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है।

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US Federal Court में HDFC Bank के खिलाफ बड़ा एक्शन, ADR निवेशकों के मुआवजे की मांग से बढ़ी हलचल

मुंबई स्थित एचडीएफसी बैंक से जुड़ी एक खबर ने अमेरिका में उसके निवेशकों के बीच हलचल पैदा कर दी है। बैंक और उसके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में प्रतिभूति संबंधी सामूहिक मुकदमा दायर किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से जमा राशि हासिल करने के लिए ब्याज के भुगतान को कथित तौर पर विपणन खर्च के रूप में दिखाया गया।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह मुकदमा निवेशक ज्वलंत नटवरलाल सोनेजी की ओर से न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत में दाखिल किया गया है। इसमें एचडीएफसी बैंक के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीशन और मुख्य वित्तीय अधिकारी श्रीनिवासन वैद्यनाथन को भी पक्ष बनाया गया है। मुकदमा उन निवेशकों की ओर से है, जिन्होंने 17 जुलाई 2023 से 26 मई 2026 के बीच एचडीएफसी बैंक के अमेरिकी जमा प्रमाणपत्र खरीदे थे।

मामले का केंद्र महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से जुड़ा कथित जमा समझौता है। शिकायत के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक ने निगम की जमा राशि पर 6.01 प्रतिशत ब्याज देने का वादा किया था, जबकि सामान्य बचत खातों पर 3.5 प्रतिशत की दर लागू थी। आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने इस अंतर को सीधे ब्याज के रूप में देने के बजाय एक सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के लिए विपणन खर्च के तौर पर दिखाने की व्यवस्था की।

शिकायत में दावा किया गया है कि 2023 से 2025 के बीच करीब 45 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम तक पहुंचाई गई। कथित तौर पर यह रकम तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं के जरिए अभियान के खर्च के रूप में दिखाई गई।

गौरतलब है कि बैंकिंग नियमों के तहत अलग-अलग जमाकर्ताओं के लिए तय दर से अलग मुनाफा या ब्याज देने पर प्रतिबंध से जुड़ी पाबंदियां हैं। मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि बैंक की आंतरिक सतर्कता जांच में इस व्यवस्था को भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों और बैंक की रिश्वत विरोधी नीतियों के खिलाफ माना गया था।

निवेशकों ने आरोप लगाया है कि बैंक ने अमेरिकी प्रतिभूति नियामक के समक्ष दाखिल अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आंतरिक वित्तीय नियंत्रण को प्रभावी बताया, जबकि कथित अनियमितताओं की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। शिकायत में कहा गया है कि इस व्यवस्था के कारण बैंक के खर्च और शुद्ध ब्याज आय से जुड़े आंकड़ों पर भी सवाल उठते हैं।

इस पूरे मामले में 18 मार्च 2026 की घटना भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उस दिन एचडीएफसी बैंक के अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे में उन्होंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी गतिविधियों और प्रथाओं का जिक्र किया था, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं थीं। इसके बाद अमेरिका में कारोबार करने वाले बैंक के शेयर करीब 7.28 प्रतिशत गिर गए थे।

27 मई को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद मामला और चर्चा में आया। रिपोर्ट में बैंक की आंतरिक जांच और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से जुड़े भुगतानों का उल्लेख किया गया था। इसके बाद अमेरिकी बाजार में एचडीएफसी बैंक के शेयरों में करीब 4.1 प्रतिशत की और गिरावट आई। ताजा मुकदमे की खबर सामने आने के बाद अमेरिकी जमा प्रमाणपत्र करीब एक प्रतिशत नीचे कारोबार करते दिखे।

बता दें कि निवेशकों ने अमेरिकी प्रतिभूति विनिमय कानून की धारा 10(बी) और 20(ए) के तहत कार्रवाई की मांग की है। वे सामूहिक मुकदमे की मान्यता, मुआवजे और जूरी के सामने सुनवाई की मांग कर रहे हैं।

एचडीएफसी बैंक ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका में शेयरों में गिरावट के बाद इस तरह के मुकदमे आम हैं। बैंक का कहना है कि उसे मुकदमे में कोई ठोस आधार नजर नहीं आता और वह इसका मजबूती से बचाव करेगा। फिलहाल आरोप अदालत में विचाराधीन हैं और किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।

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  Sports

Rishabh Pant के 50 Test के बाद Ravichandran Ashwin की दो टूक सलाह: अब टीम की जरूरत के हिसाब से खेलें

रिषभ पंत ने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 168 रन बनाकर दो अर्धशतक जरूर लगाए, लेकिन उनके प्रदर्शन को लेकर रविचंद्रन अश्विन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर का मानना है कि पंत को अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ मैच की स्थिति को समझने और टीम की जरूरत के मुताबिक फैसले लेने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अश्विन ने अपने कार्यक्रम ‘अश की बात’ में पंत की बल्लेबाजी पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों के आधार पर पंत के प्रदर्शन का आकलन करना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक, पंत जिस तरह के जोखिम लेते हैं, उसमें यह समझना जरूरी है कि कब आक्रमण करना है और कब विकेट बचाकर खेलना है।

पंत की आक्रामक शैली पिछले कुछ महीनों से चर्चा का विषय रही है। उनके प्रशंसक अक्सर उनकी इसी बेखौफ बल्लेबाजी को उनकी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं, क्योंकि वह मुश्किल परिस्थितियों में भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, अश्विन का कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में हर परिस्थिति में एक ही अंदाज से बल्लेबाजी करना टीम के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

उन्होंने पिछले साल गुवाहाटी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पंत के आउट होने का उदाहरण भी दिया। उस मुकाबले में शुभमन गिल की गैरमौजूदगी में पंत भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। उन्होंने मार्को यानसन की गेंद पर आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर के हाथों में चली गई।

अश्विन ने साफ किया कि उन्हें पंत के आक्रामक खेल से समस्या नहीं है। उनकी आपत्ति उन मौकों को लेकर है जब मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण स्थिति में हो और बल्लेबाज अनावश्यक जोखिम उठा ले। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सहवाग और एडम गिलक्रिस्ट जैसे बल्लेबाज भी आक्रामक क्रिकेट खेलते थे, लेकिन मैच की स्थिति को नजरअंदाज करके इस तरह के जोखिम नहीं लेते थे।

गौरतलब है कि पंत अब तक 50 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। अश्विन के अनुसार, इतने अनुभव के बाद उनसे ज्यादा जिम्मेदारी की उम्मीद की जानी चाहिए। उन्होंने पंत को किसी विशेष प्रतिभा के नाम पर अतिरिक्त छूट देने के विचार पर भी सवाल उठाया। अश्विन का कहना है कि यशस्वी जायसवाल जैसे युवा खिलाड़ियों में भी असाधारण क्षमता है, इसलिए सिर्फ विशेष प्रतिभा होने के आधार पर किसी खिलाड़ी को आलोचना से बचाना उचित नहीं है।

अश्विन ने सिडनी और ब्रिस्बेन में पंत की शानदार पारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंत ने वहां बेहतरीन पारियां खेलीं, लेकिन टेस्ट जीतने के लिए केवल एक खिलाड़ी का प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होता। वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा था। उनके मुताबिक, टेस्ट मैच को जीत तक पहुंचाने के लिए 11 खिलाड़ियों का योगदान चाहिए, जबकि एक गलत फैसला पूरे मैच को हाथ से निकाल सकता है।

बता दें कि पंत फिलहाल भारत की एकदिवसीय और टी20 टीम से बाहर हैं और मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में ही भारतीय टीम का हिस्सा हैं। अश्विन मानते हैं कि अगर पंत अपनी बल्लेबाजी में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव लाते हैं तो उनके लिए सीमित ओवरों की टीम में वापसी का रास्ता भी खुल सकता है।

अश्विन ने यहां तक कहा कि जिस दिन पंत को उनकी कमियों के बारे में साफ और ईमानदार प्रतिक्रिया मिलने लगेगी, वह तीनों प्रारूपों में दोबारा भारत के लिए खेलने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। उनके मुताबिक, पंत की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन अब उनके खेल में जिम्मेदारी और बेहतर निर्णय लेने की जरूरत है। यही बदलाव उन्हें एक शानदार टेस्ट बल्लेबाज से फिर से भारत के तीनों प्रारूपों के भरोसेमंद खिलाड़ी में बदल सकता है।
Fri, 28 Aug 2026 18:54:00 +0530

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