डाकघर बचत घोटाला: फरार शाखा डाकपाल गिरफ्तार, 13.98 लाख रुपये के गबन का आरोप
Post Office Savings Scam: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने डाकघर बचत योजना से जुड़े धोखाधड़ी और गबन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए फरार चल रही आरोपी श्रीमती शब्दा स्वैन, तत्कालीन शाखा डाकपाल, बोंडा डाकघर, ओडिशा को गिरफ्तार कर लिया है। CBI ने उन्हें 27 अगस्त 2026 को ओडिशा के बरगढ़ से गिरफ्तार किया।
CBI के मुताबिक, शब्दा स्वैन वर्ष 2008 से 2014 के दौरान बोंडा डाकघर में शाखा डाकपाल के पद पर तैनात थीं। इसी दौरान उन पर जमाकर्ताओं से प्राप्त कुल 13,98,232 रुपये की राशि का गबन करने का आरोप है।
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पासबुक में फर्जी प्रविष्टियां कर जमा रकम का हिसाब नहीं दिया
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने जमाकर्ताओं से प्राप्त रकम को डाकघर के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया। इसके लिए पासबुक में गलत और फर्जी प्रविष्टियां किए जाने का आरोप है। इस तरह जमा की गई राशि को सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रखकर कथित तौर पर उसका दुरुपयोग किया गया। इस मामले में CBI की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), भुवनेश्वर इकाई ने केस दर्ज किया था। मामला RC 17(A)/2014-BBS के तहत दर्ज है।
2015 में आरोप तय होने के बाद से थी फरार
CBI के अनुसार, आरोपी के खिलाफ 31 दिसंबर 2015 को आरोप तय किए गए थे। इसके बाद से ही वह फरार चल रही थी। लंबे समय तक अदालत की कार्यवाही से बचने के बाद उसके खिलाफ वर्ष 2022 में गैर-जमानती वारंट (NBW) भी जारी किया गया था।
पारिवारिक समारोह में शामिल होने पहुंची थी बरगढ़
CBI ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। इसी दौरान एजेंसी को जानकारी मिली कि वह एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए बरगढ़, ओडिशा पहुंची है। सूचना के आधार पर CBI की टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। CBI ने कहा कि आरोपी को अब भुवनेश्वर की सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जा रहा है।
कई साल बाद CBI की कार्रवाई
इस गिरफ्तारी को मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है, क्योंकि आरोपी करीब एक दशक से अधिक समय से कानूनी प्रक्रिया से बच रही थी। CBI के मुताबिक, लगातार और सुनियोजित प्रयासों के बाद आरोपी को पकड़ने में सफलता मिली है। CBI की जांच का केंद्र डाकघर के बचत खातों में जमा रकम, रिकॉर्ड में की गई कथित फर्जी प्रविष्टियों और 13.98 लाख रुपये की राशि के गबन से जुड़े तथ्यों पर है।
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उत्तराखंड में 1.75 लाख छात्रों को साइबर सुरक्षा का पाठ, DGP ने बताया AI और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल का तरीका
Uttarakhand News: उत्तराखंड पुलिस ने स्कूली छात्रों को साइबर अपराध और डिजिटल खतरों से बचाने के लिए राज्यव्यापी साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस वर्चुअल कार्यक्रम में प्रदेश के 1,100 से ज्यादा राजकीय स्कूलों के करीब 1.75 लाख छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री के डिजिटल सुरक्षा संदेश और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘युवा विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम’ के तहत किया गया। देहरादून के राजकीय नवोदय विद्यालय, तपोवन, नालापानी स्थित ICT वर्चुअल क्लासरूम स्टूडियो से कार्यक्रम का संचालन किया गया।
DGP ने छात्रों से किया सीधा संवाद
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने छात्रों से वर्चुअल माध्यम से सीधे बातचीत की। उन्होंने ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया सेफ्टी, हैकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर बुलिंग और साइबर शिकायत दर्ज करने जैसे मुद्दों पर छात्रों के सवालों के जवाब दिए।
DGP ने छात्रों से कहा कि तकनीक और AI आज पढ़ाई, सीखने और करियर बनाने के लिए बड़े अवसर दे रहे हैं। ऐसे में तकनीक का इस्तेमाल केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान, शिक्षा, कौशल और नवाचार के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने छात्रों से खुद ‘Cyber Smart Citizen’ बनने और अपने परिवार व दोस्तों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की।
फर्जी लिंक और मैसेज से रहें सावधान
कार्यक्रम में छात्रों को सलाह दी गई कि किसी भी फोटो, वीडियो या सूचना को बिना जांचे आगे न भेजें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सतर्क रहें।
अधिकारियों ने छात्रों को AI, Deepfake, Digital Arrest, Cyber Bullying, Online Harassment, Sextortion, Fake Profiles और Online Gaming से जुड़े खतरों के बारे में भी जानकारी दी। इन विषयों को आसान उदाहरणों, वीडियो और प्रेजेंटेशन के जरिए समझाया गया।
साइबर ठगी होने पर 1930 पर करें कॉल
कार्यक्रम में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने की सलाह दी गई। इसके अलावा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी दी गई।
अब स्कूलों में नियमित होंगे जागरूकता कार्यक्रम
कार्यक्रम में छात्रों की सक्रिय भागीदारी और साइबर सुरक्षा को लेकर उनकी जिज्ञासा को देखते हुए DGP दीपम सेठ ने राजकीय स्कूलों में ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की उम्र और जरूरत के हिसाब से आसान और व्यावहारिक जागरूकता कार्यक्रम किए जाएं। इनमें साइबर सुरक्षा के साथ नशा मुक्ति और सड़क सुरक्षा जैसे विषयों को भी शामिल किया जाएगा। पुलिस महानिरीक्षक साइबर नीलेश आनंद भरणे, SSP STF अजय सिंह और ASP साइबर शांतनु परासर समेत कई अधिकारियों ने भी छात्रों के साथ संवाद किया।
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