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Punjab में 3 लाख Employees का बड़ा Protest, OPD सेवाएं ठप: DA Arrears पर गतिरोध गहराया

शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के अनुसार, पंजाब में 3 लाख से ज़्यादा सरकारी कर्मचारियों ने 27 अगस्त को सामूहिक छुट्टी लेकर विरोध प्रदर्शन किया और अपना बकाया महंगाई भत्ता (DA) जारी करने की मांग की। बादल ने पंजाब सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसने चंडीगढ़ स्थित पंजाब सचिवालय को शर्मिंदा किया है। उन्होंने दावा किया कि कोई भी पीआर (PR) कोशिश या मीडिया पर पाबंदी इस विरोध प्रदर्शन को छिपा नहीं सकती। 
 

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सोशल मीडिया पर बादल ने कहा कि चंडीगढ़ में पंजाब सचिवालय के अंदर से हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जहां 3 लाख से ज़्यादा सरकारी कर्मचारियों ने आज अपना बकाया DA पाने के लिए छुट्टी ली। एक प्रतिष्ठित दफ़्तर को कितनी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है! अब कोई भी पीआर या मीडिया पर रोक काम नहीं आएगी। गुरु के विरोधी भगवंत मान, आप पंजाब मुर्दाबाद! इसके जवाब में, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ज़ोर देकर कहा कि बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं हो सकते। 

उन्होंने आंदोलन खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि कर्मचारी हमारे परिवार का अहम हिस्सा हैं और हम उनकी हर जायज़ बात सुनने को तैयार हैं... लेकिन बातचीत और हड़ताल साथ-साथ नहीं चल सकते... सरकार हर मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन बातचीत तभी होगी जब हड़ताल वापस ले ली जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पंजाबी में भी यही बात दोहराई। इस हड़ताल का असर राज्य भर के सरकारी अस्पतालों की आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) सेवाओं पर पड़ा है। 
 

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अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल के प्रेसिडेंट और पैरा-मेडिकल और हेल्थ एम्प्लॉइज की कोऑर्डिनेशन कमेटी के ज़िला प्रेसिडेंट नरेंद्र सिंह ने बताया कि कर्मचारी साढ़े चार साल से ज़्यादा समय से भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सिंह ने मांगों के बारे में विस्तार से बताया, जिनमें कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को रेगुलर करना, अलग-अलग कैटेगरी के कर्मचारियों के लिए पेंशन फ़ायदे लागू करना, DA की रुकी हुई किस्तों का भुगतान करना और आंगनवाड़ी वर्कर, हेल्पर, मिड-डे मील वर्कर और दूसरे स्टाफ़ को रेगुलर करना शामिल है।
 
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Nepal Flood: भारी तबाही के सामने राहत इंतजाम नाकाफी, 162 लोगों की मौत

अपर्णा बोस नयी दिल्ली, 27 अगस्त बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए नेपाल में बचाव एवं राहत अभियान जारी रहने के बीच जलवायु विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस आपदा जनित तबाही का दायरा इतना व्यापक है कि मौजूदा राहत एवं बचाव क्षमता नाकाफी पड़ रही है और सर्वाधिक प्रभावित जिलों में परिवार भोजन, आश्रय और राहत सामग्री पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नेपाल में ‘क्लाइमेट रिस्क एंड रेजिलिएंस लैब’ के कार्यकारी निदेशक बिनोद प्रसाद पराजुली ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि सरकार कार्रवाई कर रही है, लेकिन तबाही की व्यापकता राहत एवं बचाव तंत्र की मौजूदा क्षमता के मुकाबले कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव तंत्र की मौजूदा क्षमता नुकसान की व्यापकता से निपटने में सक्षम नहीं है।

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के साथ राहत प्रयासों का नेतृत्व कर रहे पराजुली ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘नेपाल सरकार और संबंधित पक्षों की पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है। इस दौरान सरकार, सुरक्षा बल, स्थानीय अधिकारी और अन्य संबंधित पक्ष ऐसे लोगों का पता लगाने में जुटे हैं जो अब भी कहीं फंसे हो सकते हैं और जीवित हैं। इसके लिए काठमांडू से ड्रोन दल भेजे गए हैं, जो फंसे लोगों का‘थर्मल’ और ‘ऑप्टिकल कैमरों’ की मदद से पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।’’ उन्होंने बताया कि सरकार प्रमुख वाणिज्यिक उपग्रह कंपनियों के साथ समन्वय कर रही है ताकि ‘हाई-रिजॉल्यूशन’ वाली तस्वीरें जल्द हासिल की जा सकें और नुकसान का त्वरित आकलन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रभाव, नुकसान और क्षति की बात करें तो यह घटना नेपाल-चीन सीमा से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में रसुवा जिले में हुई, जो इस विनाशकारी बाढ़ की चपेट में सबसे पहले आया। रसुवा के बाद नुवाकोट और फिर धादिंग जिला प्रभावित हुआ। हमारे शुरुआती आकलन से पता चलता है कि कम से कम 1,976 इमारतें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं और करीब 38 किलोमीटर सड़क पूरी तरह नष्ट हो गई है।’’ उन्होंने कहा कि ये शुरुआती आकलन के आंकड़े हैं और अधिक जानकारी मिलने पर इनमें बदलाव हो सकता है।

पराजुली ने बताया कि ये आंकड़े ड्रोन और उपग्रह से ली गई तस्वीरों तथा ‘रिमोट सेंसिंग’ विश्लेषण पर आधारित हैं। नेपाल की आदिवासी जलवायु कार्यकर्ता पेमा वांगमो लामा ने कहा कि प्रभावित इलाकों से सामने आ रही जानकारी बेहद गंभीर स्थिति की ओर इशारा करती है और सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में जीवित बचे लोग बचाव अभियान जारी रहने के बावजूद बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लामा ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘रसुवा में एक संपर्क के जरिये हम स्थानीय सरकार के एक प्रतिनिधि तक पहुंचे।

उनके अनुसार, जिस इलाके में बाढ़ सबसे पहले आई, वहां लोग पास की ऊंची जगह पर चले गए और खुले जंगल में शरण लिए हुए हैं। वे अब भी बचाए जाने का इंतजार कर रहे हैं।’’ उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह एक हेलीकॉप्टर ने उस इलाके से करीब 12 से 13 लोगों को बचाया। लामा ने कहा कि पास के धादिंग जिले के एक हिस्से में सड़क संपर्क अब भी बंद है, जिसके कारण स्थानीय लोग घरों में उपलब्ध सीमित संसाधनों पर निर्भर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अगले कुछ दिनों में उन्हें पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ सकता है।’’ उन्होंने बताया कि नुवाकोट में स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है, जहां अपने घर गंवा चुके कई लोग सरकार द्वारा संचालित आश्रय स्थलों में रह रहे हैं और राहत का इंतजार कर रहे हैं। लामा ने कहा कि नुवाकोट के त्रिशूली अस्पताल को बाढ़ से बचाए गए लोगों और जांच के लिए लाए जा रहे मरीजों के इलाज में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित होने के कारण बिजली एक बड़ी चिंता बनती जा रही है।

अस्पताल के सूचना अधिकारी ने बताया कि उनके पास ईंधन बहुत सीमित मात्रा में है और उन्हें डीजल, जनरेटर तथा इसी तरह की अन्य सहायता की जरूरत है।’’ लामा ने कहा कि जिन स्थानीय लोगों से उनकी बात हुई, उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल फोन की बैटरियां खत्म होने वाली हैं और उन्हें चार्ज करने का कोई साधन नहीं है, जिससे संचार व्यवस्था और बाधित हो रही है। लामा के अनुसार, बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त होने के कारण स्थानीय समुदायों से संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने आपदा के कारण का जिक्र करते हुए कहा कि स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है और इसे लेकर ‘‘परस्पर विरोधी कई खबरें’’ सामने आ रही हैं।

लामा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘रसुवा अब भी सबसे अधिक संवेदनशील इलाका है और बिधुर नगरपालिका में त्रिशूली नदी के पास का रास्ता ही वहां पहुंचने का एकमात्र साधन बचा है। सभी सड़कें और परिवहन के अन्य साधन बंद हो जाने या नष्ट होने के कारण बचाव एवं राहत अभियान लगभग पूरी तरह हेलीकॉप्टर के जरिये चलाया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अभी प्राथमिकता स्थानीय लोगों और अधिकारियों, दोनों के साथ संचार व्यवस्था कायम करने की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहां किस चीज की जरूरत है और लोग सुरक्षित रूप से कहां जा सकते हैं, क्योंकि सही जानकारी के बिना लोगों के एक जगह से दूसरी जगह जाने से मृतकों की संख्या और बढ़ने का खतरा है।’’ मीडिया में आई एक खबर के अनुसार, नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 162 हो गई है। सुरक्षा कर्मियों और विदेशी पर्यटकों समेत कई लोग अब भी लापता हैं तथा बड़ी संख्या में संपत्तियां बह गई हैं।

यह हाल के वर्षों में देश की सबसे भीषण आपदाओं में से एक है।

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  Sports

Sehwag और Dravid की विरासत संभालेंगे बेटे, Aryavir Sehwag का Australia सीरीज के लिए India U-19 में चयन

भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के बेटे आर्यवीर सहवाग के लिए भारतीय क्रिकेट में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। आर्यवीर को पहली बार भारत की अंडर-19 टीम में जगह मिली है। उन्हें सितंबर में राजकोट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली तीन एकदिवसीय मुकाबलों की श्रृंखला के लिए चुना गया है। इस चयन के साथ अब आर्यवीर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का मौका मिलेगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार, आर्यवीर दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और हाल ही में दिल्ली प्रीमियर लीग में वेस्ट दिल्ली लायंस की ओर से खेल रहे थे। इस दौरान उनके आक्रामक बल्लेबाजी अंदाज ने क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान खींचा। उनके खेलने के तरीके की तुलना उनके पिता वीरेंद्र सहवाग से भी की गई, जो अपने बेखौफ और तेजतर्रार बल्लेबाजी के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं।

आर्यवीर इससे पहले 2024 में कूच बिहार ट्रॉफी के दौरान भी चर्चा में आए थे। उन्होंने मेघालय के खिलाफ 297 रन की शानदार पारी खेली थी। इस बड़ी पारी ने कम उम्र में ही उनकी बल्लेबाजी क्षमता की झलक दिखा दी थी। अब भारत की अंडर-19 टीम में चयन उनके लिए अपने प्रदर्शन को अगले स्तर पर ले जाने का अवसर है।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला में आर्यवीर के साथ विकेटकीपर बल्लेबाज अन्वय द्रविड़ को भी जगह मिली है। अन्वय ने श्रीलंका दौरे पर जुलाई में भारत की अंडर-19 टीम के लिए प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। उन्होंने 87 रन की पारी खेली थी। इसके बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें एकदिवसीय टीम में बनाए रखा है।

हालांकि, आर्यवीर और अन्वय दोनों को बहुदिवसीय मुकाबलों के लिए चुनी गई टीम में जगह नहीं मिली है। यानी दोनों खिलाड़ियों के लिए फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन एकदिवसीय मुकाबले ही अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका होंगे।

गौरतलब है कि एकदिवसीय मुकाबलों में भारत की कप्तानी सलामी बल्लेबाज लक्ष्य रायचंदानी करेंगे। श्रीलंका दौरे के दौरान भारत की अगुवाई करने वाले यशवर्धन चौहान को उपकप्तान बनाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि बहुदिवसीय मुकाबलों में दोनों की जिम्मेदारियां बदल जाएंगी। यशवर्धन चौहान टीम की कप्तानी करेंगे, जबकि लक्ष्य रायचंदानी उपकप्तान की भूमिका में नजर आएंगे।

भारत और ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीमों के बीच तीन एकदिवसीय मुकाबले राजकोट में खेले जाएंगे। पहला मुकाबला 18 सितंबर, दूसरा 21 सितंबर और तीसरा 23 सितंबर को होगा। इसके बाद बहुदिवसीय श्रृंखला की शुरुआत भी राजकोट से होगी। पहला मुकाबला 27 से 30 सितंबर तक खेला जाएगा।

दूसरा बहुदिवसीय मुकाबला अहमदाबाद के बी मैदान पर 5 से 8 अक्टूबर तक होगा। इस दौरे को युवा भारतीय खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की मजबूत चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

बता दें कि अंडर-19 स्तर पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबले युवा खिलाड़ियों को भविष्य के बड़े मंच के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आर्यवीर के लिए इस दौरे की खासियत यह भी होगी कि उन पर अपने पिता के नाम और उनकी बल्लेबाजी की विरासत से जुड़ी उम्मीदों का दबाव रहेगा। हालांकि, उनका अब तक का प्रदर्शन बताता है कि वह अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अब नजर इस बात पर होगी कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली बार भारतीय जर्सी पहनकर आर्यवीर सहवाग कैसा प्रदर्शन करते हैं।
Thu, 27 Aug 2026 23:13:00 +0530

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