रॉकिंग स्टार यश की ‘टॉक्सिक’ ने सिनेमाघरों में मारी दहाड़, पहले दिन 108 करोड़ के साथ ‘केजीएफ 2’ के हिंदी डे वन नेट को पछाड़ा
Yash Film Toxic: रॉकिंग स्टार यश की ‘टॉक्सिक: अ फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार शुरुआत की है. फिल्म ने ओपनिंग डे पर अंग्रेजी को छोड़कर सभी भाषाओं में भारत में 108 करोड़ नेट की कमाई की है. गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी इस मच अवेटेड यश स्टारर फिल्म ने पहले ही दिन अपनी जबरदस्त मौजूदगी दर्ज कराते हुए एक मजबूत थिएट्रिकल रन की नींव रख दी है.
इस ओपनिंग को और भी खास बनाता है हिंदी मार्केट में फिल्म का जबरदस्त प्रदर्शन. ‘टॉक्सिक’ ने हिंदी में पहले दिन भारत में 55.4 करोड़ नेट की कमाई करते हुए ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ के 53.95 करोड़ के ओपनिंग डे कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है. ये उपलब्धि रॉकिंग स्टार यश के लिए एक बड़ा पल है, जो अलग-अलग मार्केट्स में उनकी बढ़ती पकड़ के साथ-साथ पहले ही दिन ‘टॉक्सिक’ को मिले शानदार ऑडियंस रिस्पॉन्स को भी दर्शाती है.
टॉक्सिक को मिल रहा जबरदस्त रिस्पॉन्स
फिल्म को खासतौर पर मास सेंटर्स में जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. दर्शक इसके बड़े पैमाने वाले वर्ल्ड, हाई-ऑक्टेन एक्शन, शानदार विजुअल्स और सबसे बढ़कर रॉकिंग स्टार यश की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस को खूब एन्जॉय कर रहे हैं. राया और टिकट के उनके किरदार, उनका एटीट्यूड, इंटेंसिटी, करिश्मा और एक्शन से भरपूर परफॉर्मेंस फिल्म की सबसे बड़ी हाइलाइट्स में शामिल हो गए हैं. ऑडियंस यश को इस नए और पावरफुल अवतार में जमकर सेलिब्रेट कर रही है.
सिर्फ स्केल और एक्शन ही नहीं, ‘टॉक्सिक’ गैंगस्टर जॉनर में एक लेयर्ड और एम्बिशियस कहानी कहने की अपनी साहसिक कोशिश के लिए भी अलग नजर आती है. फिल्म एक पारंपरिक एक्शन-ड्रिवन कहानी से आगे बढ़ते हुए फैमिली, रिश्तों, महत्वाकांक्षा, पावर और इंसानी जज़्बातों की जटिल परतों को साथ लेकर चलती है. कहानी की ये परतें हर बार देखने पर दर्शकों को कुछ नया खोजने का मौका देती हैं, जिससे यह फिल्म रिपीट वॉच के लिए भी एक दिलचस्प एक्सपीरियंस बन जाती है.
यूनिक स्टोरीटेलिंग को मिल रही खूब सराहना
फिल्म की एन्सेम्बल कास्ट ने भी इस एक्सपीरियंस को और खास बनाया है. नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत और हुमा कुरैशी ने अपनी अलग-अलग मौजूदगी से फिल्म में अपनी छाप छोड़ी है. एम्बिशियस प्रोडक्शन डिजाइन, भव्य स्केल, म्यूजिक, दमदार एक्शन सेट पीसेज और गीतू मोहनदास की यूनिक स्टोरीटेलिंग को भी ऑडियंस से खूब सराहना मिल रही है.
दूसरे दिन कलेक्शन में हल्की गिरावट की उम्मीद थी, क्योंकि ये एक रेगुलर वर्किंग डे है. इसके बावजूद मास सेंटर्स में फिल्म को मिल रहा रिस्पॉन्स और उसका मोमेंटम लगातार उत्साहजनक बना हुआ है. भारत में पहले दिन 108 करोड़ नेट के साथ ‘टॉक्सिक: अ फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ ने स्टाइल में अपनी एंट्री मारी है और बॉक्स ऑफिस पर अपनी यात्रा की शुरुआत पूरे दमखम के साथ की है.
रॉकिंग स्टार यश की जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस, ऑडियंस की मजबूत स्वीकार्यता और हर बार देखने पर नई परतें खोलने वाली कहानी के दम पर ‘टॉक्सिक: अ फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ अब अपने थिएट्रिकल रन के अहम दिनों की ओर बढ़ रही है. अब सबकी नजरें एक मजबूत वीकेंड पर टिकी हैं, जहां फिल्म के और भी बड़ा धमाका करने की उम्मीद है.
महाराष्ट्र में रिक्शा-टैक्सी चालकों को बड़ी राहत, मराठी सीखने के लिए फडणवीस सरकार ने दिया इतना वक्त
महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के ज्ञान को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. राज्य सरकार ने चालकों को राहत देते हुए बोलचाल की मराठी सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के दौरान मराठी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने पर चालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी.
चालक संगठनों ने मांगी थी अतिरिक्त मोहलत
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुताबिक, रिक्शा और टैक्सी चालक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं. संगठनों ने सरकार से मांग की कि चालकों को मराठी सीखने के लिए तत्काल सख्ती करने के बजाय पर्याप्त समय दिया जाए.
चालकों का कहना था कि इस पेशे से जुड़े लोगों की उम्र और शैक्षणिक पृष्ठभूमि अलग-अलग है. कई चालक ऐसे हैं जिन्होंने वर्षों पहले पढ़ाई छोड़ दी थी. ऐसे में कम समय के भीतर नई भाषा सीखना उनके लिए आसान नहीं होगा. सरकार ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक साल की अतिरिक्त अवधि देने का निर्णय लिया है.
एक साल तक नहीं होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा दी गई इस मोहलत के दौरान मराठी नहीं जानने वाले रिक्शा और टैक्सी चालकों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस दौरान उन्हें भाषा सीखने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
सरकार का उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि चालकों को व्यावहारिक स्तर पर मराठी बोलने और समझने में सक्षम बनाना है. इसके लिए प्रशिक्षण और अध्ययन सामग्री तैयार करने की योजना पर भी काम किया जाएगा.
कामचलाऊ मराठी पर रहेगा जोर
मुख्यमंत्री फडणवीस के अनुसार, रिक्शा और टैक्सी चालकों को साहित्यिक या कठिन मराठी सीखने की आवश्यकता नहीं है. उनकी जरूरत के मुताबिक कामचलाऊ और बोलचाल की मराठी सिखाने की व्यवस्था की जाएगी.
इससे यात्रियों से बातचीत करने, उनका गंतव्य समझने और रोजमर्रा के काम में भाषा संबंधी दिक्कतों को कम करने में मदद मिल सकती है.
अलग-अलग उम्र के हैं चालक
इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह चालकों की विविध पृष्ठभूमि को माना जा रहा है. परिवहन क्षेत्र में काम करने वाले चालकों में युवा से लेकर अधिक उम्र के लोग भी शामिल हैं. कई लोगों के लिए दोबारा पढ़ाई या भाषा सीखने की प्रक्रिया शुरू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
इसी बात को लेकर चालक संगठनों ने सरकार से व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की थी. अब सरकार ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए सीखने के लिए पर्याप्त समय देने का फैसला किया है.
कक्षाओं और सामग्री से मिलेगी मदद
सरकार की ओर से चालकों को मराठी सिखाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जाएंगे. मुख्यमंत्री के मुताबिक, कक्षाएं आयोजित करने के साथ अध्ययन सामग्री भी तैयार की जाएगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चालक आसानी से रोजमर्रा की बातचीत वाली मराठी सीख सकें.
इस प्रक्रिया में चालकों को उनकी सुविधा के अनुसार प्रशिक्षण देने पर जोर रहने की संभावना है, ताकि भाषा सीखने का दबाव उनके रोजगार पर असर न डाले.
चालकों ने भी जताई सीखने की इच्छा
मुख्यमंत्री ने बताया कि रिक्शा और टैक्सी चालक संगठनों ने खुद इस बात का समर्थन किया है कि मुंबई में काम करने वाले चालकों को कामचलाऊ मराठी आनी चाहिए. यानी विवाद का मुख्य मुद्दा भाषा सीखने के खिलाफ होना नहीं, बल्कि इसे सीखने के लिए पर्याप्त समय और उचित व्यवस्था उपलब्ध कराना है.
सरकार ने अपनाया संतुलित रुख
राज्य सरकार के इस फैसले से एक ओर मराठी भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश जारी रहेगी, वहीं दूसरी ओर रिक्शा-टैक्सी चालकों को तत्काल कार्रवाई से राहत मिलेगी. अगले एक साल में प्रशिक्षण और भाषा सीखने की प्रक्रिया के जरिए उन्हें तैयार करने पर जोर रहेगा.
फिलहाल सरकार के फैसले को भाषा नीति और रोजी-रोटी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. एक साल की मोहलत के बाद नियमों के पालन को लेकर सरकार आगे क्या व्यवस्था करती है, इस पर भी नजर रहेगी.
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