भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस के दौरे पर गए। तस्वीरें सामने आई। व्लादमीर पुतिन से मुलाकात हुई। कई अहम विषयों पर दोनों देशों के बीच एक दूसरे से बात हुई। इसको लेकर लगता है कि यूक्रेन बेचैन हो गया और तभी तो भारत के विदेश मंत्री और यूक्रेन के विदेश मंत्री के बीच फोन पर बातचीत हुई। यूक्रेन के विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि उनकी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ फोन पर बात हुई है। यूक्रेनी विदेश मंत्री का कहना है कि उन्होंने यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता, उनके बंदरगाहों और समुद्री रास्तों पर बढ़ते हमलों के कारण ब्लैक सी में बनी हुई स्थिति के बारे में जयशंकर को जानकारी दी है। यूक्रेनी विदेश मंत्री का कहना है कि वह इस बात पर जोर दे रहे थे कि यूक्रेन से होने वाले खाद्य निर्यात में बाधा डालने की रूस की कोशिश वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि इसका असर हमारे इलाके से कहीं आगे तक जाता है और उनका दावा है कि दुनिया भर में लाखों परिवार के लिए इसके कारण जोखिम पैदा होता है।
यूक्रेनी विदेश मंत्री का दावा है कि हमने ब्लैक सी में नेविगेशन की आजादी को बहाल करने और सुरक्षित बनाने के तरीकों पर चर्चा की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि यूक्रेन और भारत के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाने और हमारे आपसी फायदे वाले एजेंडे को आगे ले जाने के तरीकों पर बातचीत हुई है। यूक्रेन का कहना है कि हम अपनी आने वाली मुलाकातों और बातचीत के बारे में तालमेल बिठा रहे हैं और लगातार संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए हैं। वहीं भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की तरफ से भी जानकारी सामने आई कि उनके समकक्ष यूक्रेनी विदेश मंत्री के साथ उनकी फोन पर अच्छी बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से ब्लैक सी में व्यापार फिर से शुरू करने और सभी नाविकों और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर बातचीत केंद्रित रही।
भारत बातचीत और कूटनीति का हमेशा से पक्का समर्थक रहा है।
एस जयशंकर की बातचीत से यह साफ है कि जिस तरह से यूक्रेन रूस आने जाने वाले जहाजों को निशाने पर ले रहा है, उससे भारतीय नाविकों की जान को खतरा है। हाल के दिनों में ब्लैक सी में हुए रूस और यूक्रेन के हमलों से भारतीय नाविकों की जान गई है। इसके कारण भारत नाराज हुआ था। दोनों देशों को आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी को लेकर भारत ने एक बार फिर से यूक्रेन से बातचीत की है और यह कहा है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए क्योंकि देखा जाए तो हरमूज हो या फिर लाल सागर या फिर ब्लैक सी हर जगह युद्ध का साया मंडरा रहा है और हर जगह भारतीय नाविक खतरे में पड़ रहे हैं। इसी को देखते हुए भारत सरकार की तरफ से लगातार यह पहल की जा रही है कि भारतीय नाविकों की जान को सुरक्षित रखने के लिए सारे पक्षों से बातचीत की जाए।
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