चुनाव आयोग ने अभी चुनाव का बिगुल नहीं बजाया है, लेकिन पंजाब 2027 की लड़ाई शुरू हो चुकी है। फ़र्क बस इतना है कि यह लड़ाई अभी वोटरों तक नहीं पहुँची है। फ़िलहाल, यह लड़ाई राजनीतिक पार्टियों के अंदर ही लड़ी जा रही है। लेकिन इस शुरुआती हलचल में एक दिलचस्प बात है। इस चरण में, पंजाब की राजनीतिक पार्टियाँ सिर्फ़ वोटरों को मनाने की कोशिश नहीं कर रही हैं। वे सबसे पहले अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने, उन्हें अनुशासित करने और कुछ मामलों में उन्हें फिर से एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं। पार्टियों के बड़े राष्ट्रीय नेता पंजाब का दौरा कर रहे हैं, बूथ कमेटियाँ सक्रिय हो रही हैं, रैलियाँ फिर से शुरू हो रही हैं और संगठनात्मक बैठकें तेज़ी से हो रही हैं। चुनाव में भले ही अभी कुछ समय बाकी हो, लेकिन असल चुनावी अभियान से पहले की तैयारी शुरू हो चुकी है। हो सकता है कि यही पंजाब 2027 की पहली असली लड़ाई हो। वोट वाइब के स्टेट वाइब सर्वे में इस सवाल पर लोगों से राय ली गई।सवाल के जवाब में लोगों ने अपनी राय देते हुए पंजाब में मुख्यमंत्री की पहली पसंद सीएम भगवंत मान को बताया है।
पंजाब में सीएम की कुर्सी के लिए किसकी दावेदारी कितनी मजबूत?
पंजाब में मुख्यमंत्री पद की रेस में भगवंत मान शीर्ष पर बने हुए हैं, जबकि 20.6 फीसदी समर्थन के साथ पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी दूसरे स्थान पर हैं। वहीं, शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल 11.7 फीसदी लोगों की पसंद बनकर तीसरे नंबर पर मौजूद हैं। बीजेपी नेता केवल सिंह ढिल्लों को 6.1 फीसदी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को 5.3 फीसदी लोग सीएम पद पर देखना चाहते हैं। सके अलावा, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को 1.8 फीसदी, सुखजिंदर सिंह रंधावा को 0.6 फीसदी और बीजेपी के सुनील जाखड़ को महज 0.5 फीसदी लोगों का समर्थन मिला है। दिलचस्प बात यह है कि 7 फीसदी लोग इन नेताओं से अलग किसी नए चेहरे को सूबे की कमान सौंपना चाहते हैं, जबकि 6.3 फीसदी लोगों ने इस पर कोई राय जाहिर नहीं की है।
बीजेपी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए संदेश बिल्कुल साफ़ है। BJP के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने पंजाब में दो दिन बिताए और पटियाला, बठिंडा, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर में ज़ोनल बैठकें कीं। पार्टी का कहना है कि वह सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इससे भी अहम बात यह है कि यह कवायद बूथ स्तर तक पहुँच गई है और BJP पूरे पंजाब में संगठन के ढांचे को और मज़बूत बनाने पर काम कर रही है। कई दशकों तक पंजाब में बीजेपी की राजनीतिक मौजूदगी शिरोमणि अकाली दल-बादल से गहराई से जुड़ी रही। उसकी ताकत मुख्य रूप से शहरी सीटों पर केंद्रित थी, जबकि गठबंधन में ग्रामीण और पंथिक मोर्चे की जिम्मेदारी काफी हद तक अकाली दल के पास थी। अगर बीजेपी सच में सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, तो उसे उन इलाकों में अपना संगठन खड़ा करना होगा जहां वह कभी अपने सहयोगी दल पर बहुत ज़्यादा निर्भर थी।
कांग्रेस
कई दशकों तक पंजाब में बीजेपी की राजनीतिक मौजूदगी शिरोमणि अकाली दल-बादल से गहराई से जुड़ी रही। उसकी ताकत मुख्य रूप से शहरी सीटों पर केंद्रित थी, जबकि गठबंधन में ग्रामीण और पंथिक मोर्चे की जिम्मेदारी काफी हद तक अकाली दल के पास थी। अगर बीजेपी सच में सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, तो उसे उन इलाकों में अपना संगठन खड़ा करना होगा जहां वह कभी अपने सहयोगी दल पर बहुत ज़्यादा निर्भर थी। पंजाब कांग्रेस के इंचार्ज भूपेश बघेल ने संगठन को मज़बूत करने की मुहिम के तहत कई ज़िलों का दौरा किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात की। अब एक बड़ी राजनीतिक यात्रा की योजना बनाई जा रही है, जिसमें राहुल गांधी के राज्य-व्यापी बस यात्रा में शामिल होने की उम्मीद है। शुरुआती योजना के अनुसार, वे यात्रा में शामिल होने से पहले अमृतसर में श्री दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) में मत्था टेकेंगे; इस यात्रा का पहला चरण अमृतसर से हुसैनिवाला की ओर जाएगा।
आम आदमी पार्टी
आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थिति अलग है क्योंकि वह सत्ता में है। 2022 में, बदलाव की ज़बरदस्त लहर पर सवार होकर उसने 117 में से 92 सीटें जीती थीं। 2027 में, वह बदलाव का वादा करने वाले बाहरी उम्मीदवार के तौर पर नहीं, बल्कि सत्ताधारी पार्टी के तौर पर अपने कामकाज के आधार पर वोट मांगेगी। पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया ज़िला-स्तर पर संगठन की बैठकें कर रहे हैं, जबकि सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में बूथ प्रभारियों की बैठकें करने की योजना है। इसका मकसद संगठन को मज़बूत करना और मान सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को सीधे लोगों के घरों तक पहुँचाना है।
अकाली दल
SAD के लिए 2027 का चुनाव सिर्फ़ एक और चुनाव नहीं है। यह कई सालों की चुनावी गिरावट के बाद अपनी राजनीतिक ज़मीन वापस पाने की लड़ाई है। इसकी 'पंजाब बचाओ' रैलियाँ अब एक नए चरण में पहुँच गई हैं, जिसके तहत अगस्त और सितंबर में पूरे राज्य में रैलियाँ और राजनीतिक सम्मेलन आयोजित किए जाएँगे।
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मई 2025 में भारत के साथ सैन्य टकराव के दौरान ईरान से “मजबूत समर्थन” मिलने के पाकिस्तान के दावे ने नई कूटनीतिक बहस छेड़ दी है। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने नेशनल असेंबली में लिखित जवाब में दावा किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को मजबूत समर्थन दिया था। हालांकि, इस दावे के समर्थन में इस्लामाबाद ने न तो किसी सैन्य सहायता का ब्योरा दिया है और न ही किसी ठोस राजनयिक या खुफिया सहयोग का।
भारत सरकार के सूत्रों ने पाकिस्तान के इस दावे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सूत्रों का कहना है कि “इशाक डार को कुछ भी कहने की आदत है।” सूत्रों ने सवाल उठाया कि अगर ईरान ने पाकिस्तान को वास्तव में कोई महत्वपूर्ण समर्थन दिया था तो इसका प्रमाण पाकिस्तान को देना चाहिए। साथ ही, ईरान को अपनी बात खुद कहनी चाहिए, पाकिस्तान उसका प्रवक्ता क्यों बन रहा है?
दिलचस्प बात यह है कि मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान ईरान का सार्वजनिक रुख तनाव कम करने और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील का था। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उस समय भारत और पाकिस्तान दोनों का दौरा किया था और साफ कहा था कि तेहरान के दोनों देशों के साथ मित्रवत संबंध हैं।
ऐसे में डार का दावा सवालों के घेरे में है। पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि उसके प्रधानमंत्री की मई 2025 में ईरान यात्रा का एक उद्देश्य भारत के खिलाफ युद्ध के दौरान मिले ईरानी समर्थन के लिए वहां के नेतृत्व को धन्यवाद देना था। लेकिन पाकिस्तान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह “मजबूत समर्थन” आखिर किस रूप में था।
नई दिल्ली में इस दावे को पाकिस्तान की अपनी कूटनीतिक कहानी मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भारत पहले ही यह कह चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला और पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ा।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ईरान ने पाकिस्तान का कितना साथ दिया, बल्कि यह भी है कि तेहरान की ओर से ऐसा कोई दावा क्यों नहीं आया? यदि समर्थन इतना “मजबूत” था, तो उसकी पुष्टि ईरान क्यों नहीं करता?
बहरहाल, पाकिस्तान के दावे और ईरान के उस समय के सार्वजनिक रुख के बीच यही विरोधाभास इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना रहा है।
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