Nepal Flood Updates: नेपाल में जलप्रलय से भारी तबाही; मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 177 पहुंचा, 800 से अधिक लोग अब भी लापता
नेपाल के तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही में हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, गुरुवार तक विभिन्न जिलों से 177 शव बरामद किए जा चुके हैं। इस आपदा में कई हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स, पक्के पुल और रिहायशी इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं।
भारी तबाही के बीच नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने 826 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है, जिनमें पर्यटक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
100 भारतीय सुरक्षित मिले, टिमुरे से 21 का सफल रेस्क्यू
राहत दलों और आपदा प्रबंधन विभाग के गहन खोज अभियान के बाद लापता लोगों में से 100 भारतीय नागरिकों और 25 चीनी श्रमिकों को सुरक्षित खोज लिया गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने जानकारी दी कि नेपाली सेना ने सबसे गंभीर रूप से प्रभावित टिमुरे क्षेत्र में सफल बचाव अभियान चलाकर 21 भारतीय और 95 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
इसके अलावा केरल सरकार की प्रवासी कल्याण एजेंसी नोर्का रूट्स (NORKA Roots) ने भी पुष्टि की है कि नेपाल में फंसे केरल के 53 नागरिक सुरक्षित हैं, हालांकि नेटवर्क ठप होने के कारण उनसे सीधे संपर्क में मुश्किलें आ रही हैं।
भारत सरकार ने जारी किए दूतावास के आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर
आपदा की स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के तीन विशेष आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। नेपाल में फंसे भारतीय नागरिक और उनके चिंतित परिजन +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 पर कॉल करके सीधे मदद मांग सकते हैं। दूतावास की टीमें स्थानीय प्रशासन और नेपाली सेना के साथ मिलकर लगातार भारतीयों की सुरक्षित निकासी और समन्वय में जुटी हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री बोले, हाल के समय की सबसे बड़ी आपदा
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खानाल ने इस त्रासदी पर दुख जताते हुए इसे देश के हालिया इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक करार दिया है। उन्होंने बताया कि कुछ ही घंटों में कई बस्तियां और कस्बे पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए। उन्होंने संकट की इस घड़ी में भारत सहित अन्य मित्र देशों द्वारा दी जा रही सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।
विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पोखरा, काठमांडू, चितवन, लुंबिनी और एवरेस्ट जैसे नेपाल के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र सुरक्षित हैं और वहां पर्यटन गतिविधियां सामान्य रूप से जारी हैं।
प्रभावित इलाकों में सेना का बड़ा रेस्क्यू, पीएम ने लिया जायजा
बाढ़ से सबसे अधिक शव रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी जिलों से बरामद किए गए हैं, जिनमें से ज्यादातर शव दक्षिणी मैदानी क्षेत्र चितवन से मिले हैं। लापता लोगों में 579 पर्यटकों के अलावा नेपाली सेना के 48, पुलिस के 28 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवान भी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने नुवाकोट की बिदुर नगर पालिका सहित आपदा ग्रस्त इलाकों का दौरा कर भौतिक नुकसान का जायजा लिया और अधिकारियों को राहत, पुनर्वास व जरूरी सेवाओं को जल्द बहाल करने के कड़े निर्देश दिए।
NLSIU ने रद्द किया 34वां दीक्षांत समारोह: 12 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम पर विवाद के बीच फैसला
NLSIU 34th annual convocation cancelled: नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) ने आगामी 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले अपने 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को "अनिवार्य कारणों" (Unavoidable Circumstances) का हवाला देते हुए रद्द कर दिया है। इस संबंध में 27 अगस्त को graduating स्टूडेंट्स के लिए एक नोटिस जारी किया गया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, अब समारोह आयोजित करने के बजाय गवर्निंग बॉडीज की मंजूरी मिलने के बाद स्टूडेंट्स को 'इन एब्सेंशिया' (in absentia) यानी समारोह के बिना डिग्रियां प्रदान की जाएंगी।
छात्रों को घर पर मिलेंगी डिग्रियां या कैंपस से ले सकेंगे
विश्वविद्यालय द्वारा जारी सूचना के मुताबिक, इस साल दीक्षांत समारोह तय योजना के तहत नहीं हो पाएगा। स्टूडेंट्स के पास यह विकल्प होगा कि वे अपनी डिग्रियां या तो कूरियर के जरिए अपने पते पर मंगवा सकते हैं या फिर सीधे NLSIU कैंपस से आकर खुद कलेक्ट कर सकते हैं। इसके लिए यूनिवर्सिटी जल्द ही छात्रों के साथ एक नया फॉर्म साझा करेगी, जिसमें उन्हें अपना पसंदीदा विकल्प दर्ज करना होगा।
हालांकि, यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक नोटिस में इस दीक्षांत समारोह को रद्द करने के पीछे की असली वजहों का खुलकर जिक्र नहीं किया है और केवल अपरिहार्य परिस्थितियों का हवाला दिया है।
National Law School of India University (NLSIU) Bengaluru Cancels 34th Annual Convocation, 'Degrees to be Conferred In Absentia'
— Live Law (@LiveLawIndia) August 27, 2026
The University cites 'unavoidable circumstances ' as reason for cancellation.@NLSIUofficial @SBAnlsiu pic.twitter.com/2xqGZk2alD
CJI और BCI चेयरमैन की मौजूदगी को लेकर उठा था विवाद
यह पूरा घटनाक्रम मुख्य रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के दीक्षांत समारोह में प्रस्तावित आमंत्रण को लेकर मचे विवाद के बाद सामने आया है। इस विवाद की पृष्ठभूमि हैदराबाद की नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (NALSAR) से जुड़ी है, जहां छात्रों ने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत के शामिल होने का विरोध किया था। इसके बाद BCI ने कुछ समय के लिए नालसार के 2026 के ग्रेजुएट्स को एडवोकेट के रूप में नामांकित न करने का निर्देश जारी कर दिया था, हालांकि तीखी आलोचना के बाद इस आदेश को कुछ ही घंटों के भीतर वापस ले लिया गया था।
स्टूडेंट्स और एलुमनी ने किया था विरोध
नालसार की इस घटना के बाद NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों के बीच भी चर्चाएं तेज हो गईं। छात्रों ने BCI द्वारा नालसार के स्नातकों के खिलाफ उठाए गए कदम पर सवाल उठाए और NLSIU के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत तथा BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा दोनों की संभावित उपस्थिति का विरोध किया। इस विरोध के समर्थन में एक खुला पत्र भी सामने आया था, जिस पर 165 ग्रेजुएटिंग स्टूडेंट्स, 409 मौजूदा छात्रों और 128 एलुमनी (पूर्व छात्रों) के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। इन सभी ने BCI के उस एक्शन पर जवाबदेही की मांग की थी।
2025 में मुख्य अतिथि रहे थे दोनों दिग्गज
खास बात यह है कि CJI सूर्यकांत और मनन कुमार मिश्रा दोनों ही साल 2025 के NLSIU दीक्षांत समारोह में प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। पिछले साल CJI सूर्यकांत ने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए छात्रों को डिग्रियां बांटी थीं, जबकि मनन कुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया था। हालांकि, इस बार के घटनाक्रम और विरोध-प्रदर्शनों के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने किसी भी विवाद का सीधा जिक्र न करते हुए केवल प्रशासनिक और अपरिहार्य कारणों से दीक्षांत समारोह को रद्द करने का फैसला लिया है।
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