Meta 18 अरब डॉलर चुकाने को तैयार, बच्चों और युवाओं के लिए की थी ये 'साजिश'
Meta Case: अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी मेटा को बड़ा झटका लगा है. अमेरिका में चल रहे मुकदमों को खत्म करने के लिए मेटा प्लेटफॉर्म्स ने बड़ा समझौता किया है. कंपनी अगले 10 साल में करीब 18 अरब डॉलर तक का भुगतान करेगी. इसके साथ ही किशोरों के फेसबुक और इंस्टाग्राम इस्तेमाल पर कई तरह की पाबंदियां लगाई जाएंगी.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मेटा पर बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया की लत लगाने का आऱोप था. कंपनी का समझौता अमेरिका के लगभग सभी राज्यों के साथ हुआ है. राज्यों का आरोप था कि मेटा ने फेसबुक और इंस्टाग्राम को इस तरह डिजाइन किया कि बच्चे और किशोर इन प्लेटफॉर्म के आदी हो जाएं. कंपनी पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर लोगों को गुमराह करने के भी आरोप लगे थे.
200 अरब डॉलर के जुर्माना की हुई थी मांग
रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को घोषित इस समझौते के बाद बच्चों को मेटा के उत्पादों से हुए कथित नुकसान और उनकी सुरक्षा से जुड़े मामलों को खत्म करने का रास्ता साफ हो गया है. कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी समेत चार राज्यों की ओर से मेटा पर करीब 200 अरब डॉलर के नागरिक दंड की मांग किए जाने की उम्मीद थी. समझौते के तहत मेटा को किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को सीमित करने और उनकी सुरक्षा से जुड़े उपायों को मजबूत करने होंगे.
अब मेटा में क्या होंगे बदलाव?
इस समझौते से मेटा के काम करने के तरीके में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन यह तय करेगा कि कंपनी बच्चों और युवाओं को अपनी सेवाएं किस तरह देगी. यह समझौता सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ चल रहे हजारों दूसरे मुकदमों को निपटाने का रास्ता भी दिखा सकता है. दुनियाभर की सरकारें बच्चों को ऑनलाइन नुकसानदायक कंटेंट से बचाने के लिए नए नियम बना रही हैं. इनमें ऑस्ट्रेलिया का 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध भी शामिल है.
नेपाल बाढ़ के बाद कितने भारतीय लापता, कितनों का हुआ रेस्क्यू; MEA ने दी जानकारी
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों को लेकर चिंता बढ़ गई है. बाढ़ और अचानक बढ़े जलस्तर के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक और यात्री प्रभावित हुए हैं. नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ के बाद कई विदेशी यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई. इनमें कई भारतीय भी शामिल हैं. ऐसे में हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि आपदा के 24 घंटे में अब तक कितने भारतीयों का रेस्क्यू कर लिया गया है और अभी कितने भारतीय यात्री लापता हैं. इन सवालों के जवाब एमईए की ओर से दिए गए हैं.
288 भारतीय लापता, 21 का हुआ रेस्क्यू
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना है. राहत और बचाव एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तलाश अभियान चला रही हैं. इस बीच अब तक 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार 27 अगस्त को स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों तक पहुंचने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि दोपहर 1 बजे तक 21 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया जा चुका था.
नेपाल में बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है. तेज बहाव और खराब मौसम के चलते प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना भी राहत टीमों के लिए चुनौती बना हुआ है. ऐसे में भारतीय नागरिकों की पहचान और उनकी लोकेशन का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं.
EAM @DrSJaishankar held a review meeting with Foreign Secretary, MEA officials and our Ambassadors in Kathmandu and Beijing on the Nepal flood disaster. https://t.co/xPAsjrTNU8
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) August 27, 2026
बंगाल और केरल के यात्री भी प्रभावित
रणधीर जायसवाल ने बताया कि पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिक सम्राट ट्रैवल के माध्यम से नेपाल की यात्रा पर गए थे. इसके अलावा केरल के 33 नागरिकों का एक समूह भी नेपाल में मौजूद था. सरकार इन दोनों समूहों के लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है.
विदेश मंत्रालय ने प्रभावित भारतीयों और उनके परिवारों के बीच संपर्क बनाए रखने पर भी जोर दिया है. यात्रियों की जानकारी जुटाकर उनकी वर्तमान स्थिति और लोकेशन का पता लगाने का प्रयास जारी है.
#WATCH | India expands relief efforts for Nepal
— DD India (@DDIndialive) August 27, 2026
India has sent 47.5 tonnes of emergency relief supplies to Kathmandu through two IAF flights, including tents, blankets, hygiene kits, medicines, food, pumps and power generators.
The @MEAIndia has set up a 24x7 control room,… pic.twitter.com/jvQ0HHqD4l
मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय भी फंसे
नेपाल की बाढ़ के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीयों को लेकर भी चिंता सामने आई है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, कई भारतीय यात्री फिलहाल चीन की तरफ फंसे हुए हैं. करीब 200 भारतीय नागरिकों ने मदद के लिए संपर्क किया है.
जायसवाल ने बताया कि चीन में स्थित भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इन नागरिकों को सुरक्षित निकालने की दिशा में काम कर रहा है. यानी नेपाल के अलावा चीन के क्षेत्र में फंसे भारतीय यात्रियों की मदद के लिए भी भारत सरकार सक्रिय है.
ईशा फाउंडेशन के लोग भी प्रभावित
विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि ईशा फाउंडेशन से जुड़े कुछ लोग भी प्रभावित क्षेत्र में फंसे हुए हैं. सरकार उनकी स्थिति की जानकारी जुटाने और आवश्यक सहायता पहुंचाने के प्रयास कर रही है.
नेपाल और चीन दोनों जगहों पर अलग-अलग परिस्थितियों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना फिलहाल प्राथमिकता बना हुआ है. सरकार स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय कर रही है.
परिवारों की बढ़ी चिंता
बड़ी संख्या में भारतीयों के लापता होने की सूचना के बाद उनके परिवारों की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है. हालांकि 21 लोगों का रेस्क्यू होने से राहत की उम्मीद भी जगी है. अधिकारियों का कहना है कि बचाव अभियान लगातार जारी है और प्रभावित इलाकों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
फिलहाल सरकार का मुख्य फोकस लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाने, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और नेपाल तथा चीन में फंसे यात्रियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर है. अगले कुछ घंटे रेस्क्यू अभियान के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं.
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