भर्ती प्रक्रिया में एआई का तेजी से बढ़ रहा प्रभाव, 86 प्रतिशत भारतीय संगठनों ने माना बदलाव ला रही है नई तकनीक: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में भर्ती प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एजेंटिक एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 86 प्रतिशत भारतीय संगठनों का मानना है कि एआई उनकी भर्ती प्रक्रिया को बदल रही है। रिज्यूमे की जांच, उम्मीदवारों का मूल्यांकन और भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों के साथ संवाद जैसे क्षेत्र एआई के प्रमुख उपयोग के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
डेलॉइट इंडिया की कैंपस वर्कफोर्स ट्रेंड्स 2026 रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कैंपस भर्ती अब पहले की तुलना में अधिक रणनीतिक, कौशल-आधारित और प्रौद्योगिकी संचालित हो गई है। कंपनियां शुरुआती करियर वाले प्रतिभाशाली युवाओं को आकर्षित करने के लिए अधिक निवेश कर रही हैं और इंटर्नशिप से स्थायी नौकरी तक पहुंचाने वाले कार्यक्रमों को मजबूत बना रही हैं।
अध्ययन में पाया गया कि भर्ती बजट में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि 80 प्रतिशत संगठनों के पास अब कैंपस भर्ती के लिए समर्पित टीमें हैं। इससे स्पष्ट है कि कंपनियां भविष्य की कार्यबल तैयार करने के लिए संस्थागत स्तर पर निवेश बढ़ा रही हैं।
एआई के उपयोग में रिज्यूमे स्क्रीनिंग सबसे प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है, जहां 72 प्रतिशत कंपनियां इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके अलावा, 35 प्रतिशत संगठनों का कहना है कि एआई के बढ़ते उपयोग के चलते नई शुरुआती स्तर की नौकरियां (एंट्री-लेवल पद) और नए कौशलों की मांग पैदा हो रही है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025 में 21 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट के अनुसार, एआई और डेटा से जुड़े कौशल रखने वाले उम्मीदवारों को भर्ती के दौरान 20 से 25 प्रतिशत तक अधिक वेतन मिलने की संभावना है। वहीं विश्लेषणात्मक सोच और समस्या समाधान क्षमता जैसे कौशल रखने वाले उम्मीदवारों को भी 10 से 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त वेतन प्रीमियम मिल रहा है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि इंटर्नशिप अब स्थायी नौकरी का अधिक प्रभावी माध्यम बन रही है। विभिन्न शैक्षणिक श्रेणियों में प्री-प्लेसमेंट ऑफर में रूपांतरण की दर बेहतर हुई है। कंपनियों के अनुसार, किसी इंटर्न को स्थायी नौकरी मिलने की संभावना का सबसे बड़ा आधार उसकी व्यवहारिक दक्षता (75 प्रतिशत) और सीखने की क्षमता (72 प्रतिशत) है।
बेहतर प्रतिभा चयन और कौशल मिलान के कारण शुरुआती स्तर पर नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की संख्या में भी कमी आई है। शीर्ष संस्थानों और टियर-1 कॉलेजों से भर्ती किए गए कर्मचारियों में शुरुआती त्याग दर 18 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह गई है।
रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2022 से 2026 के बीच वेतन वृद्धि की औसत वार्षिक दर 2 से 4 प्रतिशत रही है। हालांकि अब वेतन निर्धारण में संस्थान की श्रेणी, विशेषज्ञता और महत्वपूर्ण तकनीकी कौशल की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
लैंगिक विविधता के मोर्चे पर भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2026 के कैंपस भर्ती लक्ष्यों में महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो कार्यस्थलों पर बढ़ती समावेशिता को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, संगठनों का फोकस अब केवल बड़ी संख्या में भर्ती करने पर नहीं है, बल्कि ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को शामिल करने पर है जो भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई-आधारित कार्य वातावरण में सफलता हासिल कर सकें। इसी कारण कंपनियां एआई, डेटा विश्लेषण, समस्या समाधान और अनुकूलन क्षमता जैसे कौशलों को तेजी से प्राथमिकता दे रही हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
2026 की दूसरी छमाही की शुरुआत में भारत में कई आर्थिक संकेतों ने दिखाई मजबूती : रिपोर्ट
मुंबई, 27 अगस्त (आईएएनएस)। भारत ने 2026 की छमाही की शुरुआत कई सकारात्मक आर्थिक संकेतों के साथ की है, जिसमें विदेशी निवेशकों की खरीदारी, मानसून की रिकवरी, घरेलू वृद्धि और कंपनियों की आय का मजबूत होना शामिल हैं। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
पीएल वेल्थ के ताजा अगस्त 2026 के मार्केट आउटलुक में बताया गया कि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में अनिश्चितता से बाजारों में व्यापक स्तर पर तेजी आने की संभावना कम है।
पीएल वेल्थ के सीईओ इंदरबीर जॉली ने कहा, हमारा मानना है कि निवेशकों के लिए यह समय सोच-समझकर निवेश करने, क्वालिटी पर ध्यान देने और किस्तों में पैसा लगाने का है। भारत को लेकर हमारा लंबे समय का भरोसा बना हुआ है, जिसे घरेलू निवेश, वित्तीय क्षेत्र के विस्तार, डेमोग्राफिक्स और देश में स्ट्रक्चरल ग्रोथ के मौकों का समर्थन मिल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की घरेलू विकास की गति मजबूत बनी हुई है। इसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के नेट खरीदार के तौर पर लौटने, बेहतर होते मानसून और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजों के सीजन की आम तौर पर स्थिर शुरुआत से सहारा मिल रहा है।
भारत की वित्त वर्ष 2026 की जीडीपी विकास दर का शुरुआती अनुमान 7.7 प्रतिशत है, जबकि आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए विकास दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत लगाया है।
जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां वृद्धि के दायरे में रहीं, जिसमें पीएमआई क्रमशः 53.9 और 53.1 रहा।
बैंक क्रेडिट ग्रोथ सालाना आधार पर बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई, जिससे जून 2026 तक कुल बकाया क्रेडिट 219.3 ट्रिलियन रुपए तक पहुंच गया, जबकि कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 75.2 प्रतिशत के अच्छे स्तर पर बना रहा, जो इसके लंबे समय के औसत से अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई पर नजर रखना जरूरी है। जुलाई में सीपीआई बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गया, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से अधिक है। इसकी मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ना है। वहीं, आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए सीपीआई का अनुमान 5.1 प्रतिशत पर बनाए रखा है, जिसमें तीसरी तिमाही में इसके 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।
हालांकि, विदेशी निवेशकों का निवेश एक सकारात्मक संकेत रहा। साल की पहली छमाही में लगातार इक्विटी की निकासी के बाद, जुलाई में एफपीआई नेट खरीदार बन गए और लगभग 20,200 करोड़ रुपए का इक्विटी निवेश दर्ज किया गया, जो फरवरी के बाद से पहला सकारात्मक महीना था।
रिपोर्ट में मानसून की स्थितियों में मजबूत सुधार का भी जिक्र किया गया है। जुलाई में बारिश सामान्य से लगभग 1 प्रतिशत अधिक रही, जिससे जून-जुलाई की कुल कमी कम होकर लंबे समय के औसत से लगभग 13 प्रतिशत नीचे आ गई।
बाहरी दबावों के बावजूद भारत का मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल काफी मजबूत बना हुआ है। बाहरी मोर्चे पर, व्यापार से जुड़ी गतिविधियां मध्यम अवधि के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई हैं।
--आईएएनएस
एबीएस
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