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Nepal Flood Crisis: बेंगलुरु के 8 नागरिक फंसे, Deputy CM बोले- खराब Weather के बीच शुरू हुआ रेस्क्यू

कर्नाटक के डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर ने गुरुवार को पुष्टि की कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ और खराब मौसम की वजह से कर्नाटक के आठ नागरिक वहां फंस गए हैं। ANI से बात करते हुए, जी. परमेश्वर ने नेपाल बाढ़ में फंसे नागरिकों की संख्या की पुष्टि की और कहा हमें मिली जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक के 8 लोग नेपाल बाढ़ में फंसे हुए हैं। हम उनकी डिटेल्स और दूसरी जानकारी जुटा रहे हैं।" उन्होंने फंसे हुए नागरिकों से संपर्क करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में भी बताया।  परमेश्वर ने कहा कि हमें मिली जानकारी के मुताबिक, बेंगलुरु के 8 लोग नेपाल में फंसे हुए हैं।

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हम उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। हम अपने एक अधिकारी को काठमांडू भेजेंगे। राष्ट्रीय अधिकारियों से आर्थिक मदद पाने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा  कि हम राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति से निपटेंगे। हम भारत सरकार से फंड मांग रहे हैं।" इस बीच, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर कर्नाटक के नागरिकों को हर संभव मदद दिलाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, "हमारे लोगों की सुरक्षा सबसे पहले है। मेरी संवेदनाएं नेपाल या तिब्बत में फंसे हर कन्नड़ व्यक्ति और उनके परिवारों के साथ हैं जो बेसब्री से अपनों का इंतज़ार कर रहे हैं। हम प्रभावित लोगों तक हर संभव मदद पहुँचाने के लिए विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशनों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। अगर आप या आपका कोई परिचित फंसा हुआ है, तो कृपया Google फ़ॉर्म के ज़रिए जानकारी दें या SEOC से 1070 / 080-22253707 पर संपर्क करें।

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भोटे कोशी नदी में आई भयानक बाढ़ के बाद ये बातें सामने आई हैं। इस बाढ़ से कई ज़िलों में भारी तबाही हुई है, जिससे बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं, बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा है और लोगों की जान भी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियाँ, स्थानीय अधिकारी और स्वास्थ्य सेवाएँ चौबीसों घंटे खोज, बचाव, लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत कार्यों में पूरी तरह से जुटी हुई हैं, साथ ही नदी के निचले इलाकों में बाढ़ की लगातार निगरानी भी की जा रही है। गुरुवार को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि नेपाल में आई बाढ़ में लगभग 130 से 140 भारतीयों के लापता होने की खबर है, हालाँकि इन आँकड़ों की अभी पुष्टि होनी बाकी है। मीडिया से बात करते हुए खड़गे ने कहा कि राज्य सरकार विदेश मंत्रालय (MEA) के संपर्क में है और नेपाल में फँसे हो सकने वाले कर्नाटक के लोगों की जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है।

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Kushinagar में Narayani नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंची, प्रशासन अलर्ट पर

नेपाल में आयी विनाशकारी बाढ़ के बाद वाल्मीकि गंडक बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से कुशीनगर और महराजगंज में नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और जिला प्रशासन बाढ़ की आशंका को देखते हुए तैयारियों में जुट गया है। नेपाल-चीन सरहद के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से एक नदी का रास्ता रुक गया जिससे नेपाल में बाढ़ आ गई। नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के मुताबिक इस बाढ़ से कई जिले प्रभावित हुए हैं और इसमें 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी तथा लगभग 826 लोग लापता हैं।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक लापता लोगों में लगभग 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। नेपाल में आयी इस विनाशकारी बाढ़ के बाद बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और महराजगंज में नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका गहरा गयी है। कुशीनगर जिला प्रशासन के प्रवक्ता ने बृहस्पतिवार को बताया कि नेपाल में आयी प्रलयंकारी बाढ़ के बाद वहां स्थित वाल्मीकि गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं, नतीजतन लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से कुशीनगर में भी नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है और सुबह आठ बजे तक वह खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका था।

उन्होंने बताया कि संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम को भी मौके पर तैनात कर दिया गया है और तमाम टीमों को राहत एवं बचाव के जरूरी उपकरणों के साथ अलर्ट मोड में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्य शुरू करने में किसी तरह की देर नहीं होगी। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने बताया कि नारायणी नदी में संभावित बाढ को लेकर पुलिस प्रशासन को अलर्ट किया गया है।

बड़ी गंडक नदी के सटे चार थानों में शामिल खड्डा, हनुमानंगज, तरयासुजान और सेवरही के पुलिस कर्मियों को और बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका वाले सात गांवों के लोगों को अलर्ट किया गया है। नदी के दूसरी ओर रेत वाले क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को आशंका है कि अगर वाल्मीकि—गंडक बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया और नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा तो निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है। हालांकि, प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है।

इस बीच, बुधवार को नेपाल में विनाशकारी बाढ़ आने के बाद से नारायणी नदी के भी रौद्र रूप से लेने की आशंका में मरचहवा गांव के दक्षिण टोला में लोग अंधेरे में घरों से बाहर बैठे रहे। ग्रामीणों के मुताबिक चारों तरफ पानी भर जाने पर दक्षिण टोला का सड़क संपर्क पूरी तरह कट जाता है, ऐसे में रात के समय बच्चों, महिलाओं और पशुओं को लेकर बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा लिहाजा उन्हें रात किसी तरह जाग कर गुजारी है। महराजगंज में, अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारियों को संवेदनशील नदी वाले इलाकों में तैनात किया गया है और वे गंडक, दरजनिया, टेल फॉल और नेपाल से पानी पाने वाली अन्य नदियों और जल-धाराओं के जल-स्तर और बहाव पर नजर रख रहे हैं।

अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है ताकि जल-स्तर में अचानक बढ़ोत्तरी होने पर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की गई है। कुमार ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह तैयार है और जलस्तर और नदियों के बहाव की लगातार निगरानी की जा रही है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बेवजह नदियों के पास न जाएं, आधिकारिक सलाह का पालन करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

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  Sports

Rishabh Pant के 50 Test के बाद Ravichandran Ashwin की दो टूक सलाह: अब टीम की जरूरत के हिसाब से खेलें

रिषभ पंत ने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 168 रन बनाकर दो अर्धशतक जरूर लगाए, लेकिन उनके प्रदर्शन को लेकर रविचंद्रन अश्विन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर का मानना है कि पंत को अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ मैच की स्थिति को समझने और टीम की जरूरत के मुताबिक फैसले लेने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अश्विन ने अपने कार्यक्रम ‘अश की बात’ में पंत की बल्लेबाजी पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों के आधार पर पंत के प्रदर्शन का आकलन करना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक, पंत जिस तरह के जोखिम लेते हैं, उसमें यह समझना जरूरी है कि कब आक्रमण करना है और कब विकेट बचाकर खेलना है।

पंत की आक्रामक शैली पिछले कुछ महीनों से चर्चा का विषय रही है। उनके प्रशंसक अक्सर उनकी इसी बेखौफ बल्लेबाजी को उनकी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं, क्योंकि वह मुश्किल परिस्थितियों में भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, अश्विन का कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में हर परिस्थिति में एक ही अंदाज से बल्लेबाजी करना टीम के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

उन्होंने पिछले साल गुवाहाटी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पंत के आउट होने का उदाहरण भी दिया। उस मुकाबले में शुभमन गिल की गैरमौजूदगी में पंत भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। उन्होंने मार्को यानसन की गेंद पर आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर के हाथों में चली गई।

अश्विन ने साफ किया कि उन्हें पंत के आक्रामक खेल से समस्या नहीं है। उनकी आपत्ति उन मौकों को लेकर है जब मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण स्थिति में हो और बल्लेबाज अनावश्यक जोखिम उठा ले। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सहवाग और एडम गिलक्रिस्ट जैसे बल्लेबाज भी आक्रामक क्रिकेट खेलते थे, लेकिन मैच की स्थिति को नजरअंदाज करके इस तरह के जोखिम नहीं लेते थे।

गौरतलब है कि पंत अब तक 50 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। अश्विन के अनुसार, इतने अनुभव के बाद उनसे ज्यादा जिम्मेदारी की उम्मीद की जानी चाहिए। उन्होंने पंत को किसी विशेष प्रतिभा के नाम पर अतिरिक्त छूट देने के विचार पर भी सवाल उठाया। अश्विन का कहना है कि यशस्वी जायसवाल जैसे युवा खिलाड़ियों में भी असाधारण क्षमता है, इसलिए सिर्फ विशेष प्रतिभा होने के आधार पर किसी खिलाड़ी को आलोचना से बचाना उचित नहीं है।

अश्विन ने सिडनी और ब्रिस्बेन में पंत की शानदार पारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंत ने वहां बेहतरीन पारियां खेलीं, लेकिन टेस्ट जीतने के लिए केवल एक खिलाड़ी का प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होता। वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा था। उनके मुताबिक, टेस्ट मैच को जीत तक पहुंचाने के लिए 11 खिलाड़ियों का योगदान चाहिए, जबकि एक गलत फैसला पूरे मैच को हाथ से निकाल सकता है।

बता दें कि पंत फिलहाल भारत की एकदिवसीय और टी20 टीम से बाहर हैं और मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में ही भारतीय टीम का हिस्सा हैं। अश्विन मानते हैं कि अगर पंत अपनी बल्लेबाजी में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव लाते हैं तो उनके लिए सीमित ओवरों की टीम में वापसी का रास्ता भी खुल सकता है।

अश्विन ने यहां तक कहा कि जिस दिन पंत को उनकी कमियों के बारे में साफ और ईमानदार प्रतिक्रिया मिलने लगेगी, वह तीनों प्रारूपों में दोबारा भारत के लिए खेलने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। उनके मुताबिक, पंत की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन अब उनके खेल में जिम्मेदारी और बेहतर निर्णय लेने की जरूरत है। यही बदलाव उन्हें एक शानदार टेस्ट बल्लेबाज से फिर से भारत के तीनों प्रारूपों के भरोसेमंद खिलाड़ी में बदल सकता है।
Fri, 28 Aug 2026 18:54:00 +0530

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