Nepal Flood Update: नेपाल की तबाही पर Exclusive Ground Report, जानिए अब कैसे हैं वहां के हालात?
नेपाल में ग्राउंड जीरो से न्यूज नेशन की ओर से वरिष्ठ संवाददाता आमिर हुसैन ने यहां पर आई बाढ़ के बाद मची तबाही को लेकर विस्तृत जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि यहां पर हालात बहुत ज्यादा बेहतर नहीं है क्योंकि यह त्रासदी चली तो गई है लेकिन त्रासदी के निशान अभी भी बाकी है और बहुत कुछ मलबे में तब्दील हो चुके थोड़े बहुत नेटवर्क आ रहे हैं लेकिन जिस जगह पर त्रासदी आई थी उस जगह पर बिल्कुल भी नेटवर्क कनेक्शन नहीं है इसलिए थोड़ा सा आगे आकर मुझे आपसे पूरी बात बतानी पड़ रही है. थोड़ा सा मैं कहूंगा अपने वीजे से घुमा करके दिखाएं कि किस तरह के की लोकेशन है. ये नवाकोट का इलाका है और नवाकोट के इस इलाके में जो आप पहाड़ देख रहे हैं, दरअसल ये वो पहाड़ है जहां वो एक तरह से आपदा बन के आई और वो खासतौर पे पूरे इस इलाके को बहा के ले गई.
बड़ी संख्या में लोग गायब हो गए
अभी जो ये मकान आप देख रहे हैं, इसके ठीक आगे यहां से करीब 150 मीटर की दूरी पर ही वहां पर इस तरह की तस्वीरें इस तरह की त्रासदी है या ये कहे कि इस मकान के पीछे इस तरह की त्रासदी इस तरह का मंजर है कि आपको त्रिशुली नदी जो दिखाई देगी वो अपना रॉक रूप लिए हुए में बहुत सारे लोग मिसिंग है. जिनकी तलाश की जा रही है जो स्थानीय लोग हैं. उनका कहना है कि बड़ी संख्या में लोग गायब हो गए.
नेपाल में बर्बादी...जगह-जगह तबाही
— News Nation (@NewsNationTV) August 27, 2026
➡️देखिए न्यूज़ नेशन संवाददाता की एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट #NepalFlood #FlashFlood #NewsNation @nn_aamir pic.twitter.com/IRVyMyKeC2
त्रिशुली नदी में भयंकर मलवा
अब टीम नवाकोट भी आ चुकी है. पोस्ट के क्षेत्र अगर आप 100 से 150 मीटर आगे जाएंगे तो जो पहाड़ियां दिखाई दे रही हैं सामने इसी के नीचे से त्रिशुल्ली नदी बह रही है और उसी त्रिशुली नदी में भयंकर मलवा जो है वो पड़ा हुआ है. यह सब मलवे में तब्दील हो चुका है. यहां पर आप देखिए ये वो इलाके हैं जो थोड़ा सा ऊंचाई पर है इसलिए यहां के लोग बच गए. यह जो आप देख रहे हैं, यह थोड़ा सा ऊंचाई पर है. यहां के लोग इसलिए बच गए. लेकिन त्रिशुली नदी के आसपास जो बसे हुए लोग थे, वह पूरी तरीके से गायब हो चुके हैं. ऐसा लग ही नहीं रहा है कि कभी वहां पर कोई मकान या दुकान या कोई सड़क हुआ करती थी, वो पूरी तरीके से गायब हो चुकी है. अभी फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है.
नेपाल में विनाशकारी सैलाब में एक हजार से ज्यादा लापता#NepalFlood #FlashFlood #NewsNation pic.twitter.com/PBaUx21TiF
— News Nation (@NewsNationTV) August 27, 2026
900 से 1000 के आसपास लापता
लगातार हेलीकॉप्टर्स की बूंद सुनाई दे रही है. सरकार कह रही है कि जहां-जहां पर लोग फंसे हुए हैं. जैसे पहाड़ों पर बड़ी संख्या में लोग चले गए. जब इस तरह का सैलाब आया तो लोगों ने पहाड़ पर पहाड़ को अपना आशियाना बनाया वहां चले गए और वहां पर अब जो हेलीकॉप्टर से जो फंसा हुआ होगा उसको निकालने की कवायद चल रही है. सरकार का कहना है जो नेपाल सरकार का कि आखिरी सांस भी अगर चल रही होगी तो उसको हम बचा के निकालेंगे.
अभी फिलहाल करीब 900 से 1000 के आसपास लापता लोग बताए जा रहे हैं लेकिन आधिकारिक आंकड़ा जो है कुछ और कह रहा है. 195 के करीब एक आंकड़ा आया था मौत का. लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन किया जा रहा है. अलग-अलग जगहों पर हेलीकॉप्टर्स की मदद से जो है जो खाने पीने की चीजें हैं वो पहुंचाई जा रही है ताकि लोग जो है वो कम से कम सर्वाइव कर सके कुछ समय तक जब तक उनको निकाला नहीं जा रहा.
UPSC रिजल्ट लिस्ट से बाहर हुए लाखों युवाओं का दर्द:'वो सुबह हमीं से आएगी' में दिखाई असफलता के बाद के अनकहे संघर्ष की कहानी
1990 के दशक की दिल्ली की पृष्ठभूमि पर आधारित नाटक 'वो सुबह हमीं से आएगी' में सिविल सेवा (UPSC) की तैयारी, प्रेम और सामाजिक न्याय के मुद्दों को मंच पर प्रस्तुत किया गया है। हाल ही में इस नाटक की प्रस्तुति दिल्ली में की गई। इससे पहले नाटक का मंचन मुंबई में भी किया जा चुका है। लेखक दिनेश गौतम के इस नाटक में मुख्य किरदार अजय की भूमिका एक्टर इमरान जाहिद ने निभाई है, जबकि साक्षी सिंह ने कविता का रोल किया है। नाटक देखने पहुंचे दिल्ली पुलिस के डीसीपी विपुल अनेकांत ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्तुति में अपने छात्र जीवन को देखा। यह नाटक सिर्फ सफलता ही नहीं, बल्कि उन असफल अभ्यर्थियों के संघर्ष को भी सामने लाता है जो अंतिम सूची तक नहीं पहुंच पाते। 1990 के दशक की दिल्ली और यूपीएससी की तैयारी नाटक की कहानी साधारण सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आए युवा अजय के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सिविल सेवा में जाने का सपना लेकर दिल्ली आता है। यह उस दौर की बात है जब स्मार्टफोन और सोशल मीडिया नहीं थे और सूचनाओं के लिए किताबें, अखबार और चिट्ठियां ही मुख्य जरिया थीं। अजय के पास मेहनत करने की क्षमता है, लेकिन धीरे-धीरे उसे एहसास होता है कि प्रतियोगिता में शामिल सभी लोगों की शुरुआत एक ही जगह से नहीं हुई है। इसी संघर्ष के बीच कविता के साथ उसका रिश्ता कहानी को भावनात्मक आधार देता है। शुरुआती रेखा और फिनिशिंग लाइन का फर्क नाटक में 'स्टार्टिंग लाइन और फिनिशिंग लाइन' के जरिए बड़ा सामाजिक सवाल उठाया गया है। परीक्षा में सभी अभ्यर्थियों का लक्ष्य एक होता है, लेकिन किसी के पास बेहतर संसाधन, आर्थिक सुरक्षा और मार्गदर्शन मौजूद है, तो किसी को इन्हीं चीजों के लिए कई अतिरिक्त लड़ाइयां लड़नी पड़ती हैं। लेखक दिनेश गौतम का कहना है कि यह नाटक किसी राजनीतिक भाषण की तरह फैसला सुनाने के बजाय दर्शक के सामने एक मानवीय परिस्थिति रखता है, ताकि लोग समझ सकें कि असली समानता क्या है। असफल उम्मीदवारों के दर्द को भी मिली आवाज अजय का किरदार निभाने वाले एक्टर इमरान जाहिद का कहना है कि अजय सिर्फ एक काल्पनिक पात्र नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं का चेहरा है जो घरों से सपना लेकर निकलते हैं। उन्होंने कहा कि हम अक्सर केवल सफल लोगों की कहानियां सुनते हैं, लेकिन उन हजारों युवाओं की कहानी कोई नहीं सुनाता जो तैयारी में अपनी जिंदगी के कई साल लगा देते हैं और अंतिम सूची तक नहीं पहुंच पाते। नाटक उन अनसुनी उम्मीदों को भी मंच पर जगह देने की कोशिश करता है। डीसीपी विपुल अनेकांत ने कहा- अजय में खुद को देखा दिल्ली में नाटक की प्रस्तुति देखने पहुंचे डीसीपी विपुल अनेकांत ने इसे एक बेहद मजबूत और संवेदनशील मंचन बताया। उन्होंने कहा कि यह नाटक ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले अभ्यर्थी की कठिन यात्रा के जरिए सामाजिक असमानता और समान अवसर जैसे विचारों को उठाता है। प्रस्तुति के बाद अपनी प्रतिक्रिया में डीसीपी ने कहा, "मैंने अजय में खुद को देखा।" उनका कहना था कि अजय का किरदार हर उस व्यक्ति से जुड़ता है जिसने अपने जीवन में संघर्ष किया है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation






