कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) [CPI(M)] की तमिलनाडु राज्य समिति ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य के मुख्य सचिव एम. साई कुमार के ख़िलाफ़ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उस विवादित सरकारी सर्कुलर को पूरी तरह वापस लेने की मांग की है, जिसका मकसद छात्रों को वामपंथी पार्टियों के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकना था। 26 अगस्त के पत्र में CPI(M) के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद, स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस और ज़िला प्रशासन को निर्देश जारी किए गए थे कि वे आपस में तालमेल बिठाएं और छात्रों को वामपंथी आंदोलनों और करप्पनपूची जनता पार्टी संगठनों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकें। बताया गया है कि इस निर्देश को "टॉप प्रायोरिटी" (सबसे ज़्यादा प्राथमिकता) और "इमीडिएट" (तत्काल) श्रेणी में रखा गया था, जिसके तहत संबंधित विभागों को 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' (Action Taken Report) सौंपनी थी।
CPI(M) ने इस सर्कुलर की निंदा करते हुए कहा कि यह कदम असंवैधानिक और गैर-कानूनी है, और यह राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने और वामपंथी आंदोलनों को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश है। पार्टी ने कहा कि विधानसभा में उच्च शिक्षा मंत्री की ओर से मांगी गई माफ़ी काफी नहीं है और इस फैसले के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों की प्रशासनिक जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
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