1990 की दिल्ली पर बना 'वो सुबह हमीं से आएगी':UPSC अभ्यर्थियों के संघर्ष की कहानी; इमरान जाहिद बोले- असफलता की कहानियां भी जरूरी
1990 के दशक की दिल्ली की पृष्ठभूमि पर आधारित नाटक 'वो सुबह हमीं से आएगी' में सिविल सेवा (UPSC) की तैयारी, प्रेम और सामाजिक न्याय के मुद्दों को मंच पर प्रस्तुत किया गया है। हाल ही में इस नाटक की प्रस्तुति दिल्ली में की गई। इससे पहले नाटक का मंचन मुंबई में भी किया जा चुका है। लेखक दिनेश गौतम के इस नाटक में मुख्य किरदार अजय की भूमिका एक्टर इमरान जाहिद ने निभाई है, जबकि साक्षी सिंह ने कविता का रोल किया है। नाटक देखने पहुंचे दिल्ली पुलिस के डीसीपी विपुल अनेकांत ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्तुति में अपने छात्र जीवन को देखा। यह नाटक सिर्फ सफलता ही नहीं, बल्कि उन असफल अभ्यर्थियों के संघर्ष को भी सामने लाता है जो अंतिम सूची तक नहीं पहुंच पाते। 1990 के दशक की दिल्ली और यूपीएससी की तैयारी नाटक की कहानी साधारण सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आए युवा अजय के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सिविल सेवा में जाने का सपना लेकर दिल्ली आता है। यह उस दौर की बात है जब स्मार्टफोन और सोशल मीडिया नहीं थे और सूचनाओं के लिए किताबें, अखबार और चिट्ठियां ही मुख्य जरिया थीं। अजय के पास मेहनत करने की क्षमता है, लेकिन धीरे-धीरे उसे एहसास होता है कि प्रतियोगिता में शामिल सभी लोगों की शुरुआत एक ही जगह से नहीं हुई है। इसी संघर्ष के बीच कविता के साथ उसका रिश्ता कहानी को भावनात्मक आधार देता है। शुरुआती रेखा और फिनिशिंग लाइन का फर्क नाटक में 'स्टार्टिंग लाइन और फिनिशिंग लाइन' के जरिए बड़ा सामाजिक सवाल उठाया गया है। परीक्षा में सभी अभ्यर्थियों का लक्ष्य एक होता है, लेकिन किसी के पास बेहतर संसाधन, आर्थिक सुरक्षा और मार्गदर्शन मौजूद है, तो किसी को इन्हीं चीजों के लिए कई अतिरिक्त लड़ाइयां लड़नी पड़ती हैं। लेखक दिनेश गौतम का कहना है कि यह नाटक किसी राजनीतिक भाषण की तरह फैसला सुनाने के बजाय दर्शक के सामने एक मानवीय परिस्थिति रखता है, ताकि लोग समझ सकें कि असली समानता क्या है। असफल उम्मीदवारों के दर्द को भी मिली आवाज अजय का किरदार निभाने वाले एक्टर इमरान जाहिद का कहना है कि अजय सिर्फ एक काल्पनिक पात्र नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं का चेहरा है जो घरों से सपना लेकर निकलते हैं। उन्होंने कहा कि हम अक्सर केवल सफल लोगों की कहानियां सुनते हैं, लेकिन उन हजारों युवाओं की कहानी कोई नहीं सुनाता जो तैयारी में अपनी जिंदगी के कई साल लगा देते हैं और अंतिम सूची तक नहीं पहुंच पाते। नाटक उन अनसुनी उम्मीदों को भी मंच पर जगह देने की कोशिश करता है। डीसीपी विपुल अनेकांत ने कहा- अजय में खुद को देखा दिल्ली में नाटक की प्रस्तुति देखने पहुंचे डीसीपी विपुल अनेकांत ने इसे एक बेहद मजबूत और संवेदनशील मंचन बताया। उन्होंने कहा कि यह नाटक ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले अभ्यर्थी की कठिन यात्रा के जरिए सामाजिक असमानता और समान अवसर जैसे विचारों को उठाता है। प्रस्तुति के बाद अपनी प्रतिक्रिया में डीसीपी ने कहा, "मैंने अजय में खुद को देखा।" उनका कहना था कि अजय का किरदार हर उस व्यक्ति से जुड़ता है जिसने अपने जीवन में संघर्ष किया है।
आरएसएस प्रमुख के न्यूयॉर्क कार्यक्रम से पहले लोगों से सतर्क रहने और टकराव से बचने की अपील
आरएसएस प्रमुख के न्यूयॉर्क कार्यक्रम से पहले लोगों से सतर्क रहने और टकराव से बचने की अपील
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
IBC24









