तमिलनाडु के मंत्री ए. राजमोहन ने बृहस्पतिवार को विधानसभा को बताया कि राज्य सरकार नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण फंसे राज्य के तीर्थयात्रियों को बचाव कार्य पर करीब से नजर रख रही है और चेन्नई से गए 49 अन्य लोगों की स्थिति का पता भी लगाया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के 10 जिलों से 54 लोग और पुडुचेरी से तीन लोग तीर्थयात्रा पर गए थे। इसके अलावा सरकार को पता चला है कि चेन्नई के एक ‘टूर ऑपरेटर’ ने 49 तीर्थयात्रियों को मानसरोवर भेजा था जिससे तीर्थयात्रा पर जाने वाले लोगों की संख्या 106 हो गई है।
विपक्ष की ओर से लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने विधानसभा को बताया कि राज्य सरकार तीर्थयात्रियों के बचाव कार्य और उनकी स्थिति पर हर घंटे नजर रख रही है और बचाए गए 20 लोगों को वर्तमान में काठमांडू के रास्ते वापस लाने की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने बताया कि इन 57 लोगों के अलावा चेन्नई की एक ट्रैवल एजेंसी 49 तीर्थयात्रियों को मानसरोवर यात्रा पर ले गई थी और अभी उनकी यात्रा योजना तथा वे कहां हैं, इस बारे में पता लगाने की कोशिशें की जा रही हैं।
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उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे पर की गई मरम्मत के बाद उस पर नई दरारें आ गई हैं। यह घटना 36,230 करोड़ की लागत वाले इस हाईवे के एक दूसरे हिस्से पर भारी बारिश के कारण 10 मीटर गहरा गड्ढा बनने के ठीक एक हफ़्ते बाद हुई है। ताज़ा नुकसान उन्नाव के पास एक हिस्से में देखा गया है, जहाँ पहले भी मिट्टी धंसने और कटाव की समस्या सामने आई थी। बाद में नेशनल हाईवेज़ अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) ने पैचवर्क करके सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की।
हालिया नुकसान पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है। यादव ने एक्सप्रेसवे पर बनी दरारों का ज़िक्र करते हुए एक पोस्ट में कहा कि सावधान रहें, आपकी जान खतरे में है! उन्होंने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे पर बनी अनगिनत दरारें, जो नदी की लहरों जैसी दिखती हैं, बीजेपी के भ्रष्टाचार की गवाही दे रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी का भ्रष्टाचार जानलेवा है।
रिपेयर किए गए हिस्से में दरारें आने से एक्सप्रेसवे की मज़बूती, और खासकर भारी बारिश झेलने की उसकी क्षमता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। 18 अगस्त को मेरठ-प्रयागराज कैरिजवे पर 421वें किलोमीटर के पास एक बड़ा गड्ढा बन गया। बताया जा रहा है कि भारी बारिश के कारण सड़क का एक हिस्सा और उससे लगा तटबंध बह गया। 594 किलोमीटर लंबे, छह-लेन वाले, एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को किया था। यह मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है और उत्तर प्रदेश के 12 ज़िलों से होकर गुज़रता है।
यह एक्सप्रेसवे मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा के समय को लगभग 12 घंटे से घटाकर करीब छह घंटे करने के लिए बनाया गया था और इसे राज्य के लिए एक अहम इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर के तौर पर पेश किया गया था। हालांकि, उद्घाटन के बाद से ही इस प्रोजेक्ट में कई जगहों पर नुकसान की खबरें सामने आई हैं।
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