नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ में 160 से अधिक लोगों की जान जाने के बाद इसके कारणों को लेकर बना सस्पेंस अब साफ हो गया है। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने पुष्टि की है कि यह तबाही किसी भूकंप के कारण नहीं, बल्कि 'ग्लेशियर के टूटने' और उससे पैदा हुए भारी 'मलबे के बहाव' (debris flow) की वजह से आई थी। शुरुआती रिपोर्ट्स में सुबह 8:37 बजे आए 5.2 (पहले 4.4 दर्ज) तीव्रता के झटकों के आधार पर इसे भूकंप से जोड़कर देखा जा रहा था। हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों, लंबी अवधि की भूकंपीय तरंगों और सीस्मोग्राफ डेटा के गहन विश्लेषण के बाद वैज्ञानिकों ने साफ किया कि रिक्टर पैमाने पर दर्ज हुई हलचल दरअसल विशाल ग्लेशियर के टूटने और मलबे के तेजी से खिसकने की वजह से उत्पन्न हुई थी।
USGS ने एक बयान में कहा, "शुरुआत में इस घटना को 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया था।" आस-पास के भूकंपीय स्टेशनों, लंबी अवधि की भूकंपीय तरंगों और सैटेलाइट तस्वीरों के और विश्लेषण से यह पता चला कि भूकंपीय घटना असल में ग्लेशियर का टूटना और मलबे का बहाव था, न कि कोई भूकंप।"
नेपाल: GLOF का खतरा झेलने वाला देश
भारत और चीन के बीच बसा नेपाल, ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) यानी ग्लेशियर से बनी झीलों के अचानक फटने से आने वाली बाढ़ के खतरे का सामना करता रहता है। ऐसी ही एक घटना 2025 में नेपाल के रसुवा जिले में हुई थी, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी और 19 लोग लापता हो गए थे।
वैज्ञानिकों ने ऐसी घटनाओं के लिए ग्लोबल वार्मिंग को जिम्मेदार ठहराया है। AFP से बात करते हुए, यूके की रीडिंग यूनिवर्सिटी की रिसर्चर डोरोथी हेनरिक ने कहा कि हालांकि, किसी घटना के कारणों का पक्का पता 'इवेंट एट्रिब्यूशन स्टडी' (घटना के कारणों का अध्ययन) से ही चल सकता है।
उन्होंने कहा, "पहाड़ी इलाकों में नदियां कहीं-कहीं काफी संकरी हो सकती हैं।" उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई चीज़ उन्हें रोकती है, तो "पानी का बहुत ज़्यादा जमाव हो सकता है, और फिर इससे बहुत तेज़ गति वाली बाढ़ आती है।"
हेनरिक ने कहा, "हम जानते हैं कि हिमालय में जलवायु परिवर्तन के रुझान कैसे हैं। ज़्यादा गर्मी की लहरें (हीट वेव), ग्लेशियर का पीछे हटना, पर्माफ्रॉस्ट का कम होना - ये सब ऐसी चीज़ें हैं जो भूस्खलन और ग्लेशियर फटने से आने वाली बाढ़ जैसी घटनाओं को बढ़ावा दे सकती हैं।"
नेपाल में बचाव अभियान की तेज़ी
इस आपदा के बाद, नेपाल ने बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने हालात का जायज़ा लेने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। शाह ने उन लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है जिन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया है और अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर ज़रूरी मदद मुहैया कराने का निर्देश दिया है।
सरकार के अनुसार, अचानक आई बाढ़ में गाड़ियों के चलने लायक 19 पुल बह गए और नेपाल सेना के 44 अधिकारियों समेत लगभग 80 सुरक्षाकर्मी अभी भी लापता हैं। इससे कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू पनबिजली परियोजनाओं और नुवाकोट व रसुवा ज़िलों में बन रही पांच परियोजनाओं को भी नुकसान पहुँचा है।