Gujarat High Court ने Marriage Bureau संचालक को दी जमानत, नहीं मिला गैंग से संबंध
गुजरात उच्च न्यायालय ने ‘मैरिज ब्यूरो’ चलाने वाली एक महिला को यह कहते हुए जमानत दे दी कि ‘लुटेरी दुल्हन गैंग’ की सदस्य के तौर पर उसकी कोई भूमिका नहीं पाई गई। न्यायमूर्ति एचडी सुथार ने पांच महीने पहले गिरफ्तार की गई कविता सोनी को मंगलवार को जमानत देते हुए कहा कि मुकदमा पूरा होने में समय लगेगा और आरोपी को जेल में रखने का मतलब मुकदमे से पहले ही दोषी ठहराना है। अदालत ने उसे राहत देते हुए आपराधिक कानून के इस बुनियादी सिद्धांत का भी हवाला दिया – ‘‘ज़मानत नियम है और जेल अपवाद’’।
इसने आवेदक को 25,000 रुपये का निजी बॉण्ड और इतनी ही ज़मानत राशि भरने पर नियमित ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया। प्रकरण में एक स्थानीय निवासी की शिकायत पर साबरकांठा ज़िले के हिम्मतनगर शहर में संबंधित महिला के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी महिला अपने पति मनहर के साथ मिलकर ‘दिव्य शक्ति’ नाम का एक मैरिज ब्यूरो चलाती थी।
शिकायतकर्ता अपने भतीजे के लिए जीवनसाथी की तलाश में इस ब्यूरो के पास गया और आरोपी को 5.10 लाख रुपये दिए। हालांकि, शिकायतकर्ता के भतीजे की शादी उस महिला के बजाय किसी दूसरी महिला से हुई, जिसके साथ पहले शादी तय हुई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि यह आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी के बराबर है।
अदालत ने महिला को ज़मानत देते हुए अपने आदेश में कहा, ‘‘...मौजूदा याचिकाकर्ता (सोनी) की भूमिका केवल शिकायतकर्ता के भतीजे की शादी का वादा करने या शादी संपन्न कराने तक ही सीमित है। इसके अलावा, ‘लुटेरी दुल्हन गैंग’ की सदस्य के तौर पर मौजूदा याचिकाकर्ता की कोई भूमिका नहीं बताई गई है और न ही उसके खिलाफ कोई अन्य आरोप सामने आया है।
Jaunpur Court ने 2004 के हत्या मामले में चार भाइयों को दी उम्रकैद
उत्तर प्रदेश में जौनपुर की एक अदालत ने 22 साल पुराने हत्या के मामले में सांसद बाबू सिंह कुशवाहा के मौजूदा प्रतिनिधि मनोज मौर्य समेत चार भाइयों को उम्रकैद और 80-80 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। हालांकि, वर्तमान में कुशवाहा के प्रतिनिधि मनोज मौर्य वर्ष 2004 में हुई हत्या की घटना के समय राजनीति में नहीं थे और न ही उनका बाबू सिंह कुशवाहा से कोई जुड़ाव था। शासकीय अधिवक्ताओं ने बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल यादव की अदालत ने मामले में चारों आरोपियों को दोषी ठहराया और फैसला सुनाए जाने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेजने का आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मामला 16 अगस्त 2004 का है। उस दिन लाइन बाजार थाना क्षेत्र के मियांपुर मोहल्ले में कचहरी तिराहे के पास जमीन विवाद को लेकर आशीष मौर्य नामक व्यक्ति की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में लाइन बाजार थाने में सात लोगों के खिलाफ हत्या सहित कई गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, नामजद सात आरोपियों में राम सेवक मौर्य, अश्वनी मौर्य, पवन मौर्य और मनोज मौर्य भी शामिल थे। अदालत ने दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि एक अन्य आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राम सेवक मौर्य, अश्वनी मौर्य, पवन मौर्य और मनोज मौर्य को हत्या का दोषी पाया और चारों को उम्रकैद तथा 80-80 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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