Nepal Flood से Bihar में अलर्ट, गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोले गए
बिहार सरकार ने पड़ोसी देश नेपाल के कई जिलों में बुधवार को अचानक आई बाढ़ के बाद गंडक नदी में जलप्रवाह बढ़ने की आशंका को देखते हुए पूरे तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है। स्थिति से निपटने के लिए वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
हालांकि, गंडक नदी में जलप्रवाह अब स्थिर हो गया है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रात 11 से 12 बजे तक गंडक बैराज से 1,50,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है,जो बुधवार का सर्वाधिक जलप्रवाह है। अधिकारियों के अनुसार, अब नदी का जलस्तर और प्रवाह धीरे-धीरे कम होने की संभावना है।
रात 11 बजे और रात 12 बजे तक जल प्रवाह स्थिर रहा। गंडक बैराज पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर में स्थित है, जो बिहार का सबसे उत्तरी जिला है और नेपाल की सीमा से सटा हुआ है। बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि बुधवार दोपहर तक वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से करीब 86 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था और जलप्रवाह लगातार बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एहतियाती कदम के तौर पर बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं तथा अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में तकनीकी टीम तैनात की गई है। गंडक नदी के बेसिन में आने वाले सभी जिलों को भी अलर्ट कर दिया गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सभी फाटक खोलने से पानी का प्रवाह सुचारु रहेगा और बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, सभी विभागों को संभावित आपात स्थिति को देखते हुए आवश्यक सामग्री का भंडारण करने, तटबंधों का नियमित निरीक्षण करने और चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जल संसाधन मंत्री ने बताया कि नेपाल के देवघाट गेज स्टेशन पर नारायणी नदी का जलस्तर 4.77 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि चेतावनी स्तर 7.30 मीटर और खतरे का निशान नौ मीटर है। उन्होंने कहा कि यदि जलस्तर में तेजी से वृद्धि होती है तो करीब साढ़े तीन घंटे में उसका प्रभाव गंडक बैराज तक पहुंच सकता है।
इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर संबंधित जिलों में विशेष सतर्कता बरतने और सभी आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से गंडक नदी से जुड़े पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली सहित अन्य संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ाने को कहा है। उन्होंने नेपाल से आने वाले पानी की स्थिति पर लगातार नजर रखने और संभावित प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से लोगों को लगातार आवश्यक सूचनाएं और संभावित खतरे की चेतावनी देता रहे, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमों को तैयार रखा जाए तथा जिला प्रशासन इनके साथ समन्वय कर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक और तकनीकी टीमें पूरी तरह सक्रिय रहें तथा किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति में लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
जल संसाधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बुधवार रात करीब साढ़े आठ बजे नेपाल से बढ़ा जलप्रवाह गंडक बैराज तक पहुंच गया, जिससे जलप्रवाह में करीब 20 हजार क्यूसेक की वृद्धि दर्ज की गई। सिंह ने कहा, ‘‘जलप्रवाह के रात करीब 11 बजे चरम पर पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद इसमें कमी आने लगेगी। अधिकतम जलप्रवाह करीब दो लाख क्यूसेक रहने का अनुमान है।’’ सचिव ने बताया कि इस वर्ष अब तक का सर्वाधिक जलप्रवाह 14 जुलाई 2026 को 2.24 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया था, जबकि 28 सितंबर 2024 को 5.625 लाख क्यूसेक का रिकॉर्ड दर्ज हुआ था।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए स्थिति सामान्य रहने की उम्मीद है। फिर भी बैराज, तटबंधों और नियंत्रण कक्ष में सभी टीमें पूरी तरह सतर्क हैं।’’ सचिव ने बताया कि विभागीय अधिकारियों को संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारियां सुनिश्चित करने, लगातार निगरानी रखने, आवश्यक सामग्री का भंडारण करने तथा तटबंधों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, संवेदनशील क्षेत्रों में जिला प्रशासन लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन के माध्यम से समय पर लोगों को सतर्क कर रहा है।
अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ऐसी बाढ़ होती है, जो बहुत कम समय में भारी बारिश, बादल फटने, पहाड़ी क्षेत्रों से तेज जलप्रवाह या बांध से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण आती है।
Nepal Flood के बाद UP में अलर्ट, महराजगंज और कुशीनगर में नदियों पर निगरानी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ पर चिंता जताते हुए महराजगंज और कुशीनगर के जिला प्रशासन को किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि नेपाल में आई बाढ़ के कारण महराजगंज और कुशीनगर जिलों में गंडक तथा नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। राज्य सरकार ने पड़ोसी देश में बाढ़ में फंसे उत्तर प्रदेश के नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है।
राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ से हुए नुकसान को गंभीर चिंता का विषय बताया और प्रभावित लोगों की सुरक्षा एवं कुशलता के लिए भगवान पशुपतिनाथ से प्रार्थना की। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने वहां फंसे प्रदेश के नागरिकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी किया है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, यदि कोई प्रदेशवासी नेपाल में फंसा है या उसे किसी तरह की सहायता की आवश्यकता है तो उसके परिजन तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार ने नागरिकों की सुरक्षित वापसी और उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए दूतावास स्तर पर भी संपर्क शुरू किया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर राहत आयुक्त कार्यालय ने भारतीय और नेपाली दूतावासों से संपर्क किया है तथा दोनों दूतावासों से कहा गया है कि नेपाल में फंसे उत्तर प्रदेश के नागरिकों की जानकारी मिलने पर उसे तत्काल राहत आयुक्त कार्यालय के साथ साझा किया जाए, ताकि संबंधित व्यक्ति तक जल्द से जल्द आवश्यक मदद पहुंचाई जा सके। अधिकारियों ने बताया कि नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ को देखते हुए सीमावर्ती जिलों महराजगंज और कुशीनगर में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
उन्होंने कहा कि नेपाल में आई बाढ़ से प्रभावित होने वाली नदियों के सभी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं। नेपाल-चीन सीमा से लगे रसुवा जिले में अत्यधिक बारिश के कारण पैदा हुई संवेदनशील स्थिति को देखते हुए नेपाल के नवलपरासी जिले और महराजगंज में गंडक नदी के दाहिने किनारे पर रात में निरीक्षण तथा लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने नेपाल में हुए नुकसान को चिंताजनक बताते हुए दोनों जिलों के प्रशासन को जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने और गंडक तथा नारायणी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
ऐसा माना जा रहा है कि अचानक आई बाढ़ के कारण उत्तर प्रदेश के कई लोग नेपाल में फंसे हुए हैं। अपने साथियों के साथ सड़क मार्ग से नेपाल गए किसान नेता राकेश टिकैत भी पोखरा इलाके में फंसे हुए हैं। टिकैत ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘हम कल विमान से काठमांडू पहुंचेंगे और वहां से हवाई मार्ग से दिल्ली जाएंगे।
हम अपने वाहनों को यहीं छोड़ देंगे क्योंकि वर्तमान हालात में उनसे यात्रा करना संभव नहीं होगा।’’ उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के किसान संगठनों के सदस्य नेपाल में मौजूद हैं और उन्हें बाढ़ के मद्देनजर फंसे भारतीयों तथा स्थानीय लोगों की मदद करने और सहायता उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। राज्य सरकार के बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। महराजगंज में गंडक की चौबीसों घंटे निगरानी महराजगंज में जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए गंडक नदी की चौबीसों घंटे निगरानी करने का आदेश दिया है।
अधिकारियों को आशंका है कि बाढ़ के कारण नदी का प्रवाह बढ़ने से निचले इलाकों पर असर पड़ सकता है। जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने राजस्व विभाग, पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और अन्य एजेंसियों को सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर संवेदनशील निचले इलाकों और नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से नदियों, नालों और जलभराव वाले इलाकों के पास नहीं जाने तथा केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
लोगों से बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को भी संवेदनशील इलाकों से दूर रखने को कहा गया है। कुशीनगर में निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह कुशीनगर से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, जिला प्रशासन ने मरचहवा, शिवपुर और अन्य गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का आदेश दिया है। निवासियों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील करते हुए घोषणाएं भी की जा रही हैं।
जिला प्रशासन के मुताबिक, नेपाल में आई बाढ़ के कारण अगले दो घंटों में कुशीनगर में नारायणी नदी का जलस्तर और बढ़ने की संभावना है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि नेपाल में भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने खड्डा तहसील में नारायणी नदी के किनारे बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी।
जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीणों से सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया गया है, क्योंकि नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है। उन्होंने बताया कि खड्डा तहसील के दियारा क्षेत्र के शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, मरचहवा और बसंतपुर गांवों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
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