पेंटागन में किचन कैबिनेट:अमेरिकी रक्षा मंत्री की पत्नी अटैक प्लान के लिए सीक्रेट मीटिंग में बैठीं, स्टाफ भी चुन रहीं
दुनिया का सबसे ताकतवर रक्षा मंत्रालय अमेरिकी पेंटगन किचन कैबिनेट (ताकतवर नेता के परिवार जन) में तब्दील हो गया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की पत्नी जेनिफर हेगसेथ इन दिनों पेंटागन में सबसे प्रभावशाली सलाहकार की भूमिका निभा रही हैं। पत्रकार रहीं जेनिफर पति के इंटरव्यू की तैयारी, स्टाफ चुनने व रणनीति बनाने में मौजूद रहती हैं। उनकी भूमिका तब विवादों में आई, जब वे उस सिग्नल चैट मीटिंग में शामिल थीं, जिसमें यमन में अमेरिकी हमले की योजना साझा की गई थी। हाल ही में राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें सैन्य परिवारों से जुड़े मिलिट्री स्पाउस कमीशन का अध्यक्ष बनाया है। न्यूज चैनल में हेगसेथ के शो की प्रोड्यूसर थीं जेनिफर, यहीं हुई दोस्ती पीट-जेनिफर की दोस्ती 2014 में टीवी चैनल में हुई। तब पीट बतौर एंकर शो होस्ट करते और जेनिफर उनकी शो प्रोड्यूसर हुआ करती थीं। साथ काम करते-करते दोनों करीब आए और 2019 में शादी के बंधन में बंध गए। दोनों की ये दूसरी शादी है। पीट अक्सर कहते हैं कि ‘जीसस’ (ईश्वर) और ‘जेनिफर’ ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी है। ऐसे बढ़ा जेनिफर का प्रभाव... जेनिफर का दबदबा तब और बढ़ा, जब वह मार्च 2025 में ब्रिटिश वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ एक बेहद गोपनीय बैठक में मौजूद थीं। उस वक्त अमेरिका ने यूक्रेन के साथ सैन्य खुफिया जानकारी साझा करना रोक दिया था। जेनिफर की मौजूदगी से असहज ब्रिटिश अधिकारियों ने संवेदनशील बातें रोक दीं। इसके बाद अलग से जेनिफर की गैरमौजूदगी में बैठक करनी पड़ी। पाबंदियां लगाईं जेनिफर ने मीडिया के प्रति कड़ा रुख अपनाया। फरवरी 2025 में पेंटागन ने ‘मीडिया रोटेशन प्रोग्राम’ लागू किया, जिसके तहत कई संस्थानों को पेंटागन के वर्कस्पेस से बाहर कर दिया। साथ ही, वे रक्षा विभाग के वीडियो-रील्स के जरिए सैन्य गतिविधियों को युवा, जेन-जी तक पहुंचाने की रणनीति में भी भूमिका निभा रही हैं। सैन्य अफसरों का भी इंटरव्यू ले चुकीं ट्रम्प के सत्ता संभालने के बाद जेनिफर ने रक्षा विभाग से जुड़े सैन्य अफसरों के 40-40 मिनट के लंबे इंटरव्यू लिए और मीडिया से निपटने की क्षमता पर तीखे सवाल पूछे। भूमिका पर सैन्य अफसरों ने उठाए सवाल हेगसेथ के साथ काम कर चुके पूर्व मुख्य प्रवक्ता जॉन उलीओट ने कहा, ‘किसी रक्षा मंत्री का अपनी पत्नी को गोपनीय सैन्य कर्तव्यों में शामिल करना और उस पर कोई कार्रवाई न होना हैरान करने वाला है।’ वहीं सीनेटर क्रिस कून्स ने कहा कि रक्षा मंत्री को मिली उच्च-स्तरीय सुरक्षा मंजूरी कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे वे अपनी पत्नी को सौंप दें।
रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे
सऊदी अरब और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। 19 से 21 अगस्त के बीच करीब 60 घंटे में तुर्किये के दर्जनों सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर लैंडिंग और टेकऑफ किया। इनमें सी-130 सैन्य परिवहन विमान और ए-400-एम जंबो मिलिट्री विमान शामिल थे। रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर तुर्किये के सी-130 सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही रही। ए-400-एम विमान मुरीद एयरबेस पर पहुंचा। इसकी पहचान कॉल-साइन टीयूएएफ 526 से हुई। इन विमानों से तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई। ड्रोन की सप्लाई रात के अंधेरे में की गई, ताकि सैटेलाइट ट्रैकिंग से गतिविधियों को छिपाया जा सके। तुर्किये से पहुंची ड्रोन की खेप को बहावलपुर और रावलपिंडी की मिलिट्री स्टोरेज फैसिलिटीज में रखा गया है। पाकिस्तान को तुर्किये से मिले AI-गाइडेड हथियार पाकिस्तान को तुर्किये से आधुनिक ड्रोन, मिसाइल और दूसरे रक्षा उपकरण मिले हैं। इनमें AI-गाइडेड केमांके क्रूज मिसाइल, बायरक्तार TB2 और अकिंसी ड्रोन शामिल हैं। इसके अलावा तुर्किये ने पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने में भी मदद की है। आगे जानेंगे NATO जैसा मक्का समझौता क्या है और बलूचिस्तान में किस बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मुनीर। इससे पहले पढ़िए भास्कर नॉलेज…… आर्थिक संकट के बीच बढ़ता सैन्य खर्च पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कर्ज और महंगाई का दबाव है। आईएमएफ के मुताबिक, 2026 में महंगाई औसतन 7.2% रह सकती है और सरकारी कर्ज करीब 67.5% जीडीपी के बराबर रह सकता है। इसके बावजूद सैन्य खर्च बढ़ रहा है। एसआईपीआर के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान ने करीब 11.9 अरब डॉलर सैन्य खर्च किए, जो 2024 से 11% ज्यादा है। 2026-27 के बजट में रक्षा के लिए करीब 30.1 खरब पाकिस्तानी रुपए रखे गए हैं। मुनीर ने एर्दोगन को ड्रोन देने के लिए राजी किया मक्का में हुए रक्षा समझौते के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन से ड्रोन देने को कहा था। मुनीर ने बताया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को काफी नुकसान हुआ था। चीन से पाकिस्तान को जे-सीरीज के लड़ाकू विमान पर्याप्त संख्या में मिल चुके थे, लेकिन इस दौरान उसके ड्रोन का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था। NATO जैसा मक्का समझौता क्या है पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये में हुए मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत किसी एक देश पर हमला होने पर बाकी दोनों देश उसके साथ खड़े होंगे। इसी वजह से इसे NATO जैसे सैन्य समझौते के तौर पर देखा जा रहा है। तुर्किये के थिंक टैंक TEPAV के सिक्योरिटी एनालिस्ट डॉ. निहत अली ओजकान के मुताबिक, सऊदी अरब दुनिया का प्रमुख कच्चा तेल निर्यातक और टॉप-20 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वह साझेदारी में आर्थिक ताकत दे सकता है। पाकिस्तान इकलौता इस्लामिक देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं। उसके पास बैलिस्टिक मिसाइल और बड़ी सैन्य ताकत भी है। तुर्किये के पास NATO देशों में अमेरिका के बाद दूसरी सबसे बड़ी सेना है। वह एडवांस सैन्य तकनीक और अपना अनुभव साझा कर रहा है। तुर्किये ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ ड्रोन तकनीक पर भी सहयोग किया है। बलूचिस्तान में बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मुनीर बलूचिस्तान में विद्रोहियों से घिरे मुनीर अब बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में हैं। इसके लिए सेना की टुकड़ियां रवाना की जा रही हैं। यह कार्रवाई अगले 48 घंटे में शुरू हो सकती है। बलूच विद्रोहियों के हमले की आशंका के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वार्टर में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। शहबाज सरकार ने शनिवार को रावलपिंडी के GHQ को अगले 6 महीने के लिए संवेदनशील जोन घोषित किया है। जुलाई में ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू करने के बाद भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर हुई है। सेना की 25 से ज्यादा चेकपोस्ट खाली हो चुकी हैं और कई जगहों पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाकों का कब्जा है। ईरान सीमा से लगे बलूचिस्तान के इलाकों में भी पाकिस्तानी सेना को लगातार चुनौती मिल रही है। PAK के हाथ से बलूचिस्तान का 70% इलाका गया बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है और देश के करीब 45% हिस्से में फैला है। ईरान से लगी सीमा वाले इस इलाके में इन दिनों हथियारबंद विद्रोहियों की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। BLA और पश्तून विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। कई इलाकों में सवाल सिर्फ सेना की कार्रवाई का नहीं, बल्कि सरकार की पकड़ का है। पुलिस थाने चलाना, हाईवे सुरक्षित रखना और लोगों का बिना डर एक शहर से दूसरे शहर जाना भी चुनौती बन गया है। कई जगह BLA और पश्तून गुट सड़कों पर नाके लगाते हैं। वाहनों की तलाशी लेने और वसूली करने की भी बात सामने आई है। यह पैसा BLA के फंड में जाने का दावा किया गया है। बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसकर पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों को निशाना बनाते हैं। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी लिस्ट में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक अकाउंट सीज-यात्रा पर रोक पाकिस्तान ने PoK में हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि सरकार ने उनके खिलाफ न तो किसी आतंकी गतिविधि का आरोप बताया है और न ही किसी अदालत का फैसला सामने आया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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