बांग्लादेश बोला- हमारे PM को भारत दौरे की जल्दबाजी नहीं:मंत्री ने कहा- भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं करेंगे
बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री के भारत दौरे का फैसला दोनों देशों के बीच बातचीत और जरूरी तैयारियों के बाद होगा। भारत ने रहमान को द्विपक्षीय दौरे का न्योता भेजा भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय दौरे के लिए आमंत्रित किया है। उन्हें 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता भी मिला है। यह दौरा भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सुधारने के लिए अहम माना जा रहा है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा हुआ है। हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा बांग्लादेश अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। उन्हें ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने के लिए मौत की सजा दी है। बाकी मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। ICT ने उन्हें 5 मामलों में आरोपी बनाया था। ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया था। इसी के चलते बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। कबीर ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच जारी बातचीत का हिस्सा है। भारत का कहना है कि वह बांग्लादेश के अनुरोध की कानूनी प्रक्रिया के तहत समीक्षा कर रहा है। हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया 5 अगस्त को नई दिल्ली से एक वर्चुअल मीडिया कार्यक्रम में शेख हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और देश को फिर से सही रास्ते पर लाने की कोशिश करेंगी। इस बयान पर बांग्लादेश ने कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि इससे बांग्लादेश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसके बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में फिर से तनाव बढ़ गया। ढाका ने कहा था कि भारत में हसीना के ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिशों पर असर डाल सकते हैं। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया कि कार्यक्रम के आयोजन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। जयशंकर बोले- कोई भी रिश्ता तभी मजबूत जब उससे दोनों का फायदा भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान भी काफी चर्चा में है। उन्होंने शनिवार को इकोनॉमिक टाइम्स के वर्ल्ड लीडर फोरम में कहा, कोई भी रिश्ता तभी मजबूत और सफल होता है, जब उससे दोनों पक्षों को फायदा हो। जयशंकर ने कहा कि भारत यह उम्मीद नहीं करता कि पड़ोसी देश सिर्फ उसके हितों के मुताबिक काम करें। जैसे भारत दूसरे देशों के हितों का सम्मान करता है, वैसे ही उम्मीद वह दूसरे देशों से रखता है। ------------------------------ यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे: जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश गंगा जल संधि में भारत से ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…
संडे प्रोफाइल : रोरी कैनेडी:कैनेडी परिवार की रोरी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों से बना रही हैं खास पहचान
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की भतीजी रोरी कैनेडी ने पेचीदा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर कई चर्चित डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाई हैं। इन दिनों विमानन कंपनी बोइंग पर बनाई नई डॉक्यूमेंट्री को लेकर रोरी चर्चा में हैं। अमेरिका के मशहूर कैनेडी परिवार की विरासत से जुड़ी रोरी कैनेडी ने अपनी पहचान राजनीति में नहीं बल्कि डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की दुनिया में बनाई है। उनके पिता सीनेटर रॉबर्ट कैनेडी पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के छोटे भाई थे। कैनेडी परिवार का इतिहास कई त्रासद घटनाओं से भरा रहा है। 1968 में रोरी के जन्म से पहले ही उनके अंकल जॉन एफ. कैनेडी और पिता रॉबर्ट कैनेडी की हत्या हो चुकी थी। ब्राउन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाली रोरी बताती हैं कि कॉलेज के दिनों में अमेरिका में केबल टीवी तेजी से लोकप्रिय हो रहा था। इससे फिल्मों के प्रति उनका रुझान बढ़ा। वह एक आयरिश परिवार में पली-बढ़ीं, जहां कहानी सुनाने की पुरानी परंपरा थी, जो उनके रचनात्मक सफर का आधार बनी। रोरी ने अपनी फिल्मों में राजनीति और सरकार के फैसलों से पैदा होने वाले मानवीय संकटों को प्रमुखता से उठाया। इराक की कुख्यात अबू गरेब जेल की परिस्थितियों पर बनी उनकी फिल्म को एमी अवॉर्ड मिला। वियतनाम युद्ध के अंतिम दिनों पर बनी उनकी फिल्म ऑस्कर के लिए नामजद हुई। एक अन्य फिल्म में उन्होंने पिता रॉबर्ट कैनेडी की हत्या के बाद अपनी मां की जिंदगी पर पड़े असर को दिखाया। अलग तरह की कहानियां सामने लाने के इरादे से शुरू हुआ उनका सफर अब तक 35 से अधिक डॉक्यूमेंट्री फिल्मों तक पहुंच चुका है। अब उनकी नई फिल्म ‘फ्री फॉल : अ रेकनिंग फॉर बोइंग’ विमानन कंपनी बोइंग की अंदरूनी कहानी सामने लाती है। फिल्म में कंपनी के व्हिसल ब्लोअर्स के अनुभवों के जरिए यह बताया गया है कि सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े सवालों पर कंपनी के भीतर क्या हुआ। यह उनकी 2022 में आई फिल्म ‘डाउनफॉल : द केस अगेंस्ट बोइंग’ की अगली कड़ी है। पहली फिल्म में रोरी ने बताया था कि प्रतिस्पर्धा और मुनाफे की होड़ ने किस तरह कंपनी के फैसलों को प्रभावित किया और दुर्घटनाओं की जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए। रोरी के मुताबिक पहली फिल्म के बाद बोइंग ने सार्वजनिक रूप से भरोसा दिलाया था कि उसने गलतियों से सबक लिया है, लेकिन उड़ानों में दोबारा खराबी की नई खबरें सामने आने लगीं। इसी दौरान कंपनी के कई व्हिसल ब्लोअर्स ने रोरी से संपर्क किया और दावा किया कि हालात सुधरने के बजाय और खराब हो रहे हैं। इनमें बोइंग के पूर्व कर्मचारी जॉन बार्नेट भी थे, जिन्होंने पहली फिल्म के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी थी। मार्च 2024 में बोइंग के खिलाफ गवाही के दौरान बार्नेट मृत पाए गए थे। रोरी का मानना है कि कंपनियों और सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके फैसलों का केंद्र सार्वजनिक हित हो, न कि निजी।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 







