सुपरस्टार यश की अपकमिंग फिल्म 'टॉक्सिक' का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं, एक्टर 'रामायण' फिल्म में रावण की भूमिका में नजर आने वाले हैं। केजीएफ स्टार ने सिनेमा की दुनिया में परचम लहरा दिया है। दरअसल, इतनी दौलत और शोहरत से पहले एक्टर ने काफी बड़ा संघर्ष किया है। एक समय था, जब वे प्रोविजन स्टोर पर काम किया करते थे।
यश को याद आया बचपन का दौर
हालिए में एक्टर यश अपने पुराने दिन को याद करते हुए भावुक हो गए। आज उन्हें इंडियन सिनेमा का सुपरस्टार कहते हैं, लेकिन कामयाबी तक पहुंचने से पहले पहले उन्होंने बड़ा सफर फिल्म इंडस्ट्री की ग्लैमरस से काफी दूर था। वह एक्टर बनने से पहले परचून की दुकान पर काम किया करते थे।
- बता दें कि, यश का असली नाम नवीन गौड़ा है। हाल ही में उन्होंने अपनी लाइफ के किस्से 'आप की अदालत' शो में साझा किए।
- यश ने उस पल के बारे में बताया कि जब उन्हें पहली बार अपने परिवार और दोस्तों के बीच आर्थिक स्थिति का फर्क समझ आया।
- उन्होंने कहा कि स्कूल के दिनों में उन्हें कभी ऐसा फर्क महसूस नहीं हुआ, लेकिन कॉलेज के समय के बाद हालात बदल गए।
किस वजह से शर्म महसूस करते थे केजीएफ स्टार
यश ने बताया कि, स्कूल के दिनों में उन्हें कभी दूसरे बच्चों और अपने बीच स्टेटस या पैसे लेकर कभी कोई फर्क महसूस नहीं हुआ। लेकिन कॉलेज के समय यह फर्क महसूस हुआ है। कॉलेज के दौरान सभी के पास अपनी बाइक और कारें थीं। उनके पास पहनने के लिए अच्छे कपड़े थे। मेरे पास बस मेरे पिता का पुराना स्कूटर था।
- यश ने आगे बताया है कि उस समय मैंने अपने परिवार की मदद के लिए एक किराने की दुकान भी शुरु की थी। मुझे पुराने स्कूटर चलाने में शर्म आती थी। कभी-कभी, जब मुझे दुकान के लिए सामान लाना होता था, मुझे उसी स्कूटर पर जाना पड़ता है।
- उस दौरान मुझे हीन भावना महसूस होती थी और अक्सर सोचता था कि कोई मुझे इस हालत में न देखे।
- मुझे इस बात की भी चिंता रहती थी कि कहीं मेरे दोस्त मुझे इस तरह न देख लें।'
कब रिलीज होगी 'टॉक्सिक'?
यश ने कहा कि उनके माता-पिता परिवार के लिए कोई संपत्ति नहीं बना पाए, लेकिन उन्होंने उन्हें उससे भी ज्यादा कीमती चीजें दीं है और वह हैं- जिंदगी के सबक और सपोर्ट। एक्टर ने कहा कि 'मेरे माता-पिता हमारे लिए कोई संपत्ति तो नहीं बना पाए, लेकिन हमें जिंदगी की सीख देने के लिए उन्होंने जो त्याग किए, उसके लिए मैं काफी उनका शुक्रगुजार हूं। उन्होंने हमेशा मुझ पर विश्वास जताया है और मुझे हर वो चीज दी जिसकी मुझे जरुरत थी।'
वहीं, सिनेमाघरों में तहलका मचाने के लिए तैयार है 'टॉक्सिक'। यह फिल्म 26 अगस्त को थिएटर्स में रिलीज होने जा रही है। 'टॉक्सिक' में कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया नजर आ रही हैं।
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अक्सर लोग यही सोचते है कि कोलेस्ट्रॉल सिर्फ गलत खानपान के कारण ही बढ़ता है, हालांकि सच्चाई कुछ और है। दरअसल, 40 वर्ष की उम्र के बाद शरीर में ऐसे प्राकृतिक बदलाव देखने को मिलते हैं, जो कि कोलेस्ट्रोल के स्तर को प्रभावित करते हैं। उम्र बढ़ने के साथ कोशिकाओं की कार्यक्षमता कम होने लगती है। इस दौरान मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ने लगता है और हार्मोनल परिवर्तन लिपिड प्रोफाइल पर असर दिखाता है। इसी कारण से 40 पार करने के बाद से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा अधिक बढ़ने लगता है।
40 के बाद कोलेस्ट्रॉल क्यों बढ़ता है?
मैयोक्लीनिक के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ शरीर की कैलोरी खर्च करने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है। ऐसे में पहले के मुकाबले कम कैलोरी बर्न होती है और अतिरिक्त कैलोरी शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगती है। इसका असर वजन बढ़ने के साथ-साथ एलडीएल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स जैसे ब्लड फैट के स्तर पर भी पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, उम्र बढ़ने के साथ ही लिवर की वह क्षमता भी कम हो जाती है, जिससे वह रक्त से अतिरिक्त LDL को रिमूव करता है। जिसका परिणाम रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है।
कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में हार्मोन और मेटाबॉलिज्म की क्या भूमिका होती है?
एनसीबीआई के मुताबिक, 40 वर्ष के बाद हार्मोनल बदलाव के कारण कोलेस्ट्रोल बढ़ने लगता है। महिलाओं में मेनोपॉज के समय एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से कम होने लगता है। एस्ट्रोजन सामान्य परिस्थितियों में HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) को बनाए रखने और LDL को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसकी कमी के बाद LDL और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ सकते हैं।
वहीं, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन धीरे-धीरे कम होने लगता है। जिसके साथ शरीर में फैट प्रतिशत बढ़ सकता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित होने लगता है, जिससे लिपिड प्रोफाइल प्रभावित होती है।
लिवर की कार्यक्षमता में बदलाव
एनसीबीआई के अनुसार, लिवर रक्त से अतिरिक्त एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को हटाने का कार्य करता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह प्रक्रिया कुछ लोगों में कम प्रभावी हो सकती है, जैसे कि रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल जमा होना।
शारीरिक गतिविधि में कमी
40 वर्ष के बाद लोग पहले की तुलना में कम एक्टिव नजर आते हैं। अक्सर नियमित रुप से एचडीएल यानी अच्छा कोलेस्ट्रॉल को कम करने और खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल को बढ़ा सकते हैं।
वजन और पेट की चर्बी बढ़ना
उम्र बढ़ने के साथ खासकर पेट के आसपास की चर्बी, जिसे विसरल फैट कहा जाता है, बढ़ने का खतरा रहता है। यह शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस और खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या पैदा कर सकती है। इसके कारण आगे चलकर कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
किन लोगों में कोलेस्ट्रॉल के कारण हार्ट डिजीज का खतरा ज्यादा होता है?
- 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग
- परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास
- डायबिटीज के मरीज
- हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग
- मोटापा या बढ़ा हुआ कमर का घेरा
- जो लोग घू्म्रपान करते हैं
40 के बाद कौन-कौन से टेस्ट नियमित कराने चाहिए?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, 40 वर्ष के बाद सिर्फ कोलेस्ट्रॉल ही नहीं बल्कि संपूर्ण हार्ट हेल्थ की जांच जरुर करानी चाहिए।
- लिपिड प्रोफाइल (टोटल कोलेस्ट्रॉल टेस्ट - LDL और HDL, Triglycerides)
-ब्लड प्रेशर
-फास्टिंग ब्लड शुगर एवं HbA1c
-BMI और कमर की माप
-हाई सेंसिटिव CRP (जरूरत पड़ने पर)
-ApoB या Lipoprotein(a) (यदि पारिवारिक जोखिम हो)
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