Responsive Scrollable Menu

IBPS Clerk 2026: क्लर्क भर्ती की आवेदन डेट बढ़ी, अब 28 अगस्त तक भरें फॉर्म


IBPS Clerk 2026: बैंक में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राहत की खबर है। आईबीपीएस ने Clerk/Customer Service Associate XVI भर्ती 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अब उम्मीदवार 28 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। वहीं, आवेदन में गलती सुधारने के लिए 30 अगस्त तक करेक्शन विंडो खुली रहेगी। इस भर्ती के जरिए देशभर में 11,403 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी और प्रारंभिक परीक्षा 10 व 11 अक्टूबर को आयोजित होगी।

बैंकिंग सेक्टर में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए IBPS Clerk Recruitment 2026 से जुड़ी अहम अपडेट सामने आई है। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन (IBPS) ने क्लर्क यानी Customer Service Associate (CSA) XVI भर्ती के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ा दी है।

पहले आवेदन की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2026 थी, जिसे अब बढ़ाकर 28 अगस्त 2026 कर दिया गया है। ऐसे उम्मीदवार जो किसी वजह से तय समय में आवेदन नहीं कर सके थे, उनके पास अब फॉर्म भरने का अतिरिक्त मौका है।

28 अगस्त तक भर सकेंगे फॉर्म
उम्मीदवार अब 28 अगस्त 2026 तक IBPS Clerk 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद उम्मीदवार 12 सितंबर 2026 तक अपने आवेदन का प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख सकेंगे। उम्मीदवारों को सलाह है कि अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

30 अगस्त तक कर सकेंगे फॉर्म में सुधार
आवेदन प्रक्रिया खत्म होने के बाद उम्मीदवारों को फॉर्म में गलती सुधारने का भी मौका मिलेगा। IBPS की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक करेक्शन विंडो 30 अगस्त 2026 तक खुली रहेगी। इस दौरान उम्मीदवार अपने आवेदन में निर्धारित जानकारी में जरूरी सुधार कर सकेंगे।

IBPS Clerk Application Fee कितनी है?
IBPS Clerk 2026 के लिए आवेदन करते समय निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य है। फीस कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग रखी गई है।
General/OBC/EWS: 850 रुपये
SC/ST/PH: 175 रुपये
आवेदन शुल्क जमा होने के बाद ही फॉर्म को पूर्ण माना जाएगा।

IBPS Clerk 2026 ऐसे करें आवेदन
उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:
सबसे पहले IBPS के आवेदन पोर्टल पर जाएं।
Click here for New Registration लिंक पर क्लिक करें।
मांगी गई जानकारी दर्ज करके रजिस्ट्रेशन पूरा करें।
लॉगिन करके आवेदन फॉर्म की बाकी जानकारी भरें।
अपनी फोटो और हस्ताक्षर समेत जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
कैटेगरी के अनुसार आवेदन शुल्क जमा करें।
फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

कौन कर सकता है आवेदन?
IBPS Clerk भर्ती के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन पास होना जरूरी है। इसके अलावा पद और राज्य के अनुसार निर्धारित अन्य पात्रताएं भी पूरी करनी होंगी।

उम्मीदवार की आयु 20 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आयु की गणना 1 अगस्त 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

10 और 11 अक्टूबर को होगी Prelims परीक्षा
IBPS ने भर्ती परीक्षा का शेड्यूल भी जारी कर दिया है। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए प्रारंभिक परीक्षा 10 और 11 अक्टूबर 2026 को आयोजित की जाएगी।

परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड परीक्षा से कुछ दिन पहले जारी किया जाएगा। उम्मीदवारों को सलाह है कि एडमिट कार्ड और परीक्षा से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए IBPS की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।

Continue reading on the app

CWG 2026 Review: सिर्फ 39 मेडल... फिर भी क्यों भारत का प्रदर्शन रहा शानदार? आंकड़ों से समझिए पूरी कहानी

CWG 2026 Review: अगर सिर्फ यही आंकड़े देखे जाएं तो लगेगा कि भारत का कॉमनवेल्थ अभियान उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। लेकिन ग्लासगो 2026 की असली कहानी इन तीन आंकड़ों से कहीं बड़ी है। जिन खेलों से भारत सबसे ज्यादा पदक जीतता था, वे इस बार कार्यक्रम में थे ही नहीं। खिलाड़ियों की संख्या भी लगभग आधी थी। इसके बावजूद भारतीय दल चौथे स्थान पर पहुंचा और कई नए खेलों में अपनी ताकत साबित की।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन भारत के लिए कई मायनों में यादगार रहा। मेडल टैली में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया। पहली नजर में यह प्रदर्शन बर्मिंघम 2022 के 61 पदकों की तुलना में कमजोर दिख सकता है। 1998 कुआलालंपुर के बाद यह पहला मौका भी है, जब भारत 50 पदकों का आंकड़ा नहीं छू सका।

लेकिन क्या सिर्फ 39 मेडल देखकर यह निष्कर्ष निकाल लेना सही होगा कि भारत का प्रदर्शन खराब रहा? इस सवाल का जवाब 'नहीं' है।

दरअसल, ग्लासगो 2026 को समझने के लिए सिर्फ मेडल टैली नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों को भी देखना होगा जिनमें भारतीय दल ने यह प्रदर्शन किया। खेलों की संख्या आधी हो चुकी थी, भारत के सबसे सफल खेल कार्यक्रम से बाहर थे और खिलाड़ियों की संख्या भी पिछले संस्करण की तुलना में काफी कम थी। इसके बावजूद भारत ने न सिर्फ चौथा स्थान हासिल किया, बल्कि कई नए खेलों में अपनी मजबूत मौजूदगी भी दर्ज कराई।

ग्लासगो 2026 आखिर अलग क्यों था?
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स आर्थिक कारणों से इतिहास के सबसे छोटे संस्करणों में शामिल रहे। इस बार सिर्फ 10 खेल आयोजित किए गए, जबकि बर्मिंघम 2022 में 19 खेल खेले गए थे। यानी लगभग आधा कार्यक्रम ही बचा था।

इसका सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ा, क्योंकि जिन खेलों से भारत वर्षों से सबसे ज्यादा पदक जीतता आया है, वे इस बार शामिल ही नहीं थे।

भारत के मेडल बैंक ही कार्यक्रम से बाहर हो गए
ग्लासगो 2026 में शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और क्रिकेट को शामिल नहीं किया गया। ये वही खेल हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों में भारत की कॉमनवेल्थ सफलता की मजबूत नींव तैयार की।

यदि इतिहास पर नजर डालें तो-

  • शूटिंग : 135 ऐतिहासिक पदक
  • कुश्ती : 114
  • बैडमिंटन : 31
  • टेबल टेनिस : 28
  • हॉकी : 6

सिर्फ बर्मिंघम 2022 में इन खेलों से भारत ने 61 में से 30 पदक, जिनमें 13 गोल्ड शामिल थे। यानी भारत प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही अपने सबसे बड़े मेडल बैंक से वंचित हो चुका था।

फिर भी भारत चौथे स्थान तक कैसे पहुंचा?
यही इस अभियान की सबसे बड़ी कहानी है। जी हां, भारत ने उपलब्ध खेलों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। परिणाम यह रहा कि 39 पदकों के साथ भारत ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा के बाद चौथे स्थान पर रहा। मेजबान स्कॉटलैंड के भी 39 पदक थे, लेकिन अधिक रजत पदक होने के कारण भारत उससे आगे रहा।

मेडल संख्या भले कम रही, लेकिन प्रतिस्पर्धा के उपलब्ध अवसरों को देखते हुए यह प्रदर्शन कहीं अधिक प्रभावशाली माना जाएगा।

कम खिलाड़ी, ज्यादा असर
बर्मिंघम 2022 में भारत ने करीब 210 खिलाड़ियों का दल भेजा था, जबकि ग्लासगो 2026 में यह संख्या घटकर 123 रह गई। इनमें से 38 खिलाड़ी मेडल जीतकर लौटे। लगभग हर तीन खिलाड़ियों में से एक खिलाड़ी पोडियम तक पहुंचा।

सफलता दर लगभग 31 प्रतिशत रहा, जबकि बर्मिंघम में यह करीब 29 प्रतिशत था। दूसरे शब्दों में कहें तो भारतीय दल छोटा जरूर था, लेकिन उसका प्रभाव पहले से अधिक बड़ा रहा।

एक आंकड़ा जो पूरी कहानी बदल देता है
भारत ने इस बार शामिल 10 खेलों में 39 पदक जीते। यानी औसतन हर खेल में 3.9 पदक। कार्यक्रम छोटा होने के बावजूद यह अनुपात बताता है कि उपलब्ध अवसरों का भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतर इस्तेमाल किया।

बॉक्सिंग बनी भारत की नई ताकत
भारत के कुल 13 स्वर्ण पदकों में से 7 अकेले बॉक्सिंग से आए। यानी हर दूसरा गोल्ड लगभग इसी खेल से मिला। 14 मुक्केबाजों के दल ने 10 पदक जीते। इनमें 7 स्वर्ण और  3 रजत शामिल रहे।

महिला मुक्केबाजों ने पांच स्वर्ण जीतकर भारतीय बॉक्सिंग की नई पीढ़ी का दम दिखाया। प्रीति पवार, जैस्मिन लंबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घांघस और अरुंधति चौधरी ने गोल्ड जीते, जबकि पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच और अंकुश पांगल ने स्वर्ण अपने नाम किया।

यह कॉमनवेल्थ इतिहास में बॉक्सिंग में भारत का सबसे प्रभावशाली अभियान माना जाएगा।

जूडो ने दिया सबसे बड़ा सरप्राइज
कॉमनवेल्थ इतिहास में पहली बार भारत ने जूडो में दो स्वर्ण पदक जीते। हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने इतिहास रचा। यामिनी मौर्य ने रजत और उन्नति शर्मा ने कांस्य जीतकर यह साबित किया कि भारत अब इस खेल में भी लगातार आगे बढ़ रहा है।

एथलेटिक्स अब सिर्फ नीरज चोपड़ा तक सीमित नहीं
लंबे समय तक भारतीय एथलेटिक्स की पहचान कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों तक सीमित रही। ग्लासगो 2026 में पहली बार तस्वीर बदली हुई दिखाई दी, जहां कई खिलाड़ियों ने अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतकर भारतीय एथलेटिक्स की बढ़ती गहराई का संकेत दिया।

नीरज चोपड़ा ने जैवलिन थ्रो में रजत पदक जीतकर वापसी की। गुलवीर सिंह एक ही कॉमनवेल्थ संस्करण में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एथलीट बने।

तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में भारत का पहला कॉमनवेल्थ पदक दिलाया। दूसरी ओर सर्वेश कुशारे, मुरली श्रीशंकर, प्रवीण चित्रवेल, सीमा कालीरामना और यशवीर सिंह जैसे खिलाड़ियों ने भी यह संकेत दिया कि भारत ट्रैक एंड फील्ड में लगातार मजबूत हो रहा है।

पैरा स्पोर्ट्स अब बोनस नहीं, मेडल बैंक बन रहे हैं
ग्लासगो 2026 की सबसे सकारात्मक तस्वीर पैरा स्पोर्ट्स से सामने आई। भारत ने पैरा एथलेटिक्स में रिकॉर्ड सात पदक जीते।

शर्मिला धनखड़, दिलीप महादु गावित और सोमन राणा ने स्वर्ण जीतकर यह दिखाया कि भारतीय पैरा खिलाड़ी अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार दबदबा बना रहे हैं।

कुछ साल पहले तक जिन पदकों को बोनस माना जाता था, वे अब भारत की नियमित सफलता का हिस्सा बन चुके हैं।

मीराबाई चानू ने फिर साबित की अपनी बादशाहत
वेटलिफ्टिंग में भारत ने कुल आठ पदक जीते। सबसे बड़ी उपलब्धि रही मीराबाई चानू का लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक। उन्होंने एक बार फिर साबित किया कि बड़े मंच पर उनसे बेहतर प्रदर्शन करना आसान नहीं है।

अगर शूटिंग और कुश्ती होती तो क्या तस्वीर बदल जाती?
इस सवाल का जवाब आंकड़े देते हैं। बर्मिंघम 2022 में जिन खेलों को इस बार बाहर रखा गया, उनसे भारत को 30 पदक मिले थे।

यानी यदि वे खेल भी कार्यक्रम का हिस्सा होते, तो भारत के 60 या उससे अधिक पदकों तक पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था।

इसी वजह से सिर्फ 39 पदकों के आधार पर ग्लासगो अभियान को कमजोर कहना उचित नहीं होगा।

CWG 2026 के पांच सबसे बड़े स्टार

  • मीराबाई चानू - लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड।
  • भारतीय बॉक्सिंग टीम - 10 पदक और 7 गोल्ड।
  • गुलवीर सिंह - एक संस्करण में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एथलीट।
  • हर्ष सिंह और अस्मिता डे -  जूडो में ऐतिहासिक गोल्ड।
  • भारतीय पैरा एथलीट - रिकॉर्ड सात पदकों के साथ नया अध्याय।

एक नजर में भारत का प्रदर्शन

श्रेणी आंकड़ा
कुल पदक 39
गोल्ड 13
सिल्वर 17
ब्रॉन्ज 9
मेडल टैली चौथा स्थान
कुल खिलाड़ी 123
मेडल विजेता खिलाड़ी 38
सफलता दर 31%
सबसे सफल खेल बॉक्सिंग (10 मेडल)
वेटलिफ्टिंग  8 मेडल
एथलेटिक्स + पैरा 16 मेडल
जूडो 4 मेडल

इस प्रदर्शन से क्या संकेत मिले?
ग्लासगो 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय खेल अब केवल शूटिंग, कुश्ती या बैडमिंटन जैसे पारंपरिक खेलों पर निर्भर नहीं हैं। बॉक्सिंग, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा स्पोर्ट्स में बढ़ती गहराई बताती है कि भारत का मेडल आधार पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो चुका है। यही बदलाव भविष्य के ओलंपिक और अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए सबसे सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

अहमदाबाद में प्रस्तावित कॉमनवेल्थ गेम्स 2030
भारत के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम है क्योंकि अगला कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 में अहमदाबाद में प्रस्तावित है। ऐसे में ग्लासगो में उभरी नई पीढ़ी घरेलू मैदान पर भारत की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकती है।

निष्कर्ष
ग्लासगो 2026 ने एक बात साफ कर दी  है कि भारत की खेल ताकत अब कुछ चुनिंदा खेलों तक सीमित नहीं रही। पारंपरिक मेडल बैंक कार्यक्रम से बाहर होने के बावजूद भारतीय दल ने चौथा स्थान हासिल किया और कई नए खेलों में अपनी पहचान बनाई। इसलिए 39 पदकों का यह अभियान केवल एक संख्या नहीं, बल्कि भारतीय खेलों की बदलती दिशा, बढ़ती गहराई और भविष्य की संभावनाओं का संकेत है। अगर यही रफ्तार बरकरार रही, तो अहमदाबाद 2030 में भारत अपने अब तक के सबसे सफल कॉमनवेल्थ अभियान की नींव रख सकता है।

FAQ
Q1. CWG 2026 में भारत ने कितने मेडल जीते?

भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज सहित कुल 39 मेडल जीते।

Q2. CWG 2026 में भारत का स्थान क्या रहा?
भारत मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहा।

Q3. भारत के कम मेडल क्यों आए?
इस बार गेम्स में सिर्फ 10 खेल आयोजित हुए। शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और क्रिकेट जैसे भारत के मजबूत खेल कार्यक्रम में शामिल नहीं थे।

Q4. भारत का सबसे सफल खेल कौन सा रहा?
बॉक्सिंग भारत का सबसे सफल खेल रहा, जिसमें भारतीय मुक्केबाजों ने 10 मेडल जीते, जिनमें 7 गोल्ड शामिल हैं।

Q5. CWG 2026 में भारत के सबसे बड़े सकारात्मक पहलू क्या रहे?
बॉक्सिंग का दबदबा, जूडो में ऐतिहासिक सफलता, एथलेटिक्स और पैरा स्पोर्ट्स में रिकॉर्ड प्रदर्शन तथा कम खिलाड़ियों के बावजूद बेहतर मेडल सफलता दर भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियां रहीं।

Continue reading on the app

  Sports

ENG vs PAK: मोहम्मद अब्बास की घातक गेंदबाजी, इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में पाकिस्तान की शानदार वापसी

इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट मैच के पहले दिन पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने दमदार वापसी कर ली है. दिन के खेल की समाप्ति तक पाकिस्तान ने 248 रन के स्कोर इंग्लैंड के 9 विकेट गिरा दिए हैं. इंग्लैंड के लिए खेल के दूसरे दिन गस एटकिंसन और जोश टंग पारी को आगे बढ़ाएंगे. गेंदबाजी में पाकिस्तान के लिए पहले दिन सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए. Fri, 28 Aug 2026 06:05:54 +0530

  Videos
See all

Children Viral Video : स्कूल जाने की राह में कीचड़ ही कीचड़! | Viral Shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-28T00:45:22+00:00

Rakshabandhan 2026 Date: राखी पर ग्रहण का असर? | Rakshabandhan Shubh Muhurt | Chandra Grahan | N18V #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-28T00:45:15+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers