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Sports Car: एस्टन मार्टिन वैलेन 3.4 सेकेंड में पकड़ेगी 0-100 kmph की स्पीड; जानें कीमत

Sports Car: दुनिया की लग्जरी और परफॉर्मेंस कार निर्माता एस्टन मार्टिनने ग्लोबल मार्केट में अपनी नई सुपरकार वैलेन को पेश कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, यह उसकी अब तक की सबसे ताकतवर कार है। इसे बेहद सीमित संख्या में तैयार किया जाएगा और इसकी सिर्फ 150 यूनिट्स ही बिक्री के लिए उपलब्ध होंगी। आइए जानते हैं इस कार के इंजन, फीचर्स और कीमत की पूरी जानकारी।

5.2 लीटर इंजन से 850 HP की पावर
एस्टन मार्टिन वैलेन में 5.2 लीटर ट्विन-टर्बो पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन 850 हॉर्स पावर और 1,000 न्यूटन मीटर का टॉर्क जनरेट करता है। इंजन को 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है।

परफॉर्मेंस के मामले में भी यह कार काफी दमदार है। वैलेन महज 3.4 सेकेंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है, जबकि इसकी टॉप स्पीड 345 किलोमीटर प्रति घंटा तक है।

हल्के वजन के लिए खास मटेरियल का इस्तेमाल
कार के वजन को कम रखने के लिए इसमें कार्बन फाइबर, एल्यूमीनियम, टाइटेनियम और मैग्नीशियम जैसी हल्की और मजबूत सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह कार Aston Martin Vanquish की तुलना में करीब 110 किलोग्राम हल्की है।

वैलेन को कंपनी ने अपनी दूसरी कारों की तुलना में ज्यादा स्पोर्टी और आक्रामक डिजाइन दिया है, जो इसके हाई-परफॉर्मेंस कैरेक्टर को दर्शाता है।

मिलते हैं ये प्रीमियम फीचर्स
एस्टन मार्टिन वैलेन में एलईडी डीआरएल, एलईडी हेडलाइट्स, 21-इंच अलॉय व्हील्स और एलईडी टेललाइट्स दिए गए हैं। इसके अलावा कार में 170 लीटर का बूट स्पेस, टाइटेनियम एग्जॉस्ट और स्पोर्ट्स प्लस सीट्स भी मिलती हैं।

इंटीरियर में 10.25-इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 10.25-इंच इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। इसमें पुश-बटन स्टार्ट/स्टॉप, 360-डिग्री कैमरा, वायरलेस फोन चार्जर और 15-स्पीकर Bowers & Wilkins ऑडियो सिस्टम जैसे फीचर्स भी शामिल हैं।

सिर्फ 150 यूनिट्स होंगी तैयार
एस्टन मार्टिन वैलेन को लिमिटेड प्रोडक्शन मॉडल के तौर पर पेश किया गया है। कंपनी इसकी सिर्फ 150 यूनिट्स तैयार करेगी। इसकी कीमत 19.46 करोड़ रुपये रखी गई है। कार की डिलीवरी 2027 से शुरू होने की उम्मीद है।

(मंजू कुमारी)

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Car Maintenance: समय पर सर्विस के साथ इन पार्ट्स को भी बदलें, वरना बढ़ सकती है परेशानी

Car Maintenance: भारत में लाखों लोग रोजाना अपनी कार का इस्तेमाल करते हैं। कार को लंबे समय तक बेहतर कंडीशन में रखने के लिए समय-समय पर सर्विस करवाना बेहद जरूरी है। हालांकि, सिर्फ सर्विस करवाना ही काफी नहीं होता। कार के कई ऐसे पार्ट्स भी हैं, जिन्हें तय समय या किलोमीटर के बाद चेक करवाना और जरूरत पड़ने पर बदलना जरूरी होता है। ऐसा न करने पर कार की परफॉर्मेंस प्रभावित होने के साथ भविष्य में बड़ी परेशानी भी आ सकती है। आइए जानते हैं किन पार्ट्स को कब बदलना बेहतर रहता है।

समय पर सर्विस करवाना जरूरी
अगर आप अपनी कार को लंबे समय तक बिना परेशानी के चलाना चाहते हैं तो उसकी सर्विस समय पर करवाना जरूरी है। कई लोग सर्विस को टालते रहते हैं, जिसका असर धीरे-धीरे कार के इंजन, ट्रांसमिशन और दूसरे जरूरी पार्ट्स पर पड़ सकता है।

पार्ट्स की जांच और रिप्लेसमेंट भी जरूरी
कार की नियमित सर्विस के दौरान जरूरी पार्ट्स की स्थिति की जांच करवानी चाहिए। कुछ पार्ट्स समय के साथ घिस जाते हैं या उनकी क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में इन्हें सही समय पर बदलने से कार की परफॉर्मेंस और सुरक्षा बेहतर बनी रहती है।

कब बदलें स्पार्क प्लग?
पेट्रोल कारों में स्पार्क प्लग इंजन में ईंधन को जलाने के लिए जरूरी चिंगारी पैदा करता है। स्पार्क प्लग की स्थिति को करीब 40 हजार किलोमीटर पर जांच करवाना बेहतर होता है। अगर इसकी कंडीशन खराब हो या जरूरत महसूस हो तो इसे बदल देना चाहिए। हालांकि, सही रिप्लेसमेंट इंटरवल कार के मॉडल और निर्माता की सिफारिश के अनुसार अलग हो सकता है।

वाइपर ब्लेड को भी नजरअंदाज न करें
बारिश के दौरान विंडशील्ड से पानी साफ करने और बेहतर विजिबिलिटी बनाए रखने में वाइपर ब्लेड की अहम भूमिका होती है। गर्मी या सर्दी के मौसम में इनका इस्तेमाल कम होने के बावजूद इनकी कंडीशन पर ध्यान देना चाहिए।

खराब या घिसे हुए वाइपर ब्लेड विंडशील्ड से पानी ठीक तरह साफ नहीं कर पाते। इससे विजिबिलिटी कम होने के साथ कांच पर स्क्रैच या निशान भी पड़ सकते हैं। इसलिए वाइपर ब्लेड को करीब 10 से 12 हजार किलोमीटर के अंतराल पर बदलने पर विचार करना चाहिए। अगर ब्लेड से आवाज आने लगे या पानी ठीक से साफ न हो, तो इसे इससे पहले भी बदल दें।

ट्रांसमिशन फ्लूइड भी है जरूरी
कार में गियर को सुचारू रूप से काम करने में ट्रांसमिशन फ्लूइड की अहम भूमिका होती है। मैनुअल कार में इसे करीब 60 हजार किलोमीटर पर चेक करवाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर बदल देना चाहिए। सही समय पर ट्रांसमिशन फ्लूइड बदलने से गियर शिफ्टिंग बेहतर रहती है और ट्रांसमिशन की लाइफ बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

हालांकि, ट्रांसमिशन फ्लूइड बदलने का सही अंतराल कार के मॉडल, इंजन और निर्माता की गाइडलाइन के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए कार की ओनर मैनुअल में दिए गए सर्विस शेड्यूल को प्राथमिकता देना बेहतर है।

(मंजू कुमारी)

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  Sports

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