MP Board Exam Pattern 2026-27: मध्य प्रदेश बोर्ड ने बदला 9वीं से 12वीं का परीक्षा पैटर्न, अब सीबीएसई की तर्ज पर होंगे सवाल
MP Board exam pattern 2026-27: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपनी परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। बोर्ड ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए सीबीएसई (CBSE) की तर्ज पर नया प्रश्न पत्र प्रारूप पेश किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों में रटने की प्रवृत्ति को कम करके तार्किक तर्क (लॉजिकल रीजनिंग) और विषय की समझ पर अधिक जोर देना है।
एमपीबीएसई के सचिव बुद्धेश कुमार वैद्य ने स्पष्ट किया कि कक्षा 9वीं से 12वीं तक की परीक्षाएं अब सीबीएसई मानकों पर आधारित होंगी और इनमें तार्किक व विश्लेषणात्मक प्रश्न शामिल किए जाएंगे। हालांकि, बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि एमपी बोर्ड ने सीबीएसई के सिलेबस को पूरी तरह अपना लिया है, बल्कि राज्य बोर्ड अपने स्वयं के पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली के साथ ही आगे बढ़ेगा। बोर्ड ने अपनी आधिकारिक एकेडमिक्स पोर्टल पर सत्र 2026-27 का नया पाठ्यक्रम और विषयवार मार्किंग स्कीम भी अपलोड कर दी है।
कक्षा 10वीं के पैटर्न में क्या हुआ बदलाव?
नया संशोधित पैटर्न आने के बाद छात्रों को चुनिंदा तैयारी करने और रटकर परीक्षा पास करने का मौका कम मिलेगा, जिससे पूरे पाठ्यक्रम को गहराई से पढ़ना अनिवार्य हो गया है।
कक्षा 10वीं के लिए संशोधित पैटर्न के तहत लिखित परीक्षा 75 अंकों की होगी, जिसमें 30 अंक वस्तुनिष्ठ (ऑब्जेक्टिव) प्रकार के प्रश्नों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस पेपर में 2-2 अंकों के 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न भी पूछे जाएंगे। इसके अलावा, दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या को चार से घटाकर तीन कर दिया गया है, जबकि बिना किसी पूर्व विकल्प व्यवस्था के तीन लघु उत्तरीय प्रश्न भी पूछे जाएंगे।
कक्षा 12वीं की परीक्षा का नया स्वरूप
गैर-प्रायोगिक (नॉन-प्रैक्टिकल) विषयों के लिए कक्षा 12वीं की लिखित परीक्षा 80 अंकों की होगी। इस प्रश्न पत्र में 10 अति लघु उत्तरीय, चार लघु उत्तरीय और चार दीर्घ उत्तरीय प्रश्न शामिल होंगे। वहीं, जिन विषयों में प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन (इंटरनल असेसमेंट) का प्रावधान है, उनमें यह प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रहेगी।
छात्रों और शिक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
परीक्षा पैटर्न में हुए इस बदलाव को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षकों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कक्षा 11 की छात्रा सुनिधि मंडोली ने रटने की संस्कृति से दूर ले जाने वाले इस कदम का स्वागत किया है। हालांकि, कक्षा 10 की छात्रा जिनिशा जैन ने आशंका जताई है कि इससे प्रश्न पत्र कठिन हो सकते हैं, जबकि कक्षा 9 के छात्र अमन के. ने कहा कि वह अभी इस बदलाव के परिणामों को लेकर असमंजस में हैं।
दूसरी ओर, स्कूल की प्रधानाचार्य सुनंदा यादव ने इस बदलाव को एक सकारात्मक कदम बताया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इसके सफल क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों के मिले-जुले और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता होगी।
Foreign Assets Disclosure Scheme: विदेशी संपत्ति छिपाई है? 16 अगस्त से मिलेगा खुलासा करने का मौका,जानें कैसे
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स डिस्क्लोजर स्कीम, 2026 के नियम जारी कर दिए। यह एक बार मिलने वाली सुविधा है, जिसके तहत पात्र करदाता अपनी कुछ अघोषित विदेशी संपत्ति या आय की जानकारी सरकार को दे सकेंगे। इस स्कीम की ऑनलाइन विंडो 16 अगस्त से 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी।
किन लोगों को स्कीम मिलेगा फायदा
यह स्कीम उन लोगों के लिए है, जिन्होंने विदेशी संपत्ति या आय को इनकम टैक्स रिटर्न में घोषित नहीं किया। इसमें निवासी, गैर-निवासी और रेसिडेंट बट नॉट ऑर्डिनेरली रेसिडेंट (RNOR) भी शामिल हैं, बशर्ते संबंधित आय या संपत्ति वाले साल में वे भारत के निवासी रहे हों।
करदाता इस स्कीम का लाभ तब ले सकते हैं, जब उन्होंने- इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल ही नहीं किया हो। इसके अलावा दूसरी शर्त यह है कि रिटर्न दाखिल किया हो, लेकिन विदेशी संपत्ति या आय की जानकारी नहीं दी हो। वहीं, ऐसी संपत्ति या आय हो, जिसे सामान्य स्थिति में असेसमेंट से बची हुई आय माना जा सकता है। घोषणा फॉर्म-1 के जरिए ऑनलाइन करनी होगी।
दो तरह की विदेशी संपत्ति पर अलग नियम
स्कीम में विदेशी संपत्ति और आय को दो श्रेणियों में बांटा गया है।
पहली श्रेणी: ऐसी विदेशी संपत्ति या आय, जिस पर पहले टैक्स नहीं दिया गया और उसे रिटर्न में भी नहीं दिखाया गया। इसकी कुल सीमा 1 करोड़ रुपए है। इस पर 30% टैक्स और उतनी ही अतिरिक्त राशि यानी प्रभावी तौर पर 60% भुगतान करना होगा।
उदाहरण के तौर पर अगर विदेशी बैंक खाते में 60 लाख रुपए और 20 लाख रुपए की अघोषित विदेशी आय है, तो कुल भुगतान 48 लाख रुपए तक हो सकता है।
दूसरी श्रेणी: ऐसी विदेशी संपत्ति, जिस पर पहले टैक्स दिया जा चुका है या संपत्ति उस समय खरीदी गई थी जब व्यक्ति भारत का निवासी नहीं था, लेकिन रिटर्न में उसका विवरण नहीं दिया गया। इसमें संपत्ति की सीमा 5 करोड़ रुपए है और केवल 1 लाख रुपए की फीस देनी होगी।
5 करोड़ से ज्यादा संपत्ति वालों को लाभ नहीं
जिस करदाता की संबंधित विदेशी संपत्ति का मूल्य 5 करोड़ रुपए से ज्यादा है, वह इस स्कीम का फायदा नहीं उठा सकेगा। संपत्ति का मूल्यांकन आम तौर पर खरीद कीमत और 31 मार्च 2026 के बाजार मूल्य में जो ज्यादा होगा, उसके आधार पर किया जाएगा।
टैक्स जमा करने के लिए मिलेगा समय
फॉर्म-1 की जांच के बाद टैक्स विभाग एक महीने के भीतर फॉर्म-2 में भुगतान की राशि बताएगा। इसके बाद करदाता को दो महीने में भुगतान करना होगा। जरूरत पड़ने पर दो महीने की अतिरिक्त मोहलत मिल सकती है, लेकिन इस पर 1% प्रतिमाह साधारण ब्याज देना होगा। चार महीने की अधिकतम अवधि में भुगतान नहीं करने पर घोषणा का लाभ खत्म हो जाएगा।
विदेशी संपत्ति की घोषणा के बाद क्या राहत मिलेगी
सही तरीके से घोषणा और भुगतान करने पर करदाता को ब्लैक मनी एक्ट, 2015 के तहत आगे के टैक्स, पेनल्टी और अभियोजन से राहत मिलेगी। घोषित रकम को कुल आय में भी शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि अपराध की कमाई से जुड़ी विदेशी संपत्ति या मनी लॉन्ड्रिंग जांच वाली संपत्ति पर यह स्कीम लागू नहीं होगी।
(प्रियंका कुमारी)
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