DIIs ने दिखाया दम: FIIs की बिकवाली से 347% ज्यादा पैसा लगाया, 1.81 लाख करोड़ का आउटफ्लो संभाला
भारतीय शेयर बाजार में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DIIs मजबूत सहारा बने। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने पूरे वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 8.09 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 1.81 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यानी डीआईआई का निवेश FIIs की बिकवाली से करीब 347% ज्यादा रहा।
विदेशी बिकवाली का घरेलू निवेशकों ने दिया जवाब
AMFI-Crisil Factbook 2026 के मुताबिक, DIIs ने FIIs की 1.81 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली को लगभग पूरी तरह संभाल लिया। रिपोर्ट ने इसे घरेलू संस्थागत निवेशकों की ‘उल्लेखनीय मजबूती’ बताया है। इसमें म्यूचुअल फंड की भूमिका सबसे अहम रही।
इस बदलाव से भारतीय शेयर बाजार में घरेलू पूंजी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। अब विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री का असर पहले की तुलना में घरेलू निवेशकों की मजबूत मौजूदगी से कुछ हद तक संतुलित हो रहा है।
शेयर बाजार में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, NSE पर सूचीबद्ध कंपनियों के फ्री-फ्लोट मार्केट कैप में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी मार्च 2021 के करीब 15% से बढ़कर मार्च 2026 में लगभग 23% हो गई। इसी अवधि में FIIs की हिस्सेदारी घटी है। इससे विदेशी निवेशकों और घरेलू म्यूचुअल फंड के बीच का अंतर भी कम हुआ है।
इस बदलाव के पीछे रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और SIP को बड़ी वजह माना गया है। SIP के जरिए हर महीने बाजार में लगातार पैसा आता रहा, जिससे घरेलू बाजार को एक स्थिर निवेश आधार मिला।
SIP में रिकॉर्ड निवेश
वित्त वर्ष 2026 में मंथली SIP निवेश रिकॉर्ड 32,087 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं SIP से जुड़ी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 14.83 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई। यह म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल संपत्ति का करीब पांचवां हिस्सा है।
खास बात यह है कि शेयर बाजार में तेज गिरावट के दौर में भी SIP निवेश जारी रहा। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव के बजाय लंबे समय में संपत्ति बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
एक साल में जुड़े 78 लाख नए निवेशक
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी। मार्च 2025 में यूनिक म्यूचुअल फंड निवेशक 5.36 करोड़ थे, जो मार्च 2026 में बढ़कर 6.14 करोड़ हो गए। यानी एक साल में करीब 78 लाख नए निवेशक जुड़े।
इसी दौरान म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल AUM 65.74 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 73.73 लाख करोड़ रुपये हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, बाजार से जुड़ी बचत अब बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। Tier-2, Tier-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों से भी निवेश बढ़ रहा है।
घरेलू पैसा बन रहा बाजार का सहारा
Factbook के अनुसार, घरेलू निवेश बाजार में आने वाली विदेशी पूंजी के उतार-चढ़ाव के सामने एक स्थिर आधार तैयार कर रहा है। SIP, रिटेल निवेशकों और म्यूचुअल फंड की बढ़ती पहुंच से DIIs की भूमिका आगे भी मजबूत होने की उम्मीद है। इससे घरेलू बचत भारतीय शेयर बाजार की स्थिरता और लंबे समय में पूंजी निर्माण का बड़ा स्रोत बन सकती है।
(प्रियंका कुमारी)
EPFO का अभियान: 17 साल से पीएफ से बाहर कर्मचारियों को मिलेगा मौका, जानें कब तक करा सकते रजिस्ट्रेशन
ईपीएफओ ने उन कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए इम्प्लॉई एनरॉलमेंट कैंपेन 2026 शुरू किया है, जो पात्र होने के बावजूद अब तक ईपीएफ से नहीं जुड़े हैं। संस्थानों को पुराने रिकॉर्ड दुरुस्त करने और ऐसे कर्मचारियों का पंजीकरण कराने का विशेष मौका दिया गया है।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, यह योजना 29 जून 2026 से लागू है और 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। इसके तहत 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच EPF कवरेज से बाहर रहे पात्र कर्मचारियों को योजना में शामिल किया जा सकता है।
इस अभियान का मकसद कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF), पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से जोड़ना है। साथ ही, कंपनियों को पुराने रिकॉर्ड और अनुपालन से जुड़ी कमियों को स्वेच्छा से ठीक करने का रास्ता दिया गया है।
किन कर्मचारियों को ईपीएफ के अभियान का मिलेगा लाभ?
योजना के तहत नियोक्ता उन कर्मचारियों की घोषणा कर सकते हैं, जो तय अवधि के दौरान EPF कवरेज से बाहर रह गए थे। इसके लिए कर्मचारी का घोषणा की तारीख पर जीवित होना और उसी संस्थान में सक्रिय रूप से काम करना जरूरी है।
EPFO ने संस्थानों को सलाह दी है कि वे अपने कर्मचारियों और वेतन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड की जांच करें। इससे पात्र कर्मचारियों की पहचान की जा सकेगी और उनका पंजीकरण समय पर कराया जा सकेगा।
पुराने बकाये में मिलेगी राहत
अभियान में पुराने अनुपालन से जुड़ी कुछ राहत भी दी गई है। अगर पहले कर्मचारी के वेतन से उसका हिस्सा काटा ही नहीं गया था तो तय शर्तों के तहत कर्मचारी के हिस्से की राशि माफ की जा सकती है। इससे पुराने मामलों को नियमित करने में संस्थानों पर पड़ने वाला बोझ कम होगा।
पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी
EPFO ने इस अभियान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रखी है। संस्थानों को पंजीकरण और भुगतान से जुड़ी सभी औपचारिकताएं तय ऑनलाइन पोर्टल के जरिए पूरी करनी होंगी।
हर घोषित कर्मचारी के लिए उमंग ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन से UAN बनाना होगा। इसके बाद संस्थान को सामान्य इलेक्ट्रॉनिक चालान-कम-रेसिप्ट-रिटर्न (ECR) प्रणाली के जरिए जरूरी अंशदान जमा करना होगा।
EPFO चला रहा जागरूकता अभियान
EPFO ने नियोक्ताओं, कर्मचारियों, ठेकेदारों और उद्योग से जुड़े अन्य लोगों को योजना की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। केंद्र और राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर इसकी जानकारी ज्यादा से ज्यादा प्रतिष्ठानों तक पहुंचाई जा रही है।
EPFO ने संस्थानों से कहा है कि वे 31 अक्टूबर 2026 की अंतिम तारीख से पहले सभी घोषणाएं और जरूरी भुगतान पूरा कर लें।
(प्रियंका कुमारी)
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