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Amit Shah ने Nepal Flood पर UP और Bihar को किया सतर्क, NDRF तैनात

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश और बिहार के मुख्यमंत्रियों से बात कर दोनों राज्यों के निचले इलाकों में बाढ़ के खतरे को लेकर चर्चा की। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। केंद्र सरकार नेपाल में आई अचानक बाढ़ से उत्पन्न स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है।

केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा जारी परामर्श के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के निकट अचानक आई बाढ़ के कारण नेपाल में भारतीय सीमा से लगभग 160 किमी दूर फुरके खोला में त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। इस बाढ़ का असर भारत में गंडक नदी के निचले इलाकों में भी पड़ सकता है। आयोग ने कहा है कि नेपाल की ओर स्थित जलाशयों में जलस्तर कम हो रहा है और स्थिति नियंत्रण में है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि घबराने जैसी कोई स्थिति पैदा नहीं हुई है। इसने कहा, ‘‘बाढ़ का असर भारत में गंडक नदी के निचले इलाकों तक पहुंचने की आशंका है।’’ मंत्रालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार, दोनों को सतर्क रहने और स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि संभावित बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को भी तैनात किया गया है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘बिहार और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों ने भारत-नेपाल सीमा के निकट रहने वाले स्थानीय भारतीय समुदायों के लिए आवश्यक निकासी और अन्य सहायता जैसे कदम उठाए हैं।’’ इस आपदा में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए शाह ने ‘एक्स’ पर कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत सरकार नेपाल के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, ‘‘नेपाल में आई बाढ़ की विभीषिका अत्यंत दुखद है।’’ शाह ने कहा, ‘‘मैंने नेपाल में आई इस आपदा को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बात की है। जिन सीमावर्ती इलाकों में इसका असर पड़ने की आशंका है, वहां स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव दलों के साथ-साथ एनडीआरएफ को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।’’ गृह मंत्रालय ने कहा कि गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय (एमईए), जल शक्ति मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों से जुड़ी जानकारी और मदद के लिए हेलप्लाइन नंबर जारी किए। तिब्बत की सीमा से लगे मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई और कम से कम 100 लोगों की मौत हो गई, वहीं 133 भारतीय नागरिक समेत लगभग 500 लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई, पुल बह गए और कम से कम 12 जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं।

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ईरान के साथ Diplomacy बेअसर! Netanyahu ने किया Trump के Economic Pressure कैंपेन का खुला समर्थन

ईरान को लेकर इजरायल और अमेरिका का रुख एक बार फिर सख्त नजर आ रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के मौजूदा नेतृत्व के साथ किसी कूटनीतिक समझौते की संभावना पर गंभीर संदेह जताया है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान पर बढ़ाए जा रहे आर्थिक दबाव का भी समर्थन किया है। नेतन्याहू ने मंगलवार देर रात एक कार्यक्रम में यह बात कही है।

नेतन्याहू ने बताया कि हाल ही में ट्रंप के साथ उनकी मुलाकात के दौरान ईरान के साथ बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर भी चर्चा हुई थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि ईरान के मौजूदा नेतृत्व के साथ किसी समझौते तक पहुंचना उन्हें मुश्किल लगता है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व के लिए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इस समूह के साथ कोई समझौता हो सकता है।

गौरतलब है कि अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति तैयार की है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस सप्ताह तेहरान की आर्थिक गतिविधियों को कमजोर करने के लिए नए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ वित्तीय लेनदेन में मदद करने वाली संस्थाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

बेसेंट ने चेतावनी दी कि ईरान की ओर से धन को अवैध तरीके से स्थानांतरित करने में मदद करने वाली किसी भी संस्था को अमेरिकी डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था से बाहर किया जा सकता है। अमेरिका का यह कदम उन देशों और संस्थाओं पर भी दबाव बढ़ा सकता है जो ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह आर्थिक दबाव ईरान के साथ चल रहे लंबे सैन्य टकराव के बीच बढ़ाया गया है। संघर्ष को करीब छह महीने हो चुके हैं, लेकिन स्थिति किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है। शांति वार्ता भी ठहरी हुई है और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

ईरान ने अमेरिका की नई रणनीति को लेकर ज्यादा चिंता नहीं जताई है। ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनीजादेह ने कहा कि उनका देश इस तरह के कदमों की लंबे समय से उम्मीद कर रहा था और सरकार ने इन परिस्थितियों से निपटने के लिए दो साल की योजना तैयार कर रखी है। उन्होंने अमेरिकी दबाव के बावजूद ईरान के तैयार रहने का दावा किया है।

बता दें कि ईरान पहले भी कई वर्षों तक अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करता रहा है। इसके बावजूद उसने अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय वित्तीय माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए अपना व्यापार जारी रखा है। युद्ध शुरू होने से पहले भी ईरान प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल निर्यात कर रहा था, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा चीन को जाता था।

ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका के आर्थिक कदम, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और रुकी हुई कूटनीतिक बातचीत यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव कम होता है या टकराव और गहराता है।

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पिछला एशिया कप 2 साल पहले 2024 में खेला गया था, जिसमें फाइनल में श्रीलंका ने भारत को हराकर पहली बार खिताब जीता था. इस बार टीम इंडिया वो हिसाब बराबर करने के इरादे से उतरेगी. Fri, 28 Aug 2026 00:02:51 +0530

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