LPG ग्राहकों को मिली बड़ी राहत, सरकार ने बढ़ाई EKYC की अंतिम तारीख; नहीं रुकेगी सब्सिडी
LPG Cylinder Updates: देशभर के करोड़ों रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद राहत देने वाली सूचना सामने आई है. अगर आपके घर में भी एलपीजी गैस कनेक्शन है और आप अब तक अपनी EKYC प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं, तो अब आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है. सरकार और तेल कंपनियों ने मिलकर उपभोक्ताओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए EKYC कराने की अंतिम तारीख को आगे बढ़ा दिया है. नई समय सीमा 31 अगस्त तय की गई है. गैस एजेंसियों पर उमड़ रही भारी भीड़ और सर्वर की धीमी गति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि हर एक जायज उपभोक्ता आसानी से अपना सत्यापन पूरा करवा सके.
सत्यापन न कराने पर क्या आएंगी दिक्कतें?
कई उपभोक्ताओं के मन में यह डर बना हुआ है कि तय तारीख तक सत्यापन न होने पर उनका गैस कनेक्शन पूरी तरह बंद हो जाएगा. हालांकि ऐसा नहीं है कि कनेक्शन सीधे तौर पर रद्द कर दिया जाएगा, लेकिन प्रक्रिया पूरी न होने की स्थिति में रोजमर्रा के काम में कई बड़ी अड़चनें आ सकती हैं. सबसे बड़ा असर घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग पर पड़ेगा. अगर आपका विवरण सत्यापित नहीं होगा, तो नई बुकिंग स्वीकार करने में देरी हो सकती है और डिलीवरी के वक्त भी तकनीकी रुकावटें आ सकती हैं. इसलिए बिना किसी लापरवाही के समय रहते इस प्रक्रिया को पूरा करना समझदारी है.
सब्सिडी के लाभ पर पड़ सकता है सीधा असर
रसोई गैस पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का सीधा नाता सही और सत्यापित बैंक खाते व आधार विवरण से होता है. जिन उपभोक्ताओं का सत्यापन पूरा नहीं होगा, उनकी मिलने वाली सब्सिडी अस्थायी तौर पर रोकी जा सकती है. इसका मतलब यह हुआ कि जब तक आप अपनी पहचान की पुष्टि नहीं करेंगे, तब तक आपको बिना सब्सिडी वाली पूरी कीमत चुकानी पड़ सकती है. सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होते ही सुविधाएं फिर से पहले की तरह सामान्य रूप से चालू कर दी जाएंगी. इसलिए अपनी जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ से बचने के लिए तुरंत यह काम पूरा कर लेना चाहिए.
EKYC अभियान चलाने के पीछे मुख्य वजह
सरकार की ओर से इस बड़े स्तर पर सत्यापन अभियान को चलाने का एक ठोस कारण है. इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू गैस कनेक्शन केवल वास्तविक उपभोक्ताओं के पास ही रहे. अक्सर देखा गया है कि घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाले सस्ते सिलेंडरों का गलत तरीके से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने लगता है. इसके अलावा कई ऐसे कनेक्शन भी सिस्टम में दर्ज रहते हैं जो लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहे या जिनके धारक का पता बदल चुका है. इस अभियान के जरिए फर्जी और अवैध कनेक्शनों को पूरी तरह से छांटकर बाहर किया जा रहा है.
घर बैठे और एजेंसी जाकर कैसे पूरा करें काम?
उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से इस काम को आसानी से निपटा सकते हैं. अगर आप घर बैठे यह काम करना चाहते हैं, तो इसके लिए संबंधित गैस कंपनी के आधिकारिक मोबाइल ऐप का सहारा लिया जा सकता है. इसके साथ ही चेहरे की पहचान के लिए आधार फेस आरडी ऐप का उपयोग किया जाता है. इस तरीके को अपनाने के लिए जरूरी है कि आपके आधार कार्ड के साथ आपका चालू मोबाइल नंबर पहले से जुड़ा हुआ हो, ताकि ओटीपी सत्यापन में कोई रुकावट न आए. जो लोग तकनीक के इस्तेमाल में सहज नहीं हैं, वे सीधे अपनी नजदीकी गैस एजेंसी पर जाकर बायोमेट्रिक मशीन के जरिए अंगूठा लगाकर कुछ ही मिनटों में अपना सत्यापन करवा सकते हैं.
यह भी पढ़ें: LPG आपूर्ति को मिलेगी रफ्तार: छह राज्यों में 1,800 किमी पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी
नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद NDRF हाई अलर्ट, बिहार-UP में बढ़ाई गई निगरानी
नेपाल में फ्लैश फ्लड की घटना के बाद भारत में भी संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) हाई अलर्ट पर है. केंद्रीय जल आयोग (CWC) की एडवाइजरी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में चीन सीमा के पास ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की आशंका के बीच त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
जानकारी के मुताबिक, नेपाल के फुर्के खोला इलाके में त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि हुई है. यह स्थान भारत-नेपाल सीमा से करीब 160 किलोमीटर दूर है. आशंका है कि बाढ़ की यह लहर आगे चलकर गंडक नदी में पहुंच सकती है. इसके मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा से लगे बिहार और उत्तर प्रदेश के इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने और गंडक नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है.
बिहार में NDRF की 2 अतिरिक्त टीमें तैनात
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड को देखते हुए बिहार में संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए NDRF ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. बिहार के मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से गंडक नदी के आसपास की स्थिति का जायजा लिया है.
स्थिति के आकलन के बाद पश्चिम चंपारण और मुजफ्फरपुर में NDRF की 2 अतिरिक्त टीमें तैनात करने के लिए भेजी गई हैं. इसके साथ ही बिहार में अब कुल 9 NDRF टीमें तैनात हैं. राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर NDRF की अतिरिक्त टीमें भी भेजी जाएंगी.
कुशीनगर में भी अतिरिक्त NDRF टीम तैनात
उत्तर प्रदेश में भी संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है. गंडक नदी के नजदीक होने के कारण कुशीनगर जिले के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए यहां NDRF की एक अतिरिक्त टीम तैनात की गई है.
बाढ़ चेतावनी और राहत-बचाव अभियान यानी Flood Warning and Response (FWR) के लिए उत्तर प्रदेश में कुल 11 NDRF टीमें तैनात हैं.
राज्यों और CWC के साथ NDRF का समन्वय
NDRF बिहार और उत्तर प्रदेश सरकारों के साथ-साथ केंद्रीय जल आयोग के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है. गंडक नदी में संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
NDRF की अतिरिक्त टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्टैंडबाय पर रखी गई हैं. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बल और संसाधनों को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा सकता है.
फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस गंडक नदी के जलस्तर की निगरानी, संभावित बाढ़ की पूर्व चेतावनी और प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते राहत एवं बचाव दलों की तैनाती पर है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation






