अमेरिकी शेयर बाजार में बुधवार को निवेशकों ने कारोबार से थोड़ा दूरी बनाए रखी। बाजार की नजर एक तरफ जुलाई की महंगाई के आंकड़ों पर रही, वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एनवीडिया के तिमाही नतीजों का इंतजार भी बना रहा। इन दोनों घटनाक्रमों को लेकर निवेशकों में सतर्कता दिखाई दी है।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में सालाना महंगाई दर 3.7 प्रतिशत रही, जबकि बाजार को इसके 3.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद थी। दूसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर का संशोधित अनुमान 1.5 प्रतिशत रखा गया है। महंगाई के उम्मीद से ज्यादा रहने के बाद सितंबर में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना थोड़ी मजबूत हुई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ब्याज दरों से जुड़े बाजार अनुमान में सितंबर की बैठक में दर बढ़ने की संभावना आंकड़े जारी होने से पहले करीब 36 प्रतिशत थी, जो बढ़कर लगभग 44 प्रतिशत हो गई। इससे शेयर बाजार पर दबाव देखने को मिला। एलपीएल फाइनेंशियल के मुख्य शेयर रणनीतिकार जेफ बुचबाइंडर ने कहा कि महंगाई अभी भी पूरी तरह काबू में नहीं आई है और इसका असर ब्याज दरों पर पड़ रहा है।
बुधवार सुबह कारोबार में डाउ जोंस 21.54 अंक यानी 0.04 प्रतिशत गिरकर 53,555.86 पर था। एसएंडपी 500 में 2.24 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त रही और यह 7,679.52 पर पहुंचा। नैस्डैक में 13.85 अंक यानी 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 26,137.16 का स्तर दर्ज किया गया था।
एसएंडपी 500 में सूचना प्रौद्योगिकी और औद्योगिक कंपनियों के शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया। माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल के शेयर करीब 0.5 प्रतिशत चढ़े। वहीं, एनवीडिया के शेयर तिमाही नतीजों से पहले 0.4 प्रतिशत नीचे रहे। गौरतलब है कि एनवीडिया के नतीजों को एआई से जुड़े निवेश और कंपनियों की कमाई की वास्तविक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
अगर कंपनी के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहते हैं तो एआई को लेकर बाजार में चल रही तेजी की टिकाऊ क्षमता पर सवाल उठ सकते हैं। इसका असर तकनीकी कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर, मजबूत नतीजे से सेमीकंडक्टर कंपनियों को और समर्थन मिलने की संभावना है।
कुछ अन्य कंपनियों के शेयर भी चर्चा में रहे। मेटा के शेयर करीब 0.6 प्रतिशत नीचे आए। कंपनी ने बच्चों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से जुड़े मामले में अमेरिकी राज्यों के साथ समझौते के तहत अधिकतम 16.68 अरब डॉलर तक भुगतान करने और फेसबुक तथा इंस्टाग्राम में बड़े बदलाव करने पर सहमति जताई है। इंट्यूट के शेयर करीब चार प्रतिशत गिरे, जबकि जेएम स्मकर के शेयर चार प्रतिशत चढ़े।
बता दें कि आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श का जैक्सन होल सम्मेलन में शुक्रवार को होने वाला भाषण भी बाजार के लिए अहम माना जा रहा है। सितंबर का महीना ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी शेयर बाजार के लिए कमजोर माना जाता है। ऐसे में महंगाई, ब्याज दर, सरकारी कर्ज और तेल कीमतों से जुड़े संकेतों के बीच निवेशकों की नजर अब कंपनियों के नतीजों और केंद्रीय बैंक की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं।
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अमेरिका में महंगाई को लेकर राहत की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को जुलाई के आंकड़ों ने एक बार फिर चिंता में डाल दिया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में व्यक्तिगत उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत बढ़ा है। यह जून के बराबर है, जबकि अर्थशास्त्रियों ने इसके 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यह लगातार 65वां महीना है जब अमेरिका में महंगाई अमेरिकी केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। मासिक आधार पर भी कीमतों में अनुमान से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। जुलाई में यह सूचकांक 0.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जून में इसमें 0.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। अर्थशास्त्रियों ने जुलाई में केवल 0.1 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था।
खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को हटाकर देखी जाने वाली मुख्य महंगाई दर भी सालाना आधार पर 3.3 प्रतिशत रही। जून में भी यह दर इतनी ही थी। हालांकि, मासिक आधार पर मुख्य महंगाई जून के 0.1 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 0.2 प्रतिशत हो गई है। यही आंकड़ा अमेरिकी केंद्रीय बैंक के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि इससे कीमतों में बनी मूल प्रवृत्ति का अंदाजा लगाया जाता है।
आंकड़ों के बाद सितंबर में ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता बढ़ गई है। बाजार के अनुमान के अनुसार, 15 और 16 सितंबर की बैठक में अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की संभावना रिपोर्ट आने से पहले करीब 36 प्रतिशत थी, जो बढ़कर लगभग 42 प्रतिशत हो गई। महंगाई पर नजर रखने वाली संस्था के प्रमुख ओमैर शरीफ ने कहा कि ताजा आंकड़े ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में जाते हैं।
गौरतलब है कि अमेरिका में महंगाई मई में तीन साल के उच्च स्तर 4.1 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। उस समय ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष तथा अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा था। वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा प्रभावित होने की आशंका ने कीमतों को तेजी दी थी। बाद में तेल की कीमतें नीचे आईं, लेकिन महंगाई में अपेक्षित तेजी से सुधार नहीं हुआ है।
इसके अलावा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए आयात शुल्क भी कीमतों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। कनाडा के साथ व्यापार वार्ता टूटने के बाद करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर नए शुल्क लगाने की तैयारी ने भी भविष्य की महंगाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
बता दें कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की प्रमुख ब्याज दर दिसंबर से 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पहले की गई तेज दर वृद्धि के बावजूद यह अभी दो प्रतिशत के लक्ष्य तक नहीं पहुंची है।
इस बीच आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो ने दूसरी तिमाही की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 1.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। हालांकि, अप्रैल से जून के बीच उपभोक्ता खर्च को 3.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.4 प्रतिशत किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग अब भी अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। ऐसे में फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई पर काबू पाने और आर्थिक गतिविधियों को कमजोर होने से बचाने के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होने वाला है।
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