आकांक्षा चमोला के बाइसेक्सुअल होने पर कैसा था ससुराल वालों का रिएक्शन? एक्ट्रेस बोलीं- 'बातचीत नहीं करते...'
Akanksha Chamola on Bisexual: टीवी के जाने-माने एक्टर गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) की पत्नी आकांक्षा चमोला को लॉक अप 2 (Lock Upp 2) में देखा गया था. शो में आकांक्षा ने अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर कई खुलासा किए थे. गौरव संग तलाक लेने से लेकर अपनी सेक्सुअलिटी को भी लेकर आकांक्षा ने खुलासा किया था. अब एक्ट्रेस ने बताया कि उनके बाइसेक्सुअल होने की खबर का ससुराल वालों का कैसा रिएक्शन था.
प्रेग्नेंसी से जुड़ा जवाब देने से किया इंकार
हाल ही में आकांक्षा चमोला ने IANS को इंटरव्यू दिया. इस दौरान उनसे प्रेग्नेंसी को लेकर सवाल किया गया. हालांकि एक्ट्रेस ने इस मुद्दे पर कुछ भी साफ नहीं कहा. वो बोलीं- 'नहीं, नहीं, नहीं. सवाल बदल दीजिए. मुझे तीसरे सीक्रेट के लिए पैसे मिलेंगे. इस पर अगर कोई कुछ कहता है, तो मैं तीसरा सीक्रेट रिवील कर दूंगी. नहीं तो मैं इसे रिवील नहीं करूंगी.' बता दें, एक्ट्रेस ने सीक्रेट का जिक्र इसलिए किया, क्योंकि लॉकअप 2 में उनकी तीसरा सीक्रेट प्रेग्नेंसी से जुड़ा था.
बाइसेक्सुअल पर ससुराल वालों का रिएक्शन
वहीं, आकांक्षा से इस दौरान ये भी पूछा गया कि जब उनके बाइसेक्सुअल होने की खबर सामने आई तो घरवालों का रिएक्शन कैसा था. एक्ट्रेस ने बताया कि इन मामलों पर उनके ससुराल वालों का कोई रिएक्शन नहीं आया. एक्ट्रेस ने कहा- ''इस पर मेरे ससुराल वालों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. क्योंकि हम आपस में बातचीत नहीं करते हैं और हमारे पैरेंट्स तो हमारे अपने होते हैं. मेरे माता-पिता क्या कहते? कौन से पैरेंट्स अपने बच्चों से कुछ कहेंगे?'
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लॉकअप 2 में हुई खुलासा
बता दें, लॉकअप 2 में जब आकांक्षा आई तो उन्होंने पहले ही दिन खुलासा किया था कि उनका और गौरव का तलाक होने वाला है. बाद में शो ने श्रेया कालरा ने रिवील किया कि एक्ट्रेस बाइसेक्सुअल है. इन दोनों ही खबरों ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया था. शो में कई बार एक्ट्रेस को ये कहते हुए देखा गया था कि उन्हें लड़कों से ज्यादा लड़कियां पसंद हैं. वहीं, आकांक्षा ने ये भी कहा था कि वो किसी के साथ इंटीमेट नहीं होना चाहती हैं, न लड़की न लड़का. एक्ट्रेस के इन सब खुलासों ने इंटरनेट पर कई सवाल खड़े कर दिए थे.
24 साल की उम्र में हुई थी शादी
बता दें, 'लॉक अप सीजन 2' में अकांक्षा ने कई बार बताया था कि उन्होंने 24 साल की उम्र में शादी कर ली थी. अकांक्षा ने बताया था कि वो 35 साल की हैं और उन्होंने जल्द ही शादी कर ली थी. फिर से प्यार में पड़ने को लेकर आकांक्षा ने कहा था- 'मैं इतनी जल्दी प्यार में नहीं पड़ना चाहती, मैं थोड़ा समय लेना चाहती हूं. मेरी शादी बहुत कम उम्र में, 24 साल की उम्र में हो गई थी. मैंने असल में जिंदगी को उतना एक्सप्लोर नहीं किया. अब 10 साल के अच्छे रिश्ते के बाद मेरे पास एक्सप्लोर करने के लिए अपना आजाद समय है, मैं किसी और चीज में नहीं पड़ना चाहती.'
क्यों हो रहा आकांक्षा-गौरव का तलाक?
आकांक्षा चमोला और गौरव खन्ना के रिश्ते में दरार की सबसे बड़ी वजह बच्चे को लेकर दोनों की अलग-अलग सोच बताई गई है. ‘लॉक अप 2’ में आकांक्षा ने खुलासा किया था कि गौरव पिता बनना चाहते थे, जबकि वह मां नहीं बनना चाहती थीं और अपनी जिंदगी को अलग तरह से जीना चाहती थीं. लंबे समय तक इस मुद्दे पर दोनों की सोच नहीं मिल पाई, जिसके बाद उन्होंने अलग होने का फैसला किया। आकांक्षा के मुताबिक, दोनों पिछले करीब एक साल से अलग रह रहे थे और तलाक का फैसला आपसी सहमति से लिया गया.
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उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक क्षमता निर्माण की जरूरत बढ़ी, पूरे समाज की भागीदारी जरूरी: डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी और वैश्विक परिदृश्य में उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए सामूहिक क्षमता निर्माण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण को केवल व्यक्तिगत कौशल विकास तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे पूरे समाज और विभिन्न संस्थानों की साझी जिम्मेदारी के रूप में विकसित करना होगा।
क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) विषय पर आयोजित एक गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि प्रौद्योगिकी और सामाजिक बदलाव की गति अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच चुकी है। ऐसे समय में निरंतर सीखना और स्वयं को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढालना अनिवार्य हो गया है।
उन्होंने कहा कि आज जो ज्ञान या कौशल सीखा जाता है, वह बहुत कम समय में पुराना पड़ सकता है। इसलिए व्यक्तियों और संस्थानों दोनों को ऐसी क्षमता विकसित करनी होगी, जिससे वे लगातार सीखते रहें और नई परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को अनुकूलित कर सकें।
डॉ. सिंह ने कहा कि संस्थानों को भी अलग-अलग दायरों में काम करने के बजाय एकीकृत तरीके से कार्य करना सीखना होगा। विभिन्न संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग से नई चुनौतियों का तेजी से समाधान किया जा सकता है तथा नीतियों को प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे दृष्टिकोण की ओर बढ़ना चाहिए जिसमें संस्थागत समन्वय के साथ-साथ सम्पूर्ण समाज की भागीदारी को भी महत्व दिया जाए। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों के भरोसे सभी चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है।
मंत्री ने आगे कहा कि सरकार से हर समस्या का समाधान करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती और इसके लिए उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों, शोध संगठनों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र जैसे विभिन्न हितधारकों की सक्रिय भूमिका जरूरी है।
डॉ. सिंह ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों को अधिक खुला और सहभागी बनाया है। अब आवश्यकता इस बात की है कि विभिन्न क्षेत्र एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करें और राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करें।
उन्होंने शासन प्रणाली में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि अधिकारियों को केवल नियम पुस्तिका तक सीमित सोच से आगे बढ़ना चाहिए और जिम्मेदारियों का निर्वहन करते समय समाधान केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रभावी कार्य निष्पादन के लिए उचित स्तर का व्यावहारिक दृष्टिकोण आवश्यक है और इसके लिए मानसिकता में बदलाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने क्षमता निर्माण में डिजिटल और निरंतर सीखने वाले मंचों की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आईगॉट मंच पर वर्तमान में 40 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं, जिसे सरकारी अधिकारियों के लिए एक सतत शिक्षण मंच के रूप में विकसित किया गया है। यह उन्हें नई नीतियों, तकनीकों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से लगातार अपडेट रहने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने राष्ट्रीय सुशासन केंद्र और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान का भी उल्लेख किया और कहा कि ये संस्थान देश में सुशासन और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने वाले व्यापक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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