UP News: बदायूं में अंबेडकर प्रतिमा विवाद पर मायावती की अपील, बोलीं- धार्मिक विश्वासों का सम्मान जरूरी
Mayawati on Budaun Ambedkar Statue: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर मचे घमासान के बीच बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने पूरे मामले पर गहरी चिंता जताते हुए शासन और प्रशासन से तुरंत दखल देने की मांग की है. मायावती ने कहा कि बाबा साहेब का दिया हुआ संविधान देश के हर नागरिक को बराबरी और सम्मान के साथ जीने का हक देता है. ऐसे में किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर टकराव का रास्ता चुनने के बजाय बातचीत और कानूनी दायरे में रहकर समाधान निकाला जाना चाहिए.
संविधान की मूल भावना का सम्मान जरूरी
मायावती ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश को एक कल्याणकारी, मानवतावादी और समतामूलक संविधान दिया है. यह संविधान समाज के हर वर्ग, जाति और धर्म के लोगों को एक समान अधिकार प्रदान करता है. इसी व्यवस्था के बल पर हमारा देश एकजुट और मजबूत बना हुआ है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों, परंपराओं और मान्यताओं का पूरा आदर होना चाहिए. किसी की भी आस्था में बेवजह दखल देना ठीक नहीं है और सभी को एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए.
धार्मिक परंपराओं पर बेवजह की बयानबाजी से बचें
बसपा प्रमुख ने संवेदनशील मामलों पर अनावश्यक टीका-टिप्पणी करने की आदत पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों, रीति-रिवाजों और आस्था से जुड़े मसलों पर गैर-जरूरी बहस करने से बचना चाहिए. समाज में बेवजह के तनाव को बढ़ावा देने से किसी का भला नहीं होने वाला है. ऐसे मुद्दों को तूल देने के बजाय स्थानीय स्तर पर आपसी समझ और बातचीत से सुलझाना ही सबसे बेहतर उपाय है. जब लोग मिल-बैठकर बात करते हैं तो बड़े से बड़े विवाद का हल आसानी से निकल जाता है.
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने मानवतावादी, कल्याणकारी व सभी जाति-धर्मों के मानने वालों को एक-समान समतामूलक अधिकार देने वाला सेक्युलर संविधान देकर पूरे देश को एक कड़ी में जोड़ कर सशक्त भारत बनाने की गारण्टी सुनिश्चित की है और इसके तहत् सभी…
— Mayawati (@Mayawati) August 26, 2026
स्कूलों के आंतरिक मामलों में समझदारी दिखाए प्रशासन
मायावती ने शिक्षण संस्थानों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर और हिजाब जैसे विषयों पर भी अपनी राय जाहिर की. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को लेकर विवाद खड़ा करने की जरूरत नहीं है. स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन आपसी सूझबूझ और तालमेल के साथ इन मसलों को शांति से हल कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों को बड़ा मुद्दा बनाने से समाज का माहौल खराब होता है. इसलिए सभी जिम्मेदार लोगों को ऐसे संवेदनशील मामलों में बेहद परिपक्वता और समझदारी का परिचय देना चाहिए.
बदायूं के सिकरी गांव में कैसे बिगड़े हालात
बदायूं जिले के सिकरी गांव में मंगलवार की शाम डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाने के प्रस्ताव को लेकर भारी तनाव पैदा हो गया था. मिली जानकारी के अनुसार सरकारी जमीन पर प्रतिमा स्थापित करने को लेकर स्थानीय स्तर पर दो पक्षों में असहमति बन गई. देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि पथराव शुरू हो गया. इस हिंसक झड़प में कई पुलिसकर्मी और एक स्थानीय नागरिक घायल हो गए. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और भारी पुलिस बल तैनात करके स्थिति को काबू में किया. फिलहाल इलाके में शांति बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
प्रशासन निकाले तुरंत और निष्पक्ष हल
सिकरी गांव की इस घटना पर मायावती ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी हमेशा से सर्वसमाज के हित, लोगों के जान-माल की हिफाजत और धार्मिक अधिकारों की रक्षा के पक्ष में खड़ी रही है. पार्टी की अंबेडकरवादी सोच सभी नागरिकों के मान-सम्मान और समान अधिकारों की वकालत करती है. प्रशासन को चाहिए कि वह दोनों पक्षों को भरोसे में लेकर ऐसा शांतिपूर्ण रास्ता निकाले जिससे इलाके में भाईचारा बना रहे.
आपसी भाईचारा और संयम बनाए रखने की अपील
मायावती ने आम जनता और सभी पक्षों से शांति और संयम बरतने की पुरजोर अपील की है. उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की तरक्की तभी संभव है जब वहां अमन और कानून का राज हो. बदायूं जैसी घटनाओं से सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचता है. इसलिए सभी को कानून का पालन करते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस-प्रशासन का सहयोग करना चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन जल्द ही इस मामले का सर्वमान्य समाधान निकाल लेगा.
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भारत-जापान द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है: एसोचैम
टोक्यो, 26 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा बुधवार को जारी की गई शीर्ष संस्था एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2030 तक 50 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती पूरकता, व्यापारिक सहयोग में विस्तार और निवेश संबंधों की मजबूती इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में आयोजित स्टार्टअप गोलमेज बैठक के दौरान इंडिया-जापान @75: स्थायी मित्रता से रणनीतिक व्यापारिक साझेदारी तक शीर्षक वाली एसोचैम रिपोर्ट का विमोचन किया। इस अवसर पर एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा, महासचिव सौरभ सान्याल और जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मलिक सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में भारत के कुल वैश्विक व्यापार में जापान की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम है, जो यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
एसोचैम के अनुसार, भारत और जापान के आर्थिक संबंध अब पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहे हैं। दोनों देश सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल टेक्नोलॉजी, महत्वपूर्ण खनिज, उन्नत विनिर्माण और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं। इन क्षेत्रों में साझेदारी भविष्य के आर्थिक संबंधों की नई आधारशिला बन सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का विशाल घरेलू बाजार, युवा कार्यबल और तेजी से विकसित हो रहा विनिर्माण आधार, जापान की उन्नत तकनीक, पूंजी और औद्योगिक विशेषज्ञता के साथ मिलकर दोनों देशों को एक मजबूत आर्थिक साझेदारी का अवसर प्रदान करता है।
एसोचैम ने यह भी कहा कि भारत में कारोबार सुगमता से जुड़े सुधारों में और तेजी आने पर जापानी निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे दोनों देशों के बीच निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और औद्योगिक सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
भारत और जापान पिछले कुछ वर्षों से विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और आपूर्ति शृंखला जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग को गहरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। वहीं, निजी क्षेत्र के बीच बढ़ते संपर्क और संयुक्त परियोजनाएं दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश को नई ऊंचाई तक ले जा सकती हैं।
इससे पहले जापान यात्रा के तीसरे दिन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि उन्होंने जापान के प्रमुख उद्योग और वित्तीय क्षेत्र के नेताओं के साथ बैठकों में भारत में उपलब्ध निवेश और व्यापारिक अवसरों को विस्तार से रखा। उन्होंने व्यापार, गतिशीलता, विनिर्माण, बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही संभावनाओं पर चर्चा की।
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने टोयोटा त्सुशो कॉर्पोरेशन, सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (एसएमबीसी) समूह, मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप (एमयूएफजी) और निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान भारत में निवेश, औद्योगिक सहयोग, वित्तीय सेवाओं और दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारी को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की गई।
--आईएएनएस
डीबीपी
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