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Tahir Hussain ने Ankit Sharma हत्याकांड में उम्रकैद की सजा को Delhi High Court में चुनौती दी

आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने फरवरी 2020 के दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। हुसैन ने आरोप लगाया कि जनता के आक्रोश को शांत करने के लिए जांच एजेंसियों ने उन्हें इस मामले में फंसाने के इरादे से जांच की। सोमवार को दायर की गई इस अपील पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।

हुसैन ने अपनी अपील में कहा, ‘‘अपीलकर्ता के खिलाफ जांच शुरू से ही निष्पक्ष नहीं थी और उसका उद्देश्य जनता के आक्रोश को शांत करने के लिए उसे इस मामले में फंसाना था। प्राथमिकी में पहले की तारीख और समय दर्ज किया गया है। छह मार्च 2020 तक, यानी जब तक अपीलकर्ता को एक अन्य मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया, तब तक कोई ठोस जांच नहीं की गई थी।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में गवाहों को सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया है और वास्तविक चश्मदीद गवाहों के बयानों में हेरफेर की गई है।

साथ ही, असली अपराधियों को कानून के कठघरे में नहीं लाया गया है। हुसैन ने निचली अदालत के 13 जुलाई के दोषसिद्धि के आदेश और 31 जुलाई के सजा संबंधी आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया है। उसकी दलील है कि निचली अदालत ने पूरी तरह अविश्वसनीय गवाहों के बयानों पर भरोसा किया और ऐसे गवाहों के बयानों को भी आधार बनाया, जिन्होंने घटना को देखा ही नहीं था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 फरवरी 2020 को शिकायतकर्ता रविंदर कुमार ने दयालपुर पुलिस थाने के अधिकारियों को सूचना दी थी कि उनका बेटा अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 से लापता है। बाद में उन्हें कुछ स्थानीय लोगों से पता चला कि चांद बाग पुलिया स्थित मस्जिद से हत्या के बाद एक व्यक्ति के शव को खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया था। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि शर्मा का शव खजूरी खास नाले से बरामद किया गया था और उसके शरीर पर चोट के 51 निशान थे।

राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने शर्मा की हत्या के दोषी ताहिर हुसैन और चार अन्य को 31 जुलाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा था कि यह मामला ‘‘दुर्लभ से दुर्लभतम’’ श्रेणी में नहीं आता, जिसके लिए मौत की सजा दी जाए। अदालत ने हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हुसैन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 302 (हत्या), 365 (किसी व्यक्ति को बंधक बनाने के इरादे से अपहरण करना), 147 (दंगा करना), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करना), 153-ए (शत्रुता को बढ़ावा देना) और 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत घोषित आदेश की अवज्ञा)के साथ धारा 149 (गैरकानूनी रूप से जमा होना) के तहत दोषी ठहराया गया था। अधीनस्थ अदालत ने 13 जुलाई को हुसैन और चार अन्य को शर्मा की हत्या के लिए दोषी ठहराया था, जिन पर दंगों के दौरान भीड़ ने हमला किया था। बाद में शर्मा का शव एक नाले में मिला।

चौबीस फरवरी 2020 को नागरिकता कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बेकाबू होने के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें शुरू हो गई थीं। इन झड़पों में 53 लोगों की मौत हो गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।

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Karnataka CM Shivakumar का दावा: Nagendra निर्दोष, कैबिनेट में जल्द शामिल होंगी Woman Minister

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को कहा कि बी नागेंद्र को उनके मंत्रिमंडल में इसलिए शामिल किया गया क्योंकि एक आधिकारिक रिपोर्ट में पाया गया कि वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार अगले कुछ दिनों में एक महिला मंत्री को मंत्रिमंडल में शामिल करेगी। कावेरी जल विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करेंगे।
 

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कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के 89 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल होने के आरोपों पर नागेंद्र का बचाव करते हुए शिवकुमार ने कहा कि नागेंद्र ने पहले सरकार के भीतर बातचीत के बाद इस्तीफा दे दिया था और बाद में एक आधिकारिक रिपोर्ट में उनके शामिल न होने की बात सामने आने पर उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया। उन्होंने दावा किया, "यह काम नागेंद्र ने नहीं किया था," और कहा कि जांच के दौरान 95 प्रतिशत पैसा बरामद कर लिया गया।

कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी पर शिवकुमार ने कहा कि हमारे पास (महिला मंत्री) होंगी। निश्चित रूप से होंगी। कांग्रेस पार्टी (महिलाओं के सशक्तिकरण की) विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध है। शिवकुमार ने CM बनने के दो महीने बाद, 3 अगस्त को कैबिनेट का विस्तार किया। उन्होंने 19 मंत्रियों को शामिल किया, जबकि कांग्रेस ने 20 मंत्रियों के नामों की घोषणा की थी, जिनमें महिला MLC गायत्री शांथेगौड़ा भी शामिल थीं, लेकिन आखिरी समय में उनका नाम हटा दिया गया।
 

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इंडिया टुडे राउंडटेबल में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि एक नाम पर मंज़ूरी मिल रही थी, लेकिन आखिर में कुछ दिक्कत आ गई। CM ने कहा कि मुझे लगता है कि अगले कुछ दिनों में एक महिला मंत्री को शामिल किया जाएगा। फिलहाल, शिवकुमार सरकार में मंत्रियों के स्वीकृत 34 पदों के मुकाबले 33 मंत्री हैं। कहा जा रहा है कि एक खाली पद महिला मंत्री को शामिल करने के लिए रखा गया है।
 
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