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Gen Alpha छात्र सड़कों पर उतरे, जर्जर School Infrastructure के खिलाफ शुरू किया आंदोलन

जून-जुलाई में जंतर-मंतर से शुरू हुई छात्रों के असंतोष की आवाजें अब दूरदराज के उन गांवों और कस्बों तक पहुंच गयी है, जो देश के शिक्षा मानचित्र पर अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इस आंदोलन में अब केवल ‘जेन जी’ ही नहीं, बल्कि ‘जेन अल्फा’ भी शामिल हो गया है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित भ्रष्टाचार को लेकर जून-जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद अब कम उम्र के सैकड़ों स्कूली छात्र अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। कहीं स्कूलों में पंखे नहीं हैं, कहीं शौचालय नहीं, कहीं शिक्षक नहीं और कहीं बुनियादी ढांचा तक नहीं है।

कुछ जगहों पर तो बच्चों के पढ़ने के लिए स्कूल की उचित इमारत तक नहीं है। भारत के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में ‘जेन अल्फा’ यानी 2010 से 2024 के बीच जन्मे बच्चे अपने पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी खुद उठाते नजर आ रहे हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से ऐसी खबरें सामने आई हैं, जहां विपरीत परिस्थितियों के बावजूद छात्र अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और उन समस्याओं को सामने ला रहे हैं, जो उनके जीवन और पढ़ाई से सीधे जुड़ी हैं।

पिछले सप्ताह राजस्थान में जयपुर के एक गांव के प्राथमिक विद्यालय से आई खबर इस छात्र आंदोलन की बड़ी सफलता के रूप में सामने आई। यहां बच्चे मवेशियों के बाड़े में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर थे। रामपुरा कनवारपुरा गांव के स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे कॉजपा के सदस्यों और कुछ ग्रामीणों के बीच विवाद के बाद राज्य सरकार ने स्कूल के लिए नयी इमारत बनाने की घोषणा की।

सरकार ने स्वीकार किया कि रामपुरा स्कूल की इमारत को सितंबर 2025 में जर्जर घोषित कर दिया गया था और तब से बच्चों की कक्षाएं मवेशियों के बाड़े में लगाई जा रही थीं। सरकार की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉजपा के सह-संस्थापक और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि रामपुरा स्कूल को लेकर पार्टी की तत्काल मांग पूरी हो गई है, लेकिन सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति के खिलाफ उसका अभियान जारी रहेगा। रांका ने कहा, ‘‘हम वहां वोट मांगने नहीं गए थे।

हम स्कूल की हालत ठीक कराने की बात करने गए थे। अब सरकार ने एक सितंबर से काम शुरू करने की मंजूरी दे दी है, इसलिए यह मुद्दा अब खत्म हो गया है।’’ स्कूल का यह निरीक्षण कॉजपा के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का हिस्सा था। यह अभियान हैदराबाद, तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में चलाया जा रहा है।

इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में बेहतर बुनियादी ढांचा और पर्याप्त शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग करना है। इस अभियान से जुड़ी छोटी-बड़ी कई सफलताएं सामने आई हैं। राजस्थान के अजमेर के एक सरकारी स्कूल की छात्राओं ने 17 अगस्त को प्रधानाचार्य के खिलाफ प्रदर्शन किया।

छात्राओं ने प्रधानाचार्य पर कथित रूप से उनके साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। छात्राओं और उनके अभिभावकों ने प्रधानाचार्य के चेहरे पर कालिख पोती और उसकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने कहा कि आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया जाएगा।

इससे पहले पांच अगस्त को जयपुर के सरकारी आनंदीलाल पोद्दार वरिष्ठ माध्यमिक बधिर विद्यालय के सुनने और बोलने में असमर्थ छात्रों ने खराब बुनियादी ढांचे और आवश्यक सुविधाओं की कमी को लेकर प्रदर्शन किया था। छात्र स्कूल से बाहर निकलकर धरने पर बैठ गए। उन्होंने सांकेतिक के माध्यम से बताया कि गंदे शौचालय, पीने के पानी की कमी और जर्जर स्कूल भवन के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

छात्रों का कहना था कि स्कूल प्रशासन से बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल के प्रधानाचार्य को हटा दिया। छात्रों के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों पर शिक्षाविद् और दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास के पूर्व प्रोफेसर प्रभु महापात्र ने कहा कि ये घटनाएं इस बात को दर्शाती हैं कि शिक्षा नीति बनाते समय छात्रों को महत्वपूर्ण हितधारक के रूप में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

महापात्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ये विरोध प्रदर्शन शिक्षा के लिए घटती प्राथमिकता को भी दर्शाते हैं। गिरावट केवल बुनियादी ढांचे में ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता में भी दिखाई देती है। यह समस्या खासतौर पर उत्तर और पूर्वी भारत में अधिक स्पष्ट हो गई है।’’ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 21 अगस्त को 36 जिलों से आए ‘जेन अल्फा’ और ‘जेन जी’ छात्रों तथा शिक्षकों ने प्रदर्शन किया।

उन्होंने जर्जर स्कूल भवनों और राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के खिलाफ आवाज उठाई। भोपाल के नीलम पार्क में छात्रों और शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि राज्य में 25,000 से अधिक स्कूल बंद हो चुके हैं। उन्होंने ‘स्कूल बचाओ’ आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की तथा अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी।

पिछले कुछ सप्ताह से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भी स्कूली छात्रों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। छात्र हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और कई शहरों में प्रमुख चौराहों पर यातायात रोक दिया। फतेहपुर, हमीरपुर और कन्नौज में हुए इन प्रदर्शनों ने सोशल मीडिया और समाचार सुर्खियों में जगह बनाई।

लखनऊ के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के छात्रों ने 14 अगस्त को शिक्षकों की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात भी रोक दिया। पुलिस प्रशासन और राज्य के मंत्री असीम अरुण के उनकी शिकायतें सुनने पर सहमत होने के बाद छात्र स्कूल लौट गए।

लेकिन यह समझौता ज्यादा दिन नहीं चला। तीन दिन बाद छात्राओं ने उन्हीं मांगों को लेकर दोबारा सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। भारी बारिश भी उनका हौसला नहीं तोड़ सकी।

छात्राओं ने शहर की दो सड़कों को अवरुद्ध कर दिया और हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर विभिन्न समस्याओं के खिलाफ नारे लगाए। एक छात्रा अनामिका ने आरोप लगाया कि स्कूल में विज्ञान वर्ग के छात्रों की संख्या काफी अधिक होने के बावजूद वहां रसायन विज्ञान के सिर्फ एक शिक्षक हैं और भौतिक विज्ञान तथा जीव विज्ञान के शिक्षक हैं ही नहीं। उन्होंने गुस्से में पत्रकारों से कहा, ‘‘बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं, लेकिन शिक्षक नहीं होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

छात्रों को ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल होने में भी परेशानी हो रही है।’’ लखनऊ से सटे उन्नाव में भी 19 अगस्त को एक सरकारी आवासीय विद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने खराब गुणवत्ता वाले भोजन, पीने के पानी की कमी, शिक्षकों की कमी और प्रधानाचार्य के व्यवहार को लेकर शिकायत की। प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को उनकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद उन्होंने प्रदर्शन समाप्त कर दिया।

जंतर-मंतर पर 28 जुलाई को हुए तनावपूर्ण प्रदर्शन के समाप्त होने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के महज तीन दिन बाद, उत्तर प्रदेश के किशनपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के छठी से लेकर 12वीं कक्षा तक के करीब 1,800 छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि स्कूल में स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय, बिजली, पंखे, पर्याप्त फर्नीचर, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय और खेल सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने स्कूल प्रशासन पर दाखिले के दौरान कथित रूप से अनधिकृत तरीके से पैसे लेने और अंकपत्र तथा अन्य दस्तावेज जारी करने के लिए भी पैसे मांगने का आरोप लगाया।

इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार स्कूल पहुंचे और छात्रों से बातचीत की। उन्होंने लिखित आश्वासन दिया कि लंबित समस्याओं पर 24 घंटे के भीतर काम शुरू किया जाएगा, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। महापात्र के अनुसार, इन प्रदर्शनों का महत्व केवल अलग-अलग छात्रों की शिकायतों तक सीमित नहीं है।

उनका कहना है कि ये प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि युवा अब सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गिरती स्थिति को चुपचाप स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। कॉजपा के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की तर्ज पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने भी अगले तीन महीनों के लिए देशव्यापी ‘स्कूल बचाओ आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। एसएफआई का कहना है कि इस अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों की बिगड़ती स्थिति को सामने लाया जाएगा और स्कूली शिक्षा में सरकार के अधिक निवेश की मांग की जाएगी।

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Shaurya Path: Kirana Hills और Skardu को लेकर पूर्व CDS Anil Chauhan के खुलासों से चौंकी दुनिया, Pakistan बात करना चाह रहा था, मगर India...

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से बुरी तरह पिटने वाला पाकिस्तान आज भी उस सैन्य झटके के जख्म सहलाता नजर आता है, जबकि दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ लगातार इस बात का आकलन कर रहे हैं कि भारत ने किस सूझबूझ, सटीक रणनीति और सैन्य तैयारी के साथ उस अभियान को अंजाम दिया था। आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमलों से लेकर पाकिस्तान के अहम सैन्य प्रतिष्ठानों तक पहुंच बनाने और परिस्थितियों के अनुसार लक्ष्य बदलने की क्षमता ने भारतीय सैन्य अभियान की रणनीतिक गहराई को सामने रखा। अब इसी सिलसिले में पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य योजना और पाकिस्तान के भीतर तय किए गए संभावित लक्ष्यों को लेकर कई अहम परतें खोल दी हैं।

पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने बताया है कि भारतीय सेना की नजर सरगोधा से लेकर स्कार्दू तक पाकिस्तान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर थी। मौसम के कारण कुछ योजनाओं में बदलाव जरूर करना पड़ा, लेकिन भारत ने यह दिखा दिया कि वह परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदलने और दुश्मन को जवाब देने की पूरी क्षमता रखता है। जनरल अनिल चौहान ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए बताया कि पाकिस्तान की ओर से बातचीत की इच्छा जताए जाने के बाद भी भारतीय सैन्य नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय था। उन्होंने कहा कि करीब सुबह 10 बजे पाकिस्तानियों के बातचीत की इच्छा जताने के बाद वायुसेना प्रमुख ने सरगोधा पर हमला करने की अनुमति मांगी। जवाब था, “Go ahead.”

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जनरल चौहान ने दो और संभावित लक्ष्यों की पहचान करने को कहा। इनमें एक नाम था गिलगित-बाल्टिस्तान के स्कार्दू एयरबेस का। भारतीय सैन्य नेतृत्व ने इस लक्ष्य को भी मंजूरी दी थी। यानी भारत की निगाह सिर्फ एक ठिकाने तक सीमित नहीं थी। सरगोधा के बाद स्कार्दू भी भारतीय सैन्य योजना के दायरे में आ चुका था। हालांकि, स्कार्दू के ऊपर खराब मौसम ने योजना में बाधा डाल दी। इसके बाद लक्ष्य बदला गया और भोलारी को चुना गया। यह घटनाक्रम भारत की सैन्य रणनीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता को दिखाता है कि परिस्थितियां बदलें तो भी अभियान रुकता नहीं, विकल्प तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। देखा जाये तो युद्धक्षेत्र में मौसम, तकनीकी परिस्थितियां और वास्तविक समय की सूचनाएं फैसलों को प्रभावित करती हैं, लेकिन पहले से तैयार सेनाएं इन्हीं परिस्थितियों के बीच अपना रास्ता निकालती हैं और भारतीय सैन्य बल इसमें पूरी तरह दक्ष हैं।

देखा जाये तो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किराना हिल्स का नाम लगातार सुर्खियों में रहा। पाकिस्तान के सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित यह इलाका लंबे समय से पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़े जाने के कारण संवेदनशील माना जाता रहा है। जब पाकिस्तानी मीडिया में किराना हिल्स से धुआं उठने की तस्वीरें सामने आईं, तो तरह-तरह के दावे शुरू हो गए। सवाल उठा कि क्या भारत ने पाकिस्तान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया था?

इसे भी पढ़ें: क्या Gen-Z होना सुरक्षा नियम तोड़ने का लाइसेंस है? Kargil में महिला पर्यटक के आचरण से उठे कई गंभीर सवाल

अब जनरल अनिल चौहान ने इस पूरे मामले पर विस्तार से स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत ने जानबूझकर किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया था। जनरल चौहान के मुताबिक, सरगोधा क्षेत्र में पाकिस्तान के सैन्य रडार ठिकानों को खोजने और नष्ट करने के लिए बड़ी संख्या में लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे गए थे। इनमें इजराइली डिजाइन का हारोप भी शामिल था। ऐसे हथियार हवा में एक निश्चित अवधि तक घूमते हुए लक्ष्य तलाश सकते हैं और उपयुक्त लक्ष्य मिलने पर उस पर प्रहार करते हैं।

बताया गया कि एक हारोप लोइटरिंग म्यूनिशन अपने निर्धारित लक्ष्य यानि सरगोधा क्षेत्र में मौजूद पाकिस्तानी सैन्य रडार को खोज नहीं पाया। वह लगभग दो घंटे तक अपने ऑपरेशनल क्षेत्र में लक्ष्य तलाशता रहा और इस दौरान उसका ईंधन लगातार कम होता गया। अंततः जब उसकी उड़ान क्षमता समाप्त होने लगी, तो वह नीचे आया और संभवतः किराना हिल्स क्षेत्र की किसी पहाड़ी से टकरा गया। यही वह घटना थी, जिसने पाकिस्तानी मीडिया में नई अटकलों को जन्म दिया। धुआं दिखाई दिया और देखते ही देखते किराना हिल्स को लेकर दावे तेज हो गए। लेकिन भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की कोई योजना नहीं थी। यह सरगोधा क्षेत्र में रडार खोजने के अभियान के दौरान हुई एक अनपेक्षित घटना थी।

फिर भी इस पूरे घटनाक्रम का बड़ा संदेश पाकिस्तान के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है। भारतीय अभियान का मूल उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करना और पाकिस्तान की उन सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाना था, जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ आक्रामक गतिविधियों के लिए किया जा सकता था। देखा जाये तो किराना हिल्स का प्रसंग भले ही जानबूझकर किया गया हमला नहीं था, लेकिन सरगोधा के आसपास भारतीय लोइटरिंग म्यूनिशन की सक्रियता ने यह जरूर दिखा दिया कि पाकिस्तान का रणनीतिक क्षेत्र भारतीय सैन्य योजनाकारों की निगाह से बाहर नहीं है।

हम आपको याद दिला दें कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई। भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इन जवाबी हमलों में 100 से अधिक आतंकवादियों के मारे जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, जिनमें सरगोधा एयरबेस भी शामिल था, उस पर भारतीय कार्रवाई ने टकराव को और गंभीर बना दिया था।

भारतीय सेना और वायुसेना के इस अभियान का सबसे बड़ा पहलू सिर्फ हथियारों का इस्तेमाल नहीं था, बल्कि सटीक योजना, लक्ष्य चयन, तकनीकी क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलने की क्षमता थी। स्कार्दू को लक्ष्य के रूप में मंजूरी मिलना, खराब मौसम के कारण विकल्प बदलना, सरगोधा क्षेत्र में रडार-हंटिंग लोइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल और अलग-अलग मोर्चों पर दबाव बनाए रखना, ये सभी संकेत देते हैं कि अभियान किसी एक कार्रवाई तक सीमित नहीं था।

जनरल अनिल चौहान ने यह भी रेखांकित किया है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। इसका अर्थ केवल सैन्य कार्रवाई की निरंतरता नहीं, बल्कि उस व्यापक रणनीतिक संदेश से भी है जो भारत ने पाकिस्तान को दिया है, यानि आतंकवाद और उसके समर्थन को अब पुरानी सोच के साथ नहीं देखा जाएगा।

देखा जाये तो पाकिस्तान हर बार परमाणु हथियारों और अंतरराष्ट्रीय दबाव की आड़ में आतंकवाद को रणनीतिक हथियार बनाकर चलता था लेकिन भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए यह स्पष्ट कर दिया कि जवाब देने की उसकी क्षमता केवल सीमावर्ती गोलीबारी तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर लक्ष्य सरगोधा हो सकता है, स्कार्दू हो सकता है या कोई दूसरा सैन्य और आतंकी ढांचा भी हो सकता है, लेकिन फैसला भारत अपने राष्ट्रीय हित और सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर करेगा।

किराना हिल्स पर जानबूझकर हमला नहीं हुआ, यह भारत ने साफ कर दिया है। लेकिन सरगोधा से स्कार्दू तक फैली ऑपरेशन सिंदूर की कहानी पाकिस्तान के लिए एक बड़ा रणनीतिक संदेश जरूर है। संदेश यह है कि भारत शांति चाहता है, लेकिन अगर आतंकवाद के जरिए उसे चुनौती दी जाएगी, तो जवाब ऐसा होगा जिसकी गूंज सीमा के उस पार बहुत दूर तक सुनाई देगी।

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Sehwag और Dravid की विरासत संभालेंगे बेटे, Aryavir Sehwag का Australia सीरीज के लिए India U-19 में चयन

भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के बेटे आर्यवीर सहवाग के लिए भारतीय क्रिकेट में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। आर्यवीर को पहली बार भारत की अंडर-19 टीम में जगह मिली है। उन्हें सितंबर में राजकोट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली तीन एकदिवसीय मुकाबलों की श्रृंखला के लिए चुना गया है। इस चयन के साथ अब आर्यवीर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का मौका मिलेगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार, आर्यवीर दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और हाल ही में दिल्ली प्रीमियर लीग में वेस्ट दिल्ली लायंस की ओर से खेल रहे थे। इस दौरान उनके आक्रामक बल्लेबाजी अंदाज ने क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान खींचा। उनके खेलने के तरीके की तुलना उनके पिता वीरेंद्र सहवाग से भी की गई, जो अपने बेखौफ और तेजतर्रार बल्लेबाजी के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं।

आर्यवीर इससे पहले 2024 में कूच बिहार ट्रॉफी के दौरान भी चर्चा में आए थे। उन्होंने मेघालय के खिलाफ 297 रन की शानदार पारी खेली थी। इस बड़ी पारी ने कम उम्र में ही उनकी बल्लेबाजी क्षमता की झलक दिखा दी थी। अब भारत की अंडर-19 टीम में चयन उनके लिए अपने प्रदर्शन को अगले स्तर पर ले जाने का अवसर है।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला में आर्यवीर के साथ विकेटकीपर बल्लेबाज अन्वय द्रविड़ को भी जगह मिली है। अन्वय ने श्रीलंका दौरे पर जुलाई में भारत की अंडर-19 टीम के लिए प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। उन्होंने 87 रन की पारी खेली थी। इसके बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें एकदिवसीय टीम में बनाए रखा है।

हालांकि, आर्यवीर और अन्वय दोनों को बहुदिवसीय मुकाबलों के लिए चुनी गई टीम में जगह नहीं मिली है। यानी दोनों खिलाड़ियों के लिए फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन एकदिवसीय मुकाबले ही अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका होंगे।

गौरतलब है कि एकदिवसीय मुकाबलों में भारत की कप्तानी सलामी बल्लेबाज लक्ष्य रायचंदानी करेंगे। श्रीलंका दौरे के दौरान भारत की अगुवाई करने वाले यशवर्धन चौहान को उपकप्तान बनाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि बहुदिवसीय मुकाबलों में दोनों की जिम्मेदारियां बदल जाएंगी। यशवर्धन चौहान टीम की कप्तानी करेंगे, जबकि लक्ष्य रायचंदानी उपकप्तान की भूमिका में नजर आएंगे।

भारत और ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीमों के बीच तीन एकदिवसीय मुकाबले राजकोट में खेले जाएंगे। पहला मुकाबला 18 सितंबर, दूसरा 21 सितंबर और तीसरा 23 सितंबर को होगा। इसके बाद बहुदिवसीय श्रृंखला की शुरुआत भी राजकोट से होगी। पहला मुकाबला 27 से 30 सितंबर तक खेला जाएगा।

दूसरा बहुदिवसीय मुकाबला अहमदाबाद के बी मैदान पर 5 से 8 अक्टूबर तक होगा। इस दौरे को युवा भारतीय खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की मजबूत चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

बता दें कि अंडर-19 स्तर पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबले युवा खिलाड़ियों को भविष्य के बड़े मंच के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आर्यवीर के लिए इस दौरे की खासियत यह भी होगी कि उन पर अपने पिता के नाम और उनकी बल्लेबाजी की विरासत से जुड़ी उम्मीदों का दबाव रहेगा। हालांकि, उनका अब तक का प्रदर्शन बताता है कि वह अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अब नजर इस बात पर होगी कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली बार भारतीय जर्सी पहनकर आर्यवीर सहवाग कैसा प्रदर्शन करते हैं।
Thu, 27 Aug 2026 23:13:00 +0530

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