Responsive Scrollable Menu

बारावफात के मौके पर उत्तर प्रदेश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, लखनऊ से वाराणसी तक पुलिस अलर्ट

बारावफात के मौके पर उत्तर प्रदेश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, लखनऊ से वाराणसी तक पुलिस अलर्ट

Continue reading on the app

Explainer: अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम? जानें भारत-चीन सीमा विवाद और LAC की पूरी कहानी

Explainer: भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल चीन के दौरे पर हैं, जिसे बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है. क्योंकि बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा भारत और चीन सीमा विवाद और सीमा पर शांति बनाए रखना है.

25 अगस्त यानी एक दिन पहले अजीत डोभाल को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत और चीन सीमा प्रश्न पर 25वें दौर की स्पेशल रिप्रजेंटेटिव वार्ता में हिस्सा लिया. दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की दिशा में बातचीत जारी रखने और सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया. ये दौरा ऐसे वक्त में हुआ है, जब भारत और चीन 2020 के गलवान संघर्ष के बाद रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश की जा रही है. इसके अलावा, BRICS शिखर सम्मेलन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा के वजह से भी इस बातचीत का रणनीतिक महत्व बढ़ गया है. 

भारत-चीन सीमा विवाद आखिर है क्या?

भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर दशकों पुराना विवाद है. दोनों देशों के बीच करीब 3488 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर मतभेद सामने आए हैं. पूरी सीमा का एक बड़ा हिस्सा साफ नहीं है, जिस वजह से दोनों देश कई स्थानों पर असल नियंत्रण को लेकर अलग-अलग तरह के दावे करते हैं. यही वजह है कि दोनों देशों की सेनाएं कई इलाकों में एक-दूसरे के सामने तैनात रहती हैं.

बता दें, सीमा पर जहां-जहां वास्तविक स्थिति को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग समझ है, उसे Line of Actual Control यानी LAC कहा जाता है. LAC कोई अंतिम इंटरनेशनल सीमा नहीं है. यह मूल रूप से वह रेखा है, जहां तक दोनों देशों की सेनाओं का वास्तविक नियंत्रण है. इसी वजह से एलएसी पर पेट्रोलिंग, बुनियादी ढांचे के निर्माण और सैनिकों की तैनाती को लेकर अक्सर तनाव होता रहता है.

विवाद का सबसे बड़ा मोड़ बना गलवान संघर्ष

भारत-चीन संबंधों में साल 2020 सबसे निर्णायक मोड़ साबित हुआ. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं. घटना में भारतीय सैनिकों की जान गई और दोनों देशों के बीच लंबे वक्त तक सैन्य तनाव बना रहा. गलवान के बाद LAC के कई इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती हुई. सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत चली. इस दौरान सीमा विवाद केवल एक स्थानीय सैन्य मुद्दा नहीं रहा, बल्कि भारत-चीन के पूरे राजनीतिक और आर्थिक रिश्ते पर इसका असर पड़ा.

भारत का लगातार रुख रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना दोनों देशों के संबंध सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सकते. अजीत डोभाल ने भी हालिया वार्ता में इसी बात को रेखांकित किया कि सीमा पर शांति द्विपक्षीय संबंधों में आगे की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है.

2024 के बाद रिश्तों में क्यों आई नरमी?

2020 के बाद कई वर्षों तक भारत और चीन के बीच तनाव बना रहा. लेकिन अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण समझ बनी. इसके बाद उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क और बातचीत धीरे-धीरे फिर शुरू हुई. दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने और सामान्य संपर्क बहाल करने की दिशा में कदम उठाए. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भी उच्चस्तरीय मुलाकात हुई और दोनों पक्षों ने संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सीमा विवाद पूरी तरह खत्म हो गया है. वास्तविक सीमा का अंतिम समाधान अभी भी एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है. यही वजह है कि स्पेशल रिप्रजेंटेटिव्स वार्ता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

स्पेशल रिप्रजेंटेटिव्स टॉक्स क्या हैं?

भारत और चीन ने सीमा विवाद के समाधान के लिए वर्ष 2003 में स्पेशल रिप्रजेंटेटिव्स तंत्र स्थापित किया था. इसका उद्देश्य केवल सैन्य स्तर पर तनाव कम करना नहीं होता बल्कि सीमा प्रश्न का व्यापक राजनीतिक समाधान तलाशना है. भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी इस प्रक्रिया के प्रमुख प्रतिनिधि हैं. 25वां दौर इसी तंत्र के तहत हुआ. हालांकि इतने वर्षों की बातचीत के बावजूद सीमा विवाद का अंतिम समाधान नहीं निकल पाया. हालांकि, ये तंत्र दोनों देशों को संवेदनशील मुद्दों पर सीधे और उच्चस्तरीय संवाद का मंच देता है. 

अजीत डोभाल की भूमिका क्यों खास है?

अजीत डोभाल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. चीन के साथ सीमा विवाद केवल विदेश नीति का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य तैयारी और क्षेत्रीय रणनीति से है. इसलिए डोभाल की भागीदारी यह संकेत देती है कि भारत सीमा विवाद को केवल सामान्य राजनयिक बातचीत के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण से देख रहा है. बीजिंग में डोभाल ने चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की. दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता मजबूत करने और आर्थिक, राजनीतिक तथा बहुपक्षीय स्तर पर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की.

चीन के लिए भी यह बातचीत क्यों जरूरी है?

भारत और चीन एशिया की दो बड़ी शक्तियां है. दोनों देशों के बीच लंबे वक्त तक तनाव रहने की वजह से सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों पर असर नहीं पड़ता. इसका असर पूरे एशिया की रणनीतिक स्थिति पर पड़ता है. भारत के साथ चीन को भी स्थिर संबंध चाहिए, खासतौर पर ऐसे वक्त में जब वैश्विक राजनीति में तेजी से बदलाव आ रहा है. व्यापार, निवेश, क्षेत्रीय सुरक्षा और BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के बीच संवाद महत्वपूर्ण है. हालिया वार्ता के दौरान, चीनी पक्ष ने भारत और चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने और मतभेदों को उचित तरीके से संभालने पर जोर दिया.  

BRICS और शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा का कनेक्शन

अजीत डोभाल का चीन दौरा ऐसे समय हुआ है जब सितंबर में नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा की संभावना के बीच दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद का महत्व और बढ़ जाता है.

यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित मुलाकात भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है. ऐसे में डोभाल-वांग यी वार्ता को उस बड़े कूटनीतिक माहौल की तैयारी के तौर पर भी देखा जा सकता है. हालांकि किसी भी संभावित यात्रा और उसके कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक पुष्टि को ही अंतिम माना जाना चाहिए.

Continue reading on the app

  Sports

कौन हैं 23 साल की अनुष्का शर्मा? जिन्हें इस भारतीय टीम की मिली कमान, ऑस्ट्रेलिया से लेंगी टक्कर

भारत और ऑस्ट्रेलिया की महिला A टीमों के बीच सितंबर में तीनों फॉर्मेट की सीरीज खेली जाएगी, जिसके लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत दौरे पर आने वाली है. इस सीरीज के लिए ही BCCI ने स्क्वॉड का ऐलान किया है. Thu, 27 Aug 2026 20:07:07 +0530

  Videos
See all

TMC News: बागी 20 सांसदों की जाएगी सांसदी? NCPI | Saayoni Ghosh | Mamata Banerjee | OM Birla | N18P #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-27T15:15:12+00:00

ChakraView | Sumit Awasthi | चीन ने नेपाल को किया अलर्ट.. 72 घंटे में फट सकती है झील #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-27T15:09:02+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers