किडनी हमारे शरीर का एक बेहद जरूरी अंग है। यह ब्लड को साफ करने, शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने और पानी व मिनरल्स का संतुलन बनाए रखना का काम करती है। लेकिन अनहेल्दी डाइट, डायबिटीज, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर और गलत लाइफस्टाइल की वजह से धीरे-धीरे किडनी कमजोर होने लग सकती है। हालांकि शुरूआती दौर में किडनी की समस्या आसानी से पहचान में नहीं आती है। क्योंकि इसके लक्षण काफी सामान्य लग सकते हैं।
लेकिन आपका शरीर कुछ ऐसे संकेत देने लगता है, जिस पर अगर समय रहते ध्यान दें, तो गंभीर समस्या से बचा जा सकता है। सुबह सोकर उठने के बाद दिखाई देने वाले कुछ लक्षण किडनी की खराब कार्यक्षमता की तरफ इशारा कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको किडनी डैमेज के शुरूआती लक्षणों और बचाव के तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं।
सुबह फेस और आंखों के नीचे सूजन होना
अगर सुबह उठने के बाद आपके चेहरे या आंखों के नीचे सूजन आदि दिखती है, तो यह किडनी की कार्यक्षमता में कमी का संकेत हो सकता है। जब किडनी सही तरीके से काम नहीं कर पाती है, तो यह सही तरीके से एक्स्ट्रा पानी और नमक बाहर नहीं निकाल पाती। जिस कारण शरीर में तरल जमा होने लगता है।
पेशाब में बदलाव होना
किडनी के अस्वस्थ होने पर पेशाब करने की आदत में बदलाव आ सकता है। रात में ज्यादा पेशाब आना, बार-बार पेशाब महसूस होना, पेशाब में झाग या रंग में बदलाव होना जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सुबह थकान और कमजोरी लगना
जब किडनी कमजोर हो जाती है, तो आपके शरीर में विषैले पदार्थ एकत्र होने लगते हैं। जिस कारण कमजोरी, थकान और ऊर्जा की कमी लग सकती है। वहीं इस स्थिति में सुबह उठने के बाद भी शरीर में भारीपन महसूस हो सकता है।
स्किन में खुजली और रूखापन होना
बता दें कि किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थों का स्तर बढ़ सकता है। जिस कारण स्किन में रूखापन, खुजली और जलन आदि की समस्याएं हो सकती हैं।
किडनी को ऐसे रखें स्वस्थ
रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
नमक का सेलव सीमित मात्रा में करना चाहिए।
बीपी और शुगर को कंट्रोल में रखें।
बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक गोलियां ज्यादा न लें।
हेल्दी और पौष्टिक डाइट और रोजाना एक्सरसाइज को अपनी डेली रूटीन में शामिल करें।
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40 उम्र का पड़ाव ऐसा है कि महिलाओं के शरीर में कई तरह के शारीरिक बदलाव देखने को मिलते हैं। इस एज में हार्मोनल बदलाव का असर मसल्स, हड्डियों और शरीर के टिश्यू पर भी पड़ता है। खासतौर पर कुछ महिलाओं को कमर में अकड़न, कोर मसल्स में कमजोरी या यूरिन लीकेज की परेशानी से जूझना पड़ता है। इसलिए बढ़ती उम्र के साथ इन बदलावों को समझना और शरीर की देखभाल करना बेहद जरुरी है।
खासकर पेल्विक फ्लोर और डीप कोर मसल्स शरीर को मजबूती देने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। पेल्विक फ्लोर मसल्स ब्लैडर, आंतों और पेल्विक ऑर्गन्स को सपोर्ट करने के साथ ब्लैडर को कंट्रोल करने में मदद करता है। गौरतलब है कि मजबूत कोर सही पोश्चर, बैलेंस और डेली एक्टिविटीज को आसान बनाता है।
पेल्विक कोर और कोर को मजबूत करने के लिए 3 एक्सरसाइज
बैंडेड ग्लूट ब्रिज
बैंडेड ग्लूट ब्रिज एक स्ट्रेंथ एक्सरसाइज है, जो कि ग्लूट्स, हिप्स और कोर की मसल्स पर काम करती है। घुटनों के ऊपर लगाया गया रेजिस्टेंस बैंड हल्का खिंचाव देता है और हिप्स को सही पोजीशन में रखता है।
बैंडेड ग्लूट ब्रिज
इसे करने के लिए घुटनों के ठीक ऊपर मिनी रेजिस्टेंस बैंड लगाएं। पीठ के बल लेट जाएं और घुटनों को मोड़कर पैरों को जमीन पर रखें। अब पैरों के बीच में हिप्स जितनी दूरी रखें। बैंड खिंचाव के साथ धीरे से घुटनों को बाहर की तरफ लेकर आएं। एड़ियों पर जोर देते हुए हिप्स को ऊपर की तरफ उठाए। अब आपको ऊपर पहुंचकर हिप्स की मसल्स को टाइट करें और कमर पर ज्यादा जोर न दें। फिर धीरे-धीरे हिप्स को नीचे लाएं और इस प्रक्रिया को दोहराएं।
साइड क्लैमशेल्स एक्सरसाइज
यह एक्सरसाइज हिप्स, ग्लूट्स और कोर को मजबूत करने के साथ पेल्विक की स्थिरता बनाए रखती है। इसमें पैरों की स्पीड क्लैमशेल के खुलने और बंद होने जैसी होती है।
कैसे करें साइड क्लैमशेल्स
इसे करने करने के लिए आप सबसे पहले एक करवट लेट जाए और घुटनों को मोड़ें। अब घुटनों के ऊपर हल्का रेजिस्टेंस बैंड लगाएं। इसके बाद हिप्स को एक-दूसरे के ऊपर रखें और दोनों पैरों की साथ रखें। अब शरीर के ऊपरी हिस्से को निचले हाथ का सहारा दें। पैरों को साथ रखते हुए ऊपर वाले घुटने को धीरे-धीरे उठाएं और फिर नीचे लेकर आएं। यदि आप साइड प्लैंक कर रही है, तो अपने हिप्स को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
सीटेड नी ओपनर्स एक्सरसाइज कैसे करें
इसे करने के लिए कुर्सी पर आप आराम से सीधी बैठें और दोनों पैरों को जमीन पर रखें। जरुरत पड़ने पर कुर्सी के किनारों का सहारा लें। अब एक पैरों को थोड़ा ऊपर उठाएं और नीचे वाले पैर को धीरे-धीरे सीधा करें। फिर कुछ सेकेंड पोजीशन में रहे और थाइज की मसल्स को एक्टिव रखें। अब पैर को जमीन पर रखें। दोनों पैरों से 10-15 बार दोहराएं।
इस एक्सरसाइज के करने से घुटनों की मूवमेंट अच्छी होती है और क्वाड्रिसेप्स समेत आसपास की मसल्स को मजबूत बना सकती है। यह पैरों फ्लैक्सिबिलिटी को बढ़ाती है।
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