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Piyush Goyal का प्रस्ताव: भारत और जापान शुरू करें Shark Tank स्टार्टअप मॉडल

राजेश राय

तोक्यो, 26 अगस्त वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लोकप्रिय ‘शार्क टैंक’ प्रारूप की तर्ज पर भारत-जापान स्टार्टअप श्रृंखला शुरू करने का बुधवार को प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य दोनों देशों के युवा स्टार्टअप को निवेशकों और संभावित कारोबारी साझेदारों से जोड़ना है। स्टार्टअप पर आयोजित एक परिचर्चा को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारतीय और जापानी स्टार्टअप के बीच अधिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल संपर्क का इस्तेमाल करते हुए ऐसी निवेश प्रस्तुति (पिचिंग) से जुड़ी बैठकें ऑनलाइन आयोजित की जा सकती हैं। गोयल ने कहा, ‘‘भारत और जापान ‘शार्क टैंक’ पहल की तरह एक निवेश प्रस्तुति श्रृंखला विकसित कर सकते हैं, जिससे युवा स्टार्टअप को अपने विचार पेश करने में मदद मिलेगी।’’ उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप जापानी निवेशकों के सामने अपने विचार पेश कर सकते हैं जबकि जापानी स्टार्टअप भारत में साझेदार और कारोबारी अवसर तलाश सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ जूम कॉल और इंटरनेट के जरिये वैश्विक संपर्क के इस दौर में हम अधिक से अधिक निवेश प्रस्तुति सत्र आयोजित कर सकते हैं, जहां भारतीय स्टार्टअप जापानी निवेश के लिए तथा जापानी स्टार्टअप भारत में साझेदारों के लिए अपने विचार पेश कर सकें।’’ गोयल ने कहा कि यह पहल शुरुआती निवेश प्रस्तुति से आगे वास्तविक कारोबारी सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाकर दोनों देशों के वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘हम मिलकर अधिक कारोबारी संपर्क स्थापित करें और निवेश प्रस्तुति के शुरुआती चरण, फिर निवेश और उसके बाद विस्तार की दिशा में आगे बढ़ें।’’ मंत्री ने जापानी कंपनियों और स्टार्टअप को भारत के साथ काम करने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग से समृद्धि के व्यापक अवसर पैदा होंगे। गोयल ने कहा, ‘‘ मैं आप सभी को भारत आने और हमारे साथ मिलकर काम करने का निमंत्रण देता हूं, क्योंकि जापान और भारत मिलकर समृद्धि एवं बेहतर भविष्य के लिए सकारात्मक बदलाव की बड़ी ताकत बन सकते हैं।’’ मंत्री ने जापान के इंजीनियरिंग क्षेत्र को भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी करने का भी आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं भारत-जापान गहन प्रौद्योगिकी पूंजी गलियारे का सुझाव देता हूं, जहां परिपक्व ‘यूनिकॉर्न’ कंपनियों के साथ-साथ विशेष रूप से शुरुआती चरण के वित्तपोषण के लिए बड़ी मात्रा में दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध हो। इससे इन स्टार्टअप के विचारों तथा नवाचारों को सफल कहानियों में तब्दील करने में मदद मिल सकती है।’’ उन्होंने कहा कि भारत डिजाइन से लेकर बड़े पैमाने पर तैनाती तक पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराता है और देश में उत्पादों के परीक्षण के साथ-साथ उनकी बिक्री एवं बड़े पैमाने पर तैनाती के लिए भी बाजार है। उन्होंने विश्वविद्यालयों और उद्यम पूंजी कोषों के बीच सहयोग बढ़ाने का भी सुझाव दिया। गौरतलब है कि ‘शार्क टैंक’ एक बेहद लोकप्रिय ‘बिजनेस रियलिटी टेलीविजन शो’ है। इसमें नए उद्यमी अपने व्यावसायिक विचार, उत्पाद या सेवा को अमीर निवेशकों (जिन्हें ‘शार्क्स’ कहा जाता है) की एक समूह के सामने पेश करते हैं।

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मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते समय क्यों नहीं देखना चाहिए पीछे मुड़कर? जानें इसका धार्मिक महत्व और नियम

Temple visit rules: हिंदू धर्म में मंदिर जाने और भगवान के दर्शन करने से जुड़े कई नियम बताए गए हैं, जिनमें से एक अहम नियम यह भी है कि मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते समय पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। मान्यता है कि इस तरह पीछे देखना अशुभ माना जाता है और इससे पूजा-अर्चना का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। यही कारण है कि श्रद्धालु आज भी मंदिर जाते समय इस परंपरा का विशेष ध्यान रखते हैं।

पीछे न देखने के पीछे की धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मंदिर की ओर बढ़ना और सीढ़ियां चढ़ना भगवान की ओर आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान पीछे मुड़कर देखने का अर्थ है कि भक्त का ध्यान सांसारिक विषयों की ओर भटक रहा है, जो भगवान के प्रति उसकी एकाग्रता और श्रद्धा में कमी को दर्शाता है। इसी वजह से मंदिर की ओर बढ़ते समय पूरी तरह भगवान पर ध्यान केंद्रित रखने की सलाह दी जाती है।

कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि पीछे मुड़कर देखने से व्यक्ति के भीतर संदेह और अस्थिरता का भाव उत्पन्न होता है, जबकि भक्ति मार्ग में दृढ़ संकल्प और एकाग्रता को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

मंदिर जाने से जुड़े अन्य जरूरी नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मंदिर में प्रवेश करने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना अनिवार्य माना जाता है। इसके अलावा मंदिर परिसर में प्रवेश करते समय दाहिने पैर से अंदर जाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए, बल्कि शांत और स्थिर मन से धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ना चाहिए।

मंदिर परिसर में इन बातों का भी रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर परिसर में जोर से बातचीत करना, हंसी-मजाक करना या मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इसे मंदिर की पवित्रता और अनुशासन के विपरीत माना जाता है। इसके अलावा मंदिर से बाहर निकलते समय भी भगवान को पीठ दिखाने से बचने और पीछे हटते हुए बाहर आने की परंपरा निभाई जाती है।

श्रद्धा और एकाग्रता का है यह प्रतीक
मान्यता है कि मंदिर जाने से जुड़े ये सभी नियम भक्त के भीतर अनुशासन, श्रद्धा और एकाग्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। कहा जाता है कि जब भक्त पूरी तरह भगवान पर ध्यान केंद्रित करते हुए मंदिर की ओर बढ़ता है, तो उसे पूजा का अधिक फल प्राप्त होता है, जबकि भटकाव भरे मन से की गई पूजा अधूरी मानी जाती है।

आज भी कई श्रद्धालु मानते हैं यह परंपरा
समय के साथ भले ही मंदिरों में भीड़ और व्यवस्थाओं में कई बदलाव आए हों, लेकिन सीढ़ियां चढ़ते समय पीछे न देखने की यह परंपरा आज भी कई श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक मानी जाती है। बड़े-बुजुर्ग आज भी मंदिर जाते समय बच्चों को इस नियम की याद दिलाते नजर आते हैं, ताकि यह परंपरा आगे भी बनी रहे।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

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