क्रिकेट का सबसे ऐतिहासिक फॉलोऑन, जब भारत ने चटाई थी ऑस्ट्रेलिया को धूल, हर कोई रह गया था हैरान
Historical Follow On: टेस्ट क्रिकेट में जब-जब फॉलोऑन की बात होती है, तब-तब भारतीय फैंस के जहन में वो टेस्ट मैच आता है, जिसमें टीम इंडिया ने फॉलोऑ खेलकर ऑस्ट्रेलिया को हराया था. क्रिकेट इतिहास में कुछ मुकाबले सिर्फ जीत या हार के लिए नहीं, बल्कि अपने रोमांच के लिए हमेशा याद किए जाते हैं. ऐसा ही एक मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2001 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेला गया था. स्टीव वॉ की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम लगातार 16 टेस्ट मैच जीतकर आई थी और भारत को मुंबई में पहले टेस्ट में 10 विकेट से हराकर यहां पहुंची थी. मगर, कोलकाता में भारत ने फॉलोऑन खेलने के बाद मैच जीतकर इतिहास रच दिया. भारत ऐसा करने वाली टेस्ट इतिहास की सिर्फ तीसरी टीम बनी थी.
क्या है फॉलोऑन?
फॉलोऑन नियम का इस्तेमाल सिर्फ टेस्ट क्रिकेट में होता है, जो इस फॉर्मेट की खूबसूरती को निखारता है. इससके तहत पहली पारी में बड़ी बढ़त यानि कम से कम 250 रनों की बढ़त हासिल करने वाली टीम विपक्षी टीम को तुरंत दूसरी पारी खेलने के लिए बुला सकती है. यानी जिस टीम ने पहले बल्लेबाजी की और बड़ी बढ़त बना ली, वह दूसरी टीम को अपनी दूसरी पारी शुरू करने के लिए मजबूर कर सकती है, बिना खुद दूसरी बार बल्लेबाजी किए. इस नियम का मुख्य उद्देश्य मैच में समय बचाना और परिणाम की संभावना बढ़ाना है.
ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में 445 रन
उस ऐतिहासिक मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी की. टीम ने 445 रन बनाए. कप्तान स्टीव वॉ ने 110 रन की शानदार पारी खेली, जबकि मैथ्यू हेडन 97 और जस्टिन लैंगर 58 रन बनाकर आउट हुए. जेसन गिलेस्पी ने 46, माइकल स्लेटर ने 42 और ग्लेन मैक्ग्रा ने नाबाद 21 रन बनाए. रिकी पोंटिंग 6, एडम गिलक्रिस्ट 0 और शेन वॉर्न भी खाता नहीं खोल सके. भारत की ओर से हरभजन सिंह ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 7/123 लिए और उनकी गेंदबाजी में हैट्रिक भी शामिल थी. जहीर खान ने दो और सौरव गांगुली ने एक विकेट लिया.
भारत पहली पारी में सिर्फ 171 रन पर ढेर
ऑस्ट्रेलिया के 445 रन के जवाब में भारतीय पारी बुरी तरह लड़खड़ा गई. सदगोपन रमेश 0, सचिन तेंदुलकर 10, सौरव गांगुली 23, राहुल द्रविड़ 25 और नयन मोंगिया 2 रन पर आउट हुए. हालांकि वीवीएस लक्ष्मण ने 59 रन की पारी खेलकर कुछ संघर्ष किया. एसएस दास ने 20 और हरभजन सिंह ने 4 रन बनाए. भारत की पहली पारी 171 रन पर खत्म हुई. ऑस्ट्रेलिया की ओर से ग्लेन मैक्ग्रा ने 4/18, जेसन गिलेस्पी और माइकल कास्प्रोविच ने 2-2 विकेट लिए.
भारत पहली पारी में 274 रन से पिछड़ गया और स्टीव वॉ ने बिना समय गंवाए फॉलोऑन लागू कर दिया. उस समय मुकाबला लगभग ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा था.
लक्ष्मण और द्रविड़ की साझेदारी बन गई यादगार
दूसरी पारी में 'टीम इंडिया को अच्छी शुरुआत नहीं मिल सकी. सदगोपन रमेश 30 और एसएस दास 39 रन बनाकर आउट हुए. सचिन तेंदुलकर भी सिर्फ 10 रन बना सके. इसके बाद वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने ऐसी साझेदारी की, जिसने मैच का पूरा रुख बदल दिया.
लक्ष्मण ने 281 रन की ऐतिहासिक पारी खेली, जिसमें 44 चौके शामिल थे. दूसरी ओर द्रविड़ ने 180 रन बनाए और दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 376 रन की साझेदारी की. दोनों बल्लेबाजों ने लगभग पूरा एक दिन बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को थका दिया. सौरव गांगुली ने 48 और जहीर खान ने नाबाद 23 रन बनाए. हरभजन सिंह 8 रन बनाकर नाबाद रहे. भारत ने 657/7 पर पारी घोषित की और ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 384 रन का लक्ष्य रखा.
212 में ऑस्ट्रेलिया को समेटा
दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया को अच्छी शुरुआत मिली. मैथ्यू हेडन ने 67 और माइकल स्लेटर ने 43 रन बनाए. लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने मैच पूरी तरह पलट दिया. जस्टिन लैंगर ने 28, स्टीव वॉ ने 24 और माइकल कास्प्रोविच ने नाबाद 13 रन बनाए. बाकी बल्लेबाज कुछ खास नहीं कर पाए.
हरभजन सिंह ने दूसरी पारी में 6/73 लेकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी. सचिन तेंदुलकर ने भी 3/31 की शानदार गेंदबाजी की और एसएलवी राजू को एक विकेट मिला. ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 212 रन पर ऑलआउट हो गई और भारत ने मुकाबला 171 रन से जीत लिया.
टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत
भारत की यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक थी, क्योंकि टीम इंडिया ने पहली पारी में 171 रन बनाए थे और उसे फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर किया गया था. इसके बावजूद लक्ष्मण और द्रविड़ की ऐतिहासिक साझेदारी और हरभजन की शानदार गेंदबाजी ने मैच का परिणाम बदल दिया. इस जीत के साथ भारत ने ऑस्ट्रेलिया की लगातार 16 टेस्ट जीत की विश्व रिकॉर्ड जीत की लय भी रोक दी और तीन मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर दी.
इस मुकाबले के लिए वीवीएस लक्ष्मण को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. उनकी 281 रन की पारी, द्रविड़ के 180 रन और हरभजन के मैच में कुल 13 विकेट ने मिलकर भारतीय क्रिकेट की सबसे यादगार जीतों में से एक की कहानी लिख दी.
'यह इस्लाम पर हमला', स्कूलों में हिजाब पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर भड़के AIMIM प्रमुख ओवैसी
Asaduddin Owaisi: स्कूलों में हिजाब पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने नाराजगी जताए हुए कड़ी आलोचना की है. ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को इस्लाम पर हमला बताया है. बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के एक स्कूल की नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी गई थी. छात्रा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर तय स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी.
हाईकोर्ट को नहीं देना चाहिए ऐसा फैसला- ओवैसी
मंगलवार को दारुस्सलाम में पार्टी मुख्यालय में आयोजित 'जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने इस फैसले को "इस्लाम पर हमला" बताया. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को ऐसा आदेश नहीं देना चाहिए था, क्योंकि सबरीमाला मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें किसी धर्म में जरूरी चीजों पर विचार किया जा रहा है.
#WATCH | Hyderabad: While attending the grand Jalsa-e-Rahmatul-lil-Alameen gathering held at the party headquarters in Darussalam, AIMIM President Asaduddin Owaisi said, "...Today, a judgment came from the Allahabad High Court. A girl was wearing a hijab to school, and the Court… pic.twitter.com/LSMu3HtYBg
— ANI (@ANI) August 26, 2026
'मैं हाई कोर्ट के इस फैसले से सहमत नहीं हूं'
AIMIM प्रमुख ओवैसी ने कहा, "इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक फैसला आया है. एक लड़की स्कूल में हिजाब पहनकर जाती थी, और कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिजाब नहीं पहना जा सकता. मैं हाई कोर्ट के इस फैसले से सहमत नहीं हूं; मैं इससे इत्तेफाक नहीं रखता. सबरीमाला मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के सामने है, जहां नौ जज यह तय कर रहे हैं कि क्या जरूरी है. आज का फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 का उल्लंघन करता है. आप कौन होते हैं यह तय करने वाले कि इस्लाम के लिए क्या जरूरी है? लड़कियां हिजाब अपने सिर पर पहनती हैं, दिमाग पर नहीं. यह इस्लाम पर हमला है."
Hyderabad, Telangana: AIMIM President Asaduddin Owaisi says, "Uniform Civil Code has been implemented in Uttarakhand, Assam and Gujarat. But if the laws being enforced are essentially based on provisions of the Hindu Marriage Act, Hindu Divorce Act and Hindu Succession Act, then… pic.twitter.com/YaRWrlLemH
— IANS (@ians_india) August 26, 2026
हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं- हाईकोर्ट
बता दें कि मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई धार्मिक ग्रंथ या सबूत पेश नहीं कर पाई जिससे यह साबित हो सके कि स्कार्फ पहनना उसके धर्म का "जरूरी" हिस्सा है, और इसके बिना उसकी आस्था पर असर पड़ेगा. कोर्ट ने यह भी देखा कि तस्वीरों में उसी धार्मिक समुदाय की दूसरी छात्राएं बिना स्कार्फ के दिख रही थीं.
कोर्ट ने कहा कि जब तक ड्रेस कोड एक जैसा है, नेक नीयत से बनाया गया है, भेदभाव-रहित है और इसका मकसद अनुशासन और संस्थान की पहचान बनाए रखना है, तब तक यूनिफॉर्म तय करना मुख्य रूप से स्कूल के अधिकार क्षेत्र में आता है. कोर्ट ने साफ किया कि भले ही छात्रा निचली कक्षाओं में बिना किसी रोक-टोक के स्कार्फ पहनती रही हो, लेकिन इससे उसे स्कूल की यूनिफॉर्म पॉलिसी बदलने के लिए मजबूर करने का कोई पक्का या कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार नहीं मिल जाता.
हिजाब में आने वाली छात्रा को स्कूल में नहीं मिला एडमिशन
जस्टिस जेजे मुनीर और इंद्रजीत शुक्ला की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि स्कूल छात्रा की आस्था की आजादी को कम नहीं कर रहा है, बल्कि सिर्फ संस्थान के अनुशासन की मांग कर रहा है, जिसका यूनिफॉर्म एक जरूरी हिस्सा है. बता दें कि याचिकाकर्ता छात्रा ने उसी स्कूल से हाई स्कूल पास किया था और कक्षा 11 में एडमिशन लेना चाहती थी. उसका कहना था कि वह कक्षा 6 से ही अपनी स्कूल यूनिफॉर्म के ऊपर स्कार्फ पहनती आ रही थी और इस पर कभी कोई आपत्ति नहीं जताई गई. हालांकि, कक्षा 11 में एडमिशन के समय स्कूल मैनेजमेंट ने कहा कि स्कार्फ पहनना ड्रेस कोड का उल्लंघन है और इसी आधार पर उसे एडमिशन देने से इनकार कर दिया.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation











